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सपेरों से मुक्त कराए दुलर्भ प्रजातियों के सांप, सावन में मंदिरों के बाहर चला अभियान

Wed, 31 Jul 2019 12:09 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 31 Jul 2019 12:09 AM IST
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Anti Poaching by Wild Life Sos Team caught rare species of Snakes
सपेरों से मुक्त कराए दुलर्भ प्रजातियों के सांप - फोटो : अमर उजाला
सावन के महीने में शिव मंदिरों पर चल रहे मेलों में सपेरों के पास अवैध रूप से रखे गए 33 सांप वन्य जीव विभाग ने मुक्त कराए। वन्य जीव विभाग और वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम ने एंटी पोचिंग रेड में सोमवार को शिव मंदिरों मन:कामेश्वर, बल्केश्वर और रावली महादेव मंदिर से 24 कोबरा, पांच रैट स्नेक, तीन कॉमन सैंड बोआ और एक रेड सैंड बोआ को मुक्त कराया है।
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वन विभाग और एसओएस की टीम ने सोमवार को जब मंदिरों के बाहर सपेरों को पकड़ने का प्रयास किया तो वह भाग निकले, जबकि सांप को वहीं छोड़ गए। इस दौरान 33 सांप मुक्त कराए गए, उनमें से अधिकांश दयनीय हालत में हैं। इनमें सबसे ज्यादा 24 कोबरा सांप हैं, जिनकी विष ग्रंथि को सपेरों ने निकाल दिया था।
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इन सभी सांपों का इलाज वाइल्ड लाइफ एसओएस के रेस्क्यू फैसिलिटी हॉस्पिटल में किया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ एसओएस सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि सांप पौराणिक कथाओं में पूजनीय हैं, पर उनके साथ क्रूरता हो रही है। लोग जागरूक हों तो ऐसे प्रदर्शन पर प्रभावी रोक लग सकती है।
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मरे हुए सांप दिखाकर पैसे ले रहा था सपेरा
जिस समय टीम ने छापा मारा, उस समय मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं से पैसे ले रहा सपेरा उस सांप को दिखा रहा था, जो मर चुका था। दोनों डलिया में रखे सांप रैट स्नेक और कोबरा भोजन न मिलने से दम तोड़ चुके थे, लेकिन सपेरा उन्हें साथ रखे हुए था।

आगरा सिटी रेंज के रेंजर रामगोपाल सिंह चौहान ने बताया कि सांपों को बेहद बुरी हालत में मुक्त कराया गया है। सभी का चिकित्सीय परीक्षण और इलाज कराया जा रहा है।

आनंद कुमार, डीएफओ, राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट का कहना है कि सांप पकड़कर उनका प्रदर्शन, मनोरंजन के लिए उपयोग करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय अपराध है। अगर कहीं कोई क्रूरता हो रही है तो लोग तुरंत जानकारी दें, इस पर कार्रवाई होगी।
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