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वृंदावन: गोविंद देव मंदिर के निकट बनी धर्मशाला बेची, तोड़ने का काम शुरू
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वृंदावन (मथुरा)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित धरोहर प्राचीन गोविंददेव मंदिर के 100 मीटर के प्रतिषिद्ध क्षेत्र स्थित प्राचीन धर्मशाला को बेच दिया गया है। अब ऐसे तोड़ा जा रहा है। धर्मभाव से प्रेरित होकर इस धर्मशाला का निर्माण कराया गया था।
यह शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अधीक्षण पुरातत्वविद् एएसआई आगरा, मंडलायुक्त आगरा एवं जिलाधिकारी मथुरा को पत्र लिखकर अधिवक्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने की है। उपरोक्त शिकायत में बताया कि उपरोक्त प्राचीन धर्मशाला के संस्थापकों द्वारा धर्मभाव से प्रेरित होकर ब्रज-वृंदावन में आने वाले गरीब, निर्धन, असहाय तीर्थयात्रियों के लिए बेहद कम शुल्क में ठहरने के लिए इसका निर्माण कराया गया था। लेकिन जिला प्रशासन, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ गठजोड़ से उपरोक्त धर्मशाला को बेच दिया गया है।
धर्मशाला के मुख्य द्वार को छोड़कर बाकी हिस्से को जमीदोज कर दिया हैं। अब यहां प्लॉट, फ्लैट एवं व्यावसायिक भवन खोले जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके मुख्य द्वार पर पोस्टर भी लगा दिया गया है। अधिवक्ता ने इस तरह वृंदावन की धर्मशाला संस्कृति को नष्ट होने का खतरा जताया है। शिकायत में यह भी कहा है कि इसी तरह वृंदावन में अनेक धर्मशालाएं खत्म करते हुए वहां व्यवसायिक भवन तैयार हो गए हैं।
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यह शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अधीक्षण पुरातत्वविद् एएसआई आगरा, मंडलायुक्त आगरा एवं जिलाधिकारी मथुरा को पत्र लिखकर अधिवक्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने की है। उपरोक्त शिकायत में बताया कि उपरोक्त प्राचीन धर्मशाला के संस्थापकों द्वारा धर्मभाव से प्रेरित होकर ब्रज-वृंदावन में आने वाले गरीब, निर्धन, असहाय तीर्थयात्रियों के लिए बेहद कम शुल्क में ठहरने के लिए इसका निर्माण कराया गया था। लेकिन जिला प्रशासन, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ गठजोड़ से उपरोक्त धर्मशाला को बेच दिया गया है।
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धर्मशाला के मुख्य द्वार को छोड़कर बाकी हिस्से को जमीदोज कर दिया हैं। अब यहां प्लॉट, फ्लैट एवं व्यावसायिक भवन खोले जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके मुख्य द्वार पर पोस्टर भी लगा दिया गया है। अधिवक्ता ने इस तरह वृंदावन की धर्मशाला संस्कृति को नष्ट होने का खतरा जताया है। शिकायत में यह भी कहा है कि इसी तरह वृंदावन में अनेक धर्मशालाएं खत्म करते हुए वहां व्यवसायिक भवन तैयार हो गए हैं।
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