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Agra News: एक्यूआई पहुंचा 140 के पार, जिला अस्पताल में सांस के मरीज बढ़े
Sun, 19 Oct 2025 12:27 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 19 Oct 2025 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कासगंज। रोशनी का त्योहार दिवाली जहां चारों ओर खुशियां और उल्लास लेकर आता है, वहीं पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं और बढ़ा हुआ वायु प्रदूषण अस्थमा (दमा) और अन्य सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर देता है। ऐसे में डॉक्टरों ने अस्थमा के मरीजों, बच्चों और बुज़ुर्गों को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
दिवाली पर बड़ी मात्रा में जलाए जाने वाले पटाखों से हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक रसायन और अति सूक्ष्म कण मिल जाते हैं। ये महीन कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सांस की नली में सूजन और जलन बढ़ जाती है। इससे अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दिवाली से पहले ही जिला अस्पताल में सांस संबंधी बीमारियों से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। शनिवार को ओपीडी में पहुंचकर 160 मरीजों ने उपचार कराया। सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि दिवाली पर पटाखों से निकलने वाले धुएं और छोटे-छोटे केमिकल कणों से अस्थमा और आंख के रोगियों की समस्याएं बढ़ जाती है। अस्थमा एवं अन्य सांस संबंधी रोग से पीड़ित लोगों को दिवाली पर धुएं वाले पटाखों से बचना चाहिए। दिवाली और उसके बाद कुछ दिनों तक मास्क लगाकर रखें। अगर मास्क न हो तो रूमाल को गीला कर चेहरे पर अच्छे से बांध लें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाओं को नियमित रूप से लेते रहे, उसमें लापरवाही न बरतें। दिवाली के बाद कुछ दिनों तक सुबह और शाम के समय बाहर टहलने या घूमने न जाए। अस्थमा के मरीज अपनी रेस्क्यू इनहेलर हमेशा अपने पास रखें।
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कासगंज। रोशनी का त्योहार दिवाली जहां चारों ओर खुशियां और उल्लास लेकर आता है, वहीं पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं और बढ़ा हुआ वायु प्रदूषण अस्थमा (दमा) और अन्य सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर देता है। ऐसे में डॉक्टरों ने अस्थमा के मरीजों, बच्चों और बुज़ुर्गों को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
दिवाली पर बड़ी मात्रा में जलाए जाने वाले पटाखों से हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक रसायन और अति सूक्ष्म कण मिल जाते हैं। ये महीन कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सांस की नली में सूजन और जलन बढ़ जाती है। इससे अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दिवाली से पहले ही जिला अस्पताल में सांस संबंधी बीमारियों से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। शनिवार को ओपीडी में पहुंचकर 160 मरीजों ने उपचार कराया। सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि दिवाली पर पटाखों से निकलने वाले धुएं और छोटे-छोटे केमिकल कणों से अस्थमा और आंख के रोगियों की समस्याएं बढ़ जाती है। अस्थमा एवं अन्य सांस संबंधी रोग से पीड़ित लोगों को दिवाली पर धुएं वाले पटाखों से बचना चाहिए। दिवाली और उसके बाद कुछ दिनों तक मास्क लगाकर रखें। अगर मास्क न हो तो रूमाल को गीला कर चेहरे पर अच्छे से बांध लें। अस्थमा के मरीज अपनी दवाओं को नियमित रूप से लेते रहे, उसमें लापरवाही न बरतें। दिवाली के बाद कुछ दिनों तक सुबह और शाम के समय बाहर टहलने या घूमने न जाए। अस्थमा के मरीज अपनी रेस्क्यू इनहेलर हमेशा अपने पास रखें।
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