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Vankhandi Mahadev: वनखंडी महादेव मंदिर में प्राचीन शिवलिंग का नहीं मिलता कोई छोर, पढ़ें इतिहास और महत्व
Mon, 10 Jul 2023 11:34 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 10 Jul 2023 11:34 PM IST
सार
वनखंडी महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग कितने वर्ष पुरानी है इसका किसी को कुछ भी पता नहीं है और यह कितनी लंबी है या फिर इसका छोर कहां तक है यह भी किसी को नही पता है।
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वनखंडी महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा शहर को शिवालय की नगरी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। मुगलिया इमारतों से घिरे इस शहर में सनातन धर्म के मंदिरों की बड़ी श्रंखला मिलती है। शहर के चारों कोनों पर स्थित प्राचीन शिवालय जिसमें कैलाश, राजेश्वर, पृथ्वीनाथ और बल्केश्वर महादेव मंदिर विशेष स्थान रखते हैं। वहीं शहर के मध्य में बने मनः कामेश्वर मंदिर, रावली मंदिर के साथ ही वनखंडी महादेव की भी कम मान्यता नहीं है। सावन के सोमवार के साथ ही प्रत्येक सोमवार को महादेव के भक्त यहां उमड़ते ही हैं। आइये जानते हैं वनखंडी महादेव मंदिर का इतिहास, मान्यता और महत्व।
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वनखंडी महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के गैलाना रोड सिकंदरा स्थित वनखंडी महादेव मंदिर में दर्शन करने के लिए सावन के महीने में भक्तों का तांता लगता है। यहां शिवलिंग का कोई छोर नहीं है। इसे देखने दूर-दूर से भक्त आते हैं। पुजारी बिजेंद्र बाबा ने बताया कि मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। भगवान भोले की शिवलिंग कसौटी के पत्थर की है, जिसका छोर आज तक किसी को भी नहीं मिला। हम से पहले जो यहां साधु महाराज थे। वह बताते थे कि यहां लक्खा नाम का बंजारा गाय को यमुना किनारे चराने के लिए आता था। तभी उसे यहां शिवलिंग मिला था। टीले पर स्थित शिवलिंग खोदने की कोशिश की लेकिन शिवलिंग छोर न मिलने पर वहीं मंदिर की स्थापना कर दी और वह पूजा करने लगा। जिसके बाद क्षेत्र के लोग भी शिवलिंग की पूजा करने लगे और मंदिर बन गया।
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Vankhandi Mahadev
- फोटो : अमर उजाला
किवदंती है कि यहां बाबा भोले ने कई वर्षों तक सिर के बल तपस्या की थी, जिससे उनकी गर्दन टेढ़ी हो गई थी। बाबा घनश्याम ने भी यहीं भोले नाथ की सेवा व तपस्या की थी। वनखंडी महादेव मंदिर में रोजाना रूद्राभिषेक होते हैं। पूजा के बाद शिवलिंग पर शेषनाथ की आकृति भी दिखने लगती है। यहां सावन में भी भक्तों की भीड़ रहती है।