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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   August Kranti: 79 Years Ago On August 28 Chamraula Incident Happened

अगस्त क्रांति: नहीं पिया अंग्रेज के हाथ से पानी, शहादत को गले लगाया, जलाया था स्टेशन, लंदन तक सुनाई दी थी गूंज

Sat, 28 Aug 2021 02:46 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 28 Aug 2021 02:46 PM IST
सार

सुरक्षाकर्मियों से बचते हुए स्टेशन के अंदर घुस गए और मिट्टी का तेल डाल कर परिसर को आग के हवाले कर दिया। कुछ युवकों ने पट

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August Kranti: 79 Years Ago On August 28 Chamraula Incident Happened
अगस्त क्रांति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उस दिन रक्षाबंधन का त्योहार था। सड़क पर चहल-पहल काफी थी। चौराहों पर पुलिस की गश्ती गाड़ियां खड़ी थीं। इस बीच आजादी के मतवालों ने चमरौला स्टेशन की ओर रुख किया। सुरक्षाकर्मियों से बचते हुए स्टेशन के अंदर घुस गए और मिट्टी का तेल डाल कर परिसर को आग के हवाले कर दिया। कुछ युवकों ने पट

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रियां उखाड़ दीं और टेलीफोन की लाइनें काट दीं। अंग्रेजों की गोलीबारी में कई क्रांतिकारी घायल हुए। उन्हें अंग्रेजों ने पानी पीने के लिए दिया लेकिन युवकों ने नकार दिया और शहादत को गले लगाया। चार क्रांतिकारी शहीद हो गए। इस कांड के गूंज लंदन तक पहुंची थी।  
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ताजनगरी में अगस्त क्रांति की ज्वाला जोरों पर धधक रही थी। क्रांतिकारियों ने एत्मादपुर तहसील के चमरौला स्टेशन को निशाना बनाने की योजना तैयार की। 28 अगस्त, 1942 को सुबह के करीब पौने ग्यारह बजे सीताराम गर्ग और श्रीराम आभीर के नेतृत्व में स्टेशन पर हमला बोला गया। क्रांतिकारी किशन लाल स्वर्णकार ने स्टेशन के दफ्तर में मिट्टी का तेल डालकर जैसे ही माचिस जलाई, पुलिस ने गोली चला दी। किशनलाल के हाथ की कई अंगुलियां उड़ गईं। हालांकि उनके दूसरे साथियों ने परिसर को आग के हवाले कर दिया। 

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पुलिस की फायरिंग में सोरन सिंह और साहब सिंह मौके पर ही शहीद हो गए थे। क्रांतिकारी उल्फत सिंह, खजान सिंह, सीताराम गर्ग, किशनलाल, सोहनलाल गुप्ता, प्यारेलाल, डूमर सिंह, बाबूराम घायल बुरी तरह घायल हुए। अंग्रेज अधिकारी दोनों शहीदों के शव और घायल उल्फत सिंह व खजान सिंह को रेल के इंजन में लेकर टूंडला रवाना हुए। रास्ते में उल्फत सिंह ने पानी मांगा लेकिन अंग्रेजों के हाथ से पीने से मना कर दिया। अंग्रेज भी पानी पिलाने की जिद पर अड़ गए और टूंडला पहुंचने से पहले ही उल्फत और खजान सिंह शहीद हो गए। इस कांड की गूंज लंदन तक पहुंची और वहां से जांच अधिकारी भी आगरा आए थे। 

युवक ने की थी मुखबिरी 
चमरौला रेलवे स्टेशन पर हमले की योजना 26 अगस्त को तैयार की गई थी। इतिहासकार बताते हैं कि इस बैठक में शामिल एक युवक ने पुलिस से मुखबिरी कर दी थी। जिस कारण वहां पहले से ही एसएसी (अब पीएसी) के जवान घात लगाए बैठे थे। जैसे ही क्रांतिकारी परिसर के अंदर पहुंचे थे, जवानों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। 

ग्रामीणों ने छिपा ली पहचान 
जो क्रांतिकारी शहीद हुए पुलिस ने उनकी पहचान का काफी प्रयास किया। आसपास के गांवों में पूछताछ की गई। बाद में सभी का चमरौला में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव वालों ने किसी की पहचान नहीं बताई। जिन महिलाओं के पति शहीद हुए थे, उन्होंने अपने सुहाग चिन्ह भी नहीं उतारे। काफी दिनों बाद पुलिस उनकी पहचान पता कर पाई। 

भेष बदल कर इलाज करने आते थे डॉक्टर
इस कांड के घायल युवकों को भी पुलिस की नजरों से दूर रखा गया। उनका इलाज आगरा में कराया गया। गांव रूपधनूं के उल्फत सिंह चौहान निर्भय व रामसिंह चौहान ने इलाज कराने की कमान संभाली थी।
फिरोजाबाद के डॉ. प्यारेलाल गहलौत भेष बदलकर उनका इलाज करने आते थे। पुलिस ने इस दौरान करीब 300 युवकों को गिरफ्तार किया था लेकिन साक्ष्यों के अभाव में ढाई महीने बाद रिहा कर दिया गया। 

दशकों तक याद रखेंगे 
बरहन व चमरौला कांड दशकों तक याद रखे जाएंगे। क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा दिए थे। एत्मादपुर के गांवों पर अंग्रेजों ने 21,450 रुपये का जुर्माना भी ठोंका था। -प्रो. सुगम आनंद, वरिष्ठ इतिहासकार

अगस्त क्रांति: जब अंग्रेजों ने आगरा पर ठोंका था 65 हजार का जुर्माना, जद में आए थे आगरा के 41 गांव

 
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