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एपिकॉन-2020: ठीक हो जाएगा मधुमेह-उच्च रक्तचाप का मर्ज, मरीजों पर शोध से सामने आए नतीजे
Wed, 08 Jan 2020 01:17 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 08 Jan 2020 01:17 PM IST
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एपिकॉन में बोलते मुख्य अतिथि डा. ऐन्ड्रयू जे एम बोल्टन
- फोटो : अमर उजाला
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एपिकॉन-2020 में इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन ने मधुमेह को दुनिया भर के लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। कहा कि दुनिया में 35 करोड़ मधुमेह रोगी हैं, इसमें से लगभग 16 करोड़ तो चीन और भारत में ही हैं। यही हाल रहा तो अगले 20-30 सालों में मरीजों की संख्या दुगनी हो जाएगी। फेडरेशन ने आगाह किया कि 36 इंच से अधिक कमर हुई तो मधुमेह समेत पांच गंभीर रोग आपको घेर लेंगे।
फतेहाबाद रोड स्थित होटल केएनसीसी में एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के एपिकॉन-2020 में दूसरे दिन 74 सत्रों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लकवा, हार्टअटैक, हार्ट फेल्यिर, लकवा, संक्रामक बीमारियों पर 260 विशेषज्ञों ने जानकारी दी। इसमें इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. एंड्रयू बोल्टन ने मधुमेह रोगियों में हाईपरटेंशन, किडनी, लकवा, हृदय की बीमारियां होने का 90 फीसदी खतरा बताया है।
कहा कि अभी भारत में 7.20 करोड़ मधुमेह रोगी हैं, चीन में नौ करोड़। स्टडी रिपोर्ट बताती है कि खानपान, दिनचर्या और लापरवाही इसकी सबसे बड़ी वजह है। फेडरेशन भारत समेत सभी देशों में लोगों को जागरूकता के लिए कार्य कर रहा है। इसमें गाइड लाइन जारी की है, जिसमें पुरुष की कमर का आकार 36 इंच और महिलाएं 28 इंच से अधिक होने पर अलर्ट हो जाएं, आगे चलकर मधुमेह समेत पांच गंभीर बीमारियां घेर लेंगी।
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फतेहाबाद रोड स्थित होटल केएनसीसी में एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के एपिकॉन-2020 में दूसरे दिन 74 सत्रों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लकवा, हार्टअटैक, हार्ट फेल्यिर, लकवा, संक्रामक बीमारियों पर 260 विशेषज्ञों ने जानकारी दी। इसमें इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. एंड्रयू बोल्टन ने मधुमेह रोगियों में हाईपरटेंशन, किडनी, लकवा, हृदय की बीमारियां होने का 90 फीसदी खतरा बताया है।
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कहा कि अभी भारत में 7.20 करोड़ मधुमेह रोगी हैं, चीन में नौ करोड़। स्टडी रिपोर्ट बताती है कि खानपान, दिनचर्या और लापरवाही इसकी सबसे बड़ी वजह है। फेडरेशन भारत समेत सभी देशों में लोगों को जागरूकता के लिए कार्य कर रहा है। इसमें गाइड लाइन जारी की है, जिसमें पुरुष की कमर का आकार 36 इंच और महिलाएं 28 इंच से अधिक होने पर अलर्ट हो जाएं, आगे चलकर मधुमेह समेत पांच गंभीर बीमारियां घेर लेंगी।
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मधुमेह
- फोटो : social media
यूनीवर्सिटी ऑफ शीफील्ड के प्रो. सिमोन हेलर ने कहा कि भारत में बीमारियों के बजट में 90 फीसदी कैंसर, आठ फीसदी हृदय रोग और महज दो फीसदी मधुमेह पर खर्च होता है, जबकि भारत में सबसे ज्यादा रोगी मधुमेह केे हैं।
भोजन में 800 कैलारी और व्यायाम-स्वस्थ दिनचर्या अपनाते हैं तो पांच साल से मधुमेह-बीपी के पीड़ित मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। यूके में इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आईडीएफ) की स्टडी में यह पुष्टि हुई है।
आइडीएफ ने यूके में 300 मरीज चुने, जिनको पांच साल से मधुमेह और ब्लडप्रेशर की बीमारी थी। चिकित्सकों ने इनको तीन महीने तक भोजन में 800 कैलोरी ही दी। इनको स्वस्थ दिनचर्या के साथ नियमित व्यायाम कराई गई।
भोजन में 800 कैलारी और व्यायाम-स्वस्थ दिनचर्या अपनाते हैं तो पांच साल से मधुमेह-बीपी के पीड़ित मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। यूके में इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आईडीएफ) की स्टडी में यह पुष्टि हुई है।
आइडीएफ ने यूके में 300 मरीज चुने, जिनको पांच साल से मधुमेह और ब्लडप्रेशर की बीमारी थी। चिकित्सकों ने इनको तीन महीने तक भोजन में 800 कैलोरी ही दी। इनको स्वस्थ दिनचर्या के साथ नियमित व्यायाम कराई गई।
मधुमेह
90 दिनों के बाद जांच में इनकी बीमारी नहीं मिली और मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाएं बंद कर दी गई। फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. एंड्रयू बॉल्टन ने बताया कि औसतन लोग दो से ढाई हजार कैलोरी का भोजन करता है। व्यायाम भी नहीं करता। ऐसे में मधुमेह रोगी कम कैलोरी लेकर अपनी बीमारी से छुटकारा पा सकता है।
इस मौके पर आयोजक सचिव एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि विशेषज्ञों के इन्हीं सुझावों पर मधुमेह-बीपी के मरीजों के लिए एपीआई गाइड लाइन बना रही है। आयोजक चेयरमैन डॉ. टीपी सिंह, डॉ. आशीष गौतम, डॉ. निखिल पुरुसनानी, डॉ. रंजना पांडे, डॉ. प्रभात अग्रवाल, डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, डॉ. मनीष बंसल रहे।
इस मौके पर आयोजक सचिव एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि विशेषज्ञों के इन्हीं सुझावों पर मधुमेह-बीपी के मरीजों के लिए एपीआई गाइड लाइन बना रही है। आयोजक चेयरमैन डॉ. टीपी सिंह, डॉ. आशीष गौतम, डॉ. निखिल पुरुसनानी, डॉ. रंजना पांडे, डॉ. प्रभात अग्रवाल, डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, डॉ. मनीष बंसल रहे।