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Health: घर में मौजूद ये चीजें दे रहीं बच्चों को अस्थमा, पालतू जानवर भी खतरनाक; चिकित्सकों ने ये बताया

Tue, 05 May 2026 10:53 AM IST
Dhirendra Singh धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 05 May 2026 10:53 AM IST
सार

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि घर में पालतू जानवर, कारपेट और धूल-धुएं के कारण बच्चों में अस्थमा और एलर्जी के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 40% मामलों में घरेलू प्रदूषण मुख्य कारण बन रहा है।

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Asthma Cases Rising in Children Due to Pets and Indoor Pollution Doctors Warn in Agra
अस्थमा दिवस - फोटो : Freepik

विस्तार

 कुत्ता-बिल्ली पालने, कारपेट बिछाने का शौक बच्चाें को बीमार बना रहा है। इससे एलर्जी हो रही है। इलाज नहीं होने पर बच्चे अस्थमा से पीड़ित हो रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में आने वाले बच्चों में 8.2 फीसदी बच्चों में अस्थमा मिल रहा है। इसमें 40 फीसदी की वजह घर का प्रदूषण बन रहा है।
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एसएन के बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. राजेश्वर दयाल ने बताया कि ओपीडी में 8.2 फीसदी बच्चे अस्थमा के आते हैं। इनमें से 60 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जिनके माता-पिता या खून के रिश्तों में किसी को ये बीमारी है। 40 फीसदी की वजह धूल, धुआं और पालतू जानवर हैं।
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ऐसे घरों के बच्चों की संख्या अधिक है, जहां कारपेट, चादर, पर्दे का उपयोग अधिक है और घर में पालतू जानवर भी हैं। चादर, पर्दे और कारपेट में धूल की अतिसूक्ष्म कण (डस्ट माइट) से एलर्जी होती है। कुत्ता, बिल्ली, खरगोश समेत अन्य पालतू जानवरों के बाल और रूसी से एलर्जी बनती है। इसका स्तर बढ़ने पर ये अस्थमा बन जाता है।
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प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वालों में तीन गुना खतरा
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि जिन क्षेत्रों में धूल-धुआं और वायु प्रदूषण का स्तर खराब है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में अस्थमा का खतरा तीन गुना है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 65-70 फीसदी ऐसे ही लोग हैं। इनमें अचानक सांस फूलने, आंखों से पानी आना, तेज खांसी और सीने में जकड़न की परेशानी मिली। मौसम बदलने और धूल-धुआं के संपर्क में आने पर मर्ज गंभीर बन जाता है।

सीने में जकड़न, हंसने-खेलकूद में खांसी तो कराएं जांच
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि धूल-धुआं, जानवरों के बाल सांस नलिकाओं में पहुंचकर संक्रमण फैलाते हैं। इससे नस सिकुड़ने से सांस लेने में परेशानी होती है। सांस लेते वक्त घरघराहट या सीटी की आवाज आ रही है, हंसने-खेलकूद के समय खांसी आ रही है या फिर सीने में जकड़न है और जल्दी थकान हो रही है तो ये अस्थमा के लक्षण हैं, इसकी तत्काल जांच कराई जानी चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान:
- पालतू जानवरों को सोफा, बेड पर नहीं बिठाएं।
- पर्दे और कारपेट को साफ करने के लिए वैक्यूम क्लीनर का उपयोग करें।

- रसोई घर में हवा की बेहतर निकासी हो, जिससे छौंक का धुआं न भरे।
- विटामिन ए, सी और ई युक्त भोजन करें।

- घर में अस्थमा मरीज है तो जानवर-पक्षियों को न पालें।
- सांस, अस्थमा मरीज डॉक्टर को दिखाकर दवाएं एडजस्ट कराएं।

- धूल, धुआं और निर्माण कार्य क्षेत्र में जाते वक्त मास्क लगा लें।
 
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