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Jaipur G-Club Firing: लॉरेंस बिश्नोई गैंग से बाह के शूटरों को मिलते 25 लाख रुपये, जानें क्या थी योजना
Wed, 01 Feb 2023 08:31 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 01 Feb 2023 08:31 AM IST
सार
पुलिस को प्रदीप ने बताया कि उसे 35 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। इसमें से 10 लाख रुपये बीकानेर के शूटरों को देने थे।
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सीसीटीवी फुटेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने होटल व्यवसायी से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। गैंग के सपंर्क में आए प्रदीप शुक्ला को होटल व्यवसायी से मिलने वाली रंगदारी की रकम से 35 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। इसमें से दस लाख रुपये बीकानेर के शूटर रखते, जबकि 25 लाख प्रदीप और भूपेंद्र रख लेते। उसे 31 हजार रुपये एडवांस मिले थे। वह बाइक से होटल पर गए थे। गोलियां चलाने के बाद बाइक रास्ते में छोड़ दी। वो बस से दूसरे दिन आगरा आ गए।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि प्रदीप और भूपेंद्र घटना से चार दिन पहले जयपुर पहुंच गए थे। होटल में रुके थे। वहां पर बीकानेर के रिषभ और उसके साथी से मुलाकात हुई। उन्होंने होटल व्यवसायी की रेकी की। इसके बाद बाइक से होटल पहुंचे थे। भूपेंद्र वारदात स्थल पर नहीं पहुंचा था। वह अलग हो गया। दूसरा साथी बाइक स्टार्ट करके खड़ा रहा, जबकि दो ने पिस्टल से गोलियां चलाई थीं। वारदात के बाद पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी थी। इस पर चारों ने एक होटल के बाहर बाइक खड़ी कर दी। यह बाइक ऋषभ की बताई जाती है।
प्रदीप तीनों साथियों को बस से आगरा ले आया। वह पहले फतेहाबाद में अपने एक परिचित के यहां पर पहुंचा। उसने कुछ देर रोका था। इसके बाद बाह चला गया। प्रदीप ने पुलिस की पूछताछ में दो नाम बताए हैं। अब पुलिस उनकी धरपकड़ में लगी है। पुलिस को प्रदीप ने बताया कि उसे 35 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। इसमें से 10 लाख रुपये बीकानेर के शूटरों को देने थे। मगर, रंगदारी नहीं मिल पाई, वो पकड़ लिए गए। पुलिस उन्हें पकड़ लेगी, यह सोचा नहीं था। वह जल्द ही पैसे वाला बनना चाहते थे। इसलिए गैंग में शामिल हो गए।
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पुलिस की पूछताछ में पता चला कि प्रदीप और भूपेंद्र घटना से चार दिन पहले जयपुर पहुंच गए थे। होटल में रुके थे। वहां पर बीकानेर के रिषभ और उसके साथी से मुलाकात हुई। उन्होंने होटल व्यवसायी की रेकी की। इसके बाद बाइक से होटल पहुंचे थे। भूपेंद्र वारदात स्थल पर नहीं पहुंचा था। वह अलग हो गया। दूसरा साथी बाइक स्टार्ट करके खड़ा रहा, जबकि दो ने पिस्टल से गोलियां चलाई थीं। वारदात के बाद पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी थी। इस पर चारों ने एक होटल के बाहर बाइक खड़ी कर दी। यह बाइक ऋषभ की बताई जाती है।
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प्रदीप तीनों साथियों को बस से आगरा ले आया। वह पहले फतेहाबाद में अपने एक परिचित के यहां पर पहुंचा। उसने कुछ देर रोका था। इसके बाद बाह चला गया। प्रदीप ने पुलिस की पूछताछ में दो नाम बताए हैं। अब पुलिस उनकी धरपकड़ में लगी है। पुलिस को प्रदीप ने बताया कि उसे 35 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। इसमें से 10 लाख रुपये बीकानेर के शूटरों को देने थे। मगर, रंगदारी नहीं मिल पाई, वो पकड़ लिए गए। पुलिस उन्हें पकड़ लेगी, यह सोचा नहीं था। वह जल्द ही पैसे वाला बनना चाहते थे। इसलिए गैंग में शामिल हो गए।
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