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UP News: आगरा में बने दीपकों से रोशन होगी अयोध्या, दिन-रात दीये बनाने में जुटे कुम्हार
Sat, 19 Oct 2024 09:49 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 19 Oct 2024 09:49 AM IST
सार
दिवाली पर अयोध्या आगरा में बने दीपकों से रोशन होगी। इसके लिए आगरा के कुम्हारों को बड़ी संख्या में ऑर्डर मिला है। जिसके बाद ये लोग दिन रात दीये बनाने में जुटे हुए हैं।
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दीये बनाने में जुटे कुम्हार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिवाली पर अयोध्या में 25 लाख दीप जलाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य ने आगरा के कुम्हारों की चांदी कर दी है। सरकार आगरा के कुम्हारों से मिट्टी के दीपक बनवा रही है।
मोती कटरा निवासी कुंभकार मोहन लाल ने बताया कि वर्ष 2021 में अयोध्या से लगभग एक लाख दीपों का ऑर्डर मिला था। वर्ष 2022 में भी दोबारा इतने ही दीयों का ऑर्डर मिला। वर्ष 2023 में दो लाख दीपों का ऑर्डर मिला। इस बार भी बड़ा ऑर्डर मिला है।
मोहन लाल ने कहा कि योगी सरकार माटी कला को प्रोत्साहन दे रही है। उनके उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ी है। मिट्टी के बर्तन बनाने का जो काम धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा था, उसमें नई उम्मीद और ऊर्जा आई है। वहीं, पंचकुइया के राम किशन ने बताया कि पहले दिवाली पर चीन के बने दीपकों का बाजार पर कब्जा था।
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अब मिट्टी के दीपों की मांग बड़ी है। प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद से चाय, कॉफी और पीने के पानी के कप या गिलासों की जगह अब मिट्टी के कुल्हड़ का प्रयोग बढ़ा है। शिल्पकारों को मिट्टी के बर्तन बनाने का काम मिल रहा है।
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मोती कटरा निवासी कुंभकार मोहन लाल ने बताया कि वर्ष 2021 में अयोध्या से लगभग एक लाख दीपों का ऑर्डर मिला था। वर्ष 2022 में भी दोबारा इतने ही दीयों का ऑर्डर मिला। वर्ष 2023 में दो लाख दीपों का ऑर्डर मिला। इस बार भी बड़ा ऑर्डर मिला है।
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मोहन लाल ने कहा कि योगी सरकार माटी कला को प्रोत्साहन दे रही है। उनके उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ी है। मिट्टी के बर्तन बनाने का जो काम धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा था, उसमें नई उम्मीद और ऊर्जा आई है। वहीं, पंचकुइया के राम किशन ने बताया कि पहले दिवाली पर चीन के बने दीपकों का बाजार पर कब्जा था।
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अब मिट्टी के दीपों की मांग बड़ी है। प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद से चाय, कॉफी और पीने के पानी के कप या गिलासों की जगह अब मिट्टी के कुल्हड़ का प्रयोग बढ़ा है। शिल्पकारों को मिट्टी के बर्तन बनाने का काम मिल रहा है।