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‘बैंक लाइन में लग छुट्टियां खराब करने नहीं आएंगे’
‘बैंक लाइन में लग छुट्टियां खराब करने नहीं आएंगे’
Updated Sun, 18 Dec 2016 12:29 AM IST
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ताजमहल
- फोटो : getty
‘मैं नई करेंसी कहां से लूं, एटीएम आपके काम नहीं कर रहे। क्या अमेरिकी डालर को आप आसानी से बदलवा पाएंगे? बैंक की लाइन में लगकर अपनी छुट्टियां खराब करने नहीं आएंगे, इसलिए अब टूर कैंसल है।’ यह मजमून है उस ई-मेल का, जो अमेरिका निवासी लॉरेन कुमैन ने आगरा के एक होटल संचालक को भेजा।
सितंबर में आगरा के तीन दिन का टूर बनाने वाली लॉरेन को 14 दिसंबर को आना था लेकिन नोटबंदी के बाद देशभर में कैश की किल्लत और बैंकों, एटीएम के बाहर लंबी लाइनों की खबर देखकर टूर रद्द कर दिया। अकेले लॉरेन ही नहीं, बल्कि स्पेन के ओडिल पैसलूप ने होटल की बुकिंग कैंसल करते हुए ई-मेल भेजा कि उनके पास ‘रुपया’ नहीं है, इसलिए वह आगरा की विजिट कैंसल कर रहे हैं। मुद्रा संकट टलने के बाद शायद वह आगरा आएं।
ऐसे हजारों ई-मेल अब तक आगरा के होटल और टूर आपरेटरों के पास आ चुके हैं। नोटबंदी के बाद से ताजमहल पर सैलानियों की तादात आधी हो चुकी है। नकदी की कमी के कारण पर्यटक टूर कैंसल करने में ही भलाई समझ रहे हैं। हालांकि ताजमहल पर डेबिट कार्ड से भुगतान के लिए स्वाइप मशीन लगाई गई लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। केवल दिसंबर नहीं, बल्कि फरवरी तक के टूर प्रोग्राम कैंसिल हो रहे हैं।
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आधे रह गए ताज पर सैलानी
20 नवंबर से 10 दिसंबर के बीच ताजमहल पर 5.80 लाख पर्यटक बीते साल आए थे, जबकि इस साल यह संख्या तीन लाख रह गई है। हर दिन 30 हजार से ज्यादा सैलानी ताज पर पहुंचते थे, लेकिन अब वीकएंड पर भी यह आंकड़ा 16-18 हजार तक पहुंच रहा है। आगरा के पर्यटन उद्योग से 3.50 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। 450 से ज्यादा होटलों में वीकएंड पर कमरा मिलना मुश्किल होता था लेकिन इन दिनों होटल क्रिसमस और न्यू ईयर की बुकिंग तक के लिए परेशान हैं।
नोटबंदी के बाद विदेशी पर्यटकों के पास मौजूद पुराने नोट बदलने के लिए कोई सुविधा नहीं दी गई। सैलानी हमारे देश को घूमने आए हैं, न कि बैंक की कतार में लगने। अगले सीजन पर भी नोटबंदी का असर पड़ेगा
- रमेश वाधवा
अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन
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सितंबर में आगरा के तीन दिन का टूर बनाने वाली लॉरेन को 14 दिसंबर को आना था लेकिन नोटबंदी के बाद देशभर में कैश की किल्लत और बैंकों, एटीएम के बाहर लंबी लाइनों की खबर देखकर टूर रद्द कर दिया। अकेले लॉरेन ही नहीं, बल्कि स्पेन के ओडिल पैसलूप ने होटल की बुकिंग कैंसल करते हुए ई-मेल भेजा कि उनके पास ‘रुपया’ नहीं है, इसलिए वह आगरा की विजिट कैंसल कर रहे हैं। मुद्रा संकट टलने के बाद शायद वह आगरा आएं।
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ऐसे हजारों ई-मेल अब तक आगरा के होटल और टूर आपरेटरों के पास आ चुके हैं। नोटबंदी के बाद से ताजमहल पर सैलानियों की तादात आधी हो चुकी है। नकदी की कमी के कारण पर्यटक टूर कैंसल करने में ही भलाई समझ रहे हैं। हालांकि ताजमहल पर डेबिट कार्ड से भुगतान के लिए स्वाइप मशीन लगाई गई लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। केवल दिसंबर नहीं, बल्कि फरवरी तक के टूर प्रोग्राम कैंसिल हो रहे हैं।
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आधे रह गए ताज पर सैलानी
20 नवंबर से 10 दिसंबर के बीच ताजमहल पर 5.80 लाख पर्यटक बीते साल आए थे, जबकि इस साल यह संख्या तीन लाख रह गई है। हर दिन 30 हजार से ज्यादा सैलानी ताज पर पहुंचते थे, लेकिन अब वीकएंड पर भी यह आंकड़ा 16-18 हजार तक पहुंच रहा है। आगरा के पर्यटन उद्योग से 3.50 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। 450 से ज्यादा होटलों में वीकएंड पर कमरा मिलना मुश्किल होता था लेकिन इन दिनों होटल क्रिसमस और न्यू ईयर की बुकिंग तक के लिए परेशान हैं।
नोटबंदी के बाद विदेशी पर्यटकों के पास मौजूद पुराने नोट बदलने के लिए कोई सुविधा नहीं दी गई। सैलानी हमारे देश को घूमने आए हैं, न कि बैंक की कतार में लगने। अगले सीजन पर भी नोटबंदी का असर पड़ेगा
- रमेश वाधवा
अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन