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ककरैठा में बाबा भुड़कनाथ के ‘बूटी मेले’ का समापन
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Mon, 02 Nov 2015 02:08 AM IST
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ककरैठा में 41 दिन से लगा ‘बूटी मेला’ सोमवार को समाप्त हो जाएगा। बूटी बांटने वाले बाबा भुड़कनाथ अब सुबह 8:30 बजे अगले पड़ाव फरह (मथुरा) के सलमपुर गांव के लिए रवाना होंगे। यहां भी सुबह को दूध और शाम को बूटी बंटेगी। तमाम हल्ले के बाद भी परीक्षण नहीं न हो पाने से बूटी की असलियत पर अभी तक पर्दा ही पड़ा है।
ककरैठा में बाबा के आते ही उनके चेलों ने प्रचार किया कि उनके द्वारा बांटी जाने वाली दवा (बूटी) चमत्कारिक है, जो हर मर्ज को ठीक कर देती है। इस पर विश्वास कर इतने लोग पहुंचे कि गांव में मेला लग गया। लेकिन 15 दिन में ही रंग उतरना भी शुरू हो गया। एक तो बाबा के चेलों ने एफडीए और स्वास्थ्य विभाग की टीम का विरोध कर बूटी का परीक्षण नहीं होने दिया। इससे लोगों के मन में शक पैदा हुई। दूसरा बाबा के बारे में अफवाह उड़ाई गई कि वह इच्छाधारी नाग हैं। हालांकि बाबा सफाई देते रहे कि न तो बूटी चमत्कारी है और न ही वह इच्छाधारी लेकिन चेले बाज नहीं आए। इन अविश्वसनीय प्रचारों का बाबा के विश्वासियों पर नकारात्मक असर पड़ा और भीड़ घटने लगी।
हमारा ककरैठा में प्रवास 41 दिन का ही था। इसके पूरा होने पर जा रहे हैं। सलमपुर से लोग के आग्रह पर अगला पड़ाव वहीं पर होगा।
-बाबा भुड़कनाथ
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ककरैठा में बाबा के आते ही उनके चेलों ने प्रचार किया कि उनके द्वारा बांटी जाने वाली दवा (बूटी) चमत्कारिक है, जो हर मर्ज को ठीक कर देती है। इस पर विश्वास कर इतने लोग पहुंचे कि गांव में मेला लग गया। लेकिन 15 दिन में ही रंग उतरना भी शुरू हो गया। एक तो बाबा के चेलों ने एफडीए और स्वास्थ्य विभाग की टीम का विरोध कर बूटी का परीक्षण नहीं होने दिया। इससे लोगों के मन में शक पैदा हुई। दूसरा बाबा के बारे में अफवाह उड़ाई गई कि वह इच्छाधारी नाग हैं। हालांकि बाबा सफाई देते रहे कि न तो बूटी चमत्कारी है और न ही वह इच्छाधारी लेकिन चेले बाज नहीं आए। इन अविश्वसनीय प्रचारों का बाबा के विश्वासियों पर नकारात्मक असर पड़ा और भीड़ घटने लगी।
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हमारा ककरैठा में प्रवास 41 दिन का ही था। इसके पूरा होने पर जा रहे हैं। सलमपुर से लोग के आग्रह पर अगला पड़ाव वहीं पर होगा।
-बाबा भुड़कनाथ