फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   An eye on the social and political situation of Agra on the pretext of the upcoming UP elections

यूपी का रण : ताज नगरी में कसौटी विकास की...इम्तिहान सियासतदानों का, आगरा मंडल की रिपोर्ट 

Sun, 12 Dec 2021 06:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 12 Dec 2021 06:32 AM IST
सार

2014 के लोकसभा चुनाव में आगरा मंडल की चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे ब्रज में जोरदार विकास के वादे किए। वादे पूरे होने की आस में ब्रज ने लोकसभा चुनाव और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की झोली भर दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ब्रज से 6 मंत्री बनाकर मंडल को पूरा महत्व दिया।

विज्ञापन
An eye on the social and political situation of Agra on the pretext of the upcoming UP elections
आगरा में मेट्रो कार्य... - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सियासी कद के हिसाब से ही यहां की चाहतें भी हैं। चुनावी चर्चा छिड़ते ही यहां लोग गिनाने लगते हैं कि क्या अधूरा है, क्या पूरा हुआ...। उम्मीदों की फेहरिस्त लंबी है, फिर भी जो मुद्दे उभरकर सामने आ रहे हैं उससे साफ है कि इंटरनेशनल एयरपोर्ट, धार्मिक नगरी के विकास, हाईकोर्ट खंडपीठ, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना जैसे सवाल चुनावी इम्तिहान में होंगे। सवालों के बीच मेट्रो को लेकर लोगों में खुशी भी है। वे मानते हैं कि इससे आगरा में विकास बढ़ेगा और बदलाव आएगा।

विज्ञापन


सियासी रसूख की बात करें तो मथुरा से ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा हैं तो पशुपालन मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, आगरा से एमएसएमई राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह, खाद्य प्रसंस्करण एवं नियोजन राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश और औद्योगिक विकास राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति के अलावा मैनपुरी से आबकारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री भी हैं। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद में भाजपा के विधायक पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जीते। आगरा की सभी 9 सीटें भाजपा के खाते में आईं। 
विज्ञापन


फिलहाल इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है। वहीं, सपा के सामने अपने गढ़ मैनपुरी और फिरोजाबाद में सीटों की संख्या बढ़ाने का दबाव है। बसपा ने आगरा में 6 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। बसपा भी अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने के लिए फिर से सोशल इंजीनियरिंग का गणित बैठा रही है। जाहिर है, सपा-बसपा और कांग्रेस के दमखम की परीक्षा भी चुनावी मैदान में होनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आवश्यकता
अब बात मुद्दों की। पूरे विश्व में पहचान रखने वाली भगवान कृष्ण की नगरी हो या प्रेम की निशानी ताजमहल, दोनों इसी मंडल में हैं। दोनों जिलों में सालाना 5 करोड़ से ज्यादा पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दरकार है। पर, अब तक बन नहीं सका। जबकि बलदेव क्षेत्र में एयरपोर्ट के लिए सर्वे भी किया जा चुका था। आगरा में म्यूजियम, ओरिएंटेशन सेंटर की योजनाएं पिछली सरकार ने शुरू की थीं, पर पूरी नहीं हुईं। ऐसा ही हाल आगरा मंडल के दूसरे जिलों फिरोजाबाद और मैनपुरी का रहा, जहां औद्योगिक इकाइयों का विस्तार ताज ट्रैपेजियम जोन  की बंदिशों की वजह से आगे नहीं बढ़ पाया।

कान पक गए जेई बात सुनत-सुनत...
ताजमहल के करीब चाय की दुकान पर चुनावी चर्चाएं चल रही हैं। मुद्दे गरम हैं। बहस के केंद्र में है कि क्या मिला और क्या नहीं मिला। इस चुनावी चर्चा की यहां चर्चा इसलिए, क्याेंकि यह चर्चा यहां के सियासी मिजाज के बारे में बहुत कुछ बता देती है। चाय की चुस्कियों के बीच गरमागरम सवाल उछला- आगरा की सूरत कितनी बदली? मार्बल के शिल्पकार ताहिरुद्दीन सवाल को लपक लेते हैं। वह कहते हैं, चार साल से तो एकउ काम शुरू न भयो, एयरपोर्ट को नाम सुनत-सुनत कान पक गए। 60 हजार शिल्पी हैं, जो विदेशियों के नहीं आने से निराश हैं। कुछ भी बिक नहीं रहा।

  •  उनकी बात में हां में हां मिलाते हुए संदीप अरोड़ा   कहते हैं, एयरपोर्ट हो या म्यूजियम कुछ तो नहीं हुआ। हाईकोर्ट खंडपीठ आई क्या...? टीटीजेड की रोक... सब कुछ वैसा ही तो है।
  •  अरोड़ा की बात पूरी होने का इंतजार किए बिना राकेश चौहान मैदान में कूद पड़े। उन्होंने अपनी दलील दी- अखिलेश सरकार ने ताजगंज प्रोजेक्ट, इनर रिंग रोड, एक्सप्रेसवे, म्यूजियम, ओरिएंटेशन सेंटर जैसे बड़े काम आगरा में किए, पर भाजपा सरकार ने म्यूजियम का नाम बदलने के बाद भी पैसा जारी नहीं किया। जैसा काम अखिलेश सरकार में छूटा था, आज भी वही हाल है।

मथुरा : ब्रज की धरती पर जुगलबंदी की अग्निपरीक्षा

ब्रज की फिजाओं में भी कई सवाल हैं। इनमें स्वच्छ यमुना की मांग है तो 24 घंटे बिजली की भी चाहत। मेट्रो सिटी की तर्ज पर मथुरा के विकास का सपना है तो आलू प्रॉसेंसिंग यूनिट की भी मांग। छाता शुगर मिल शुरू करने को लेकर भी आवाजें हैं तो गोवर्धन समेत तीर्थस्थलों के विकास का मुद्दा भी यहां लोग गिनाना नहीं भूलते। बहरहाल, लोग चर्चाओं में यह भी फख्र से कहते हैं कि सियासी जुगलबंदियों की यहां अग्निपरीक्षा होनी है। अग्निपरीक्षा...? इस सवाल पर सियासी पंडित कहते हैं, मोदी-योगी, अखिलेश-जयंत, मायावती-सतीश चंद्र मिश्रा और राहुल-प्रियंका की जोड़ी की साख ब्रज में दांव पर रहेगी। आगरा मंडल में मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी की सीटों पर राष्ट्रीय लोकदल और सपा का वर्चस्व रहा है तो बसपा अपने जातीय समीकरण के बूते आगरा में दो बार 9 में से 6 सीटें जीत चुकी है। मोदी-योगी का करिश्मा ब्रज में बीते चुनाव में ऐतिहासिक रहा है, जब आगरा में पूरी 9 और मथुरा में पांच में से चार सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया। राहुल-प्रियंका की जोड़ी अपनी खोई हुई जमीन को तलाशने और वोटबैंक में बढ़ोतरी के प्रयास में है।

अस्पताल बनौ न महंगाई कम भई...
भाजपा को ताकत देने वाले एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली नगला चंद्रभान मथुरा के फरह ही में है। संघ और भाजपा के लिए यह तीर्थस्थली की तरह है। यहां भी विकास को लेकर सवाल हैं। फरह के व्यापारी राधेश्याम अग्रवाल चुनावी सवालों पर कहते हैं, हमें क्या मिला? सिर्फ एक इंटरलॉकिंग सड़क बनी। खरीदारी के लिए आए भोजपुर निवासी सत्यप्रकाश पचौरी बीच में ही कहते हैं, अस्पताल बनौ न महंगाई कम भई। डेंगू ने ऐसो कहर ढायो कि गाम में कई बच्चा चल बसे। रैपुरा जाट निवासी भूपेंद्र चौधरी भी ऐसे ही सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, दीनदयाल धाम तक जाने के लिए सरकारी बस की सुविधा तक नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर और बाद में डेंगू ने जो कहर ढाया उसे लोगों को भूलने में वक्त लगेगा।

फिरोजाबाद  : चूड़ी उद्योग को ऑक्सीजन की दरकार

सुहाग की प्रतीक कांच की चूड़ियां फिरोजाबाद की असल पहचान हैं। इससे दो लाख सीधे और परोक्ष रूप से करीब साढ़े चार लाख लोग जुड़े हुए हैं। चुनावी मुद्दों की चर्चा छिड़ते ही कांच उद्यमी नरेश जैन कहते हैं, चूड़ी उद्योग यहां का पारंपरिक उद्योग है। पर, टीटीजेड की बंदिशों में तो यह उद्योग ही जकड़ गया। टीटीजेड की बंदिशें कहती हैं कि केवल गैस से ही इकाइयां चल सकती हैं। दूसरी तरफ, नेचुरल गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। कच्चे माल की कीमतों में भी बेहताशा बढ़ोतरी हुई है।

आप ही बताइए, ऐसे में उद्यमी कैसे प्रतिस्पर्धा में टिकेगा? 53 साल से कांच चूड़ी की इकाई चलाने वाले वयोवृद्ध उद्योगपति हनुमान प्रसाद गर्ग भी ऐसे ही सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन, अखिलेश यादव, राज बब्बर, सपा के कद्दावर नेता रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव ने यहां का प्रतिनिधित्व किया। रघुवर दयाल भी कैबिनेट मंत्री रहे। डिंपल यादव, एसपी सिंह बघेल ने भी जिले को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। पर, किसी भी नेता ने जिले के करीब छह लाख लोगों की रोजी-रोटी का मूल जरिया चूड़ी उद्योग की सुध नहीं ली। राधे गोयल बताते हैं कि वर्ष 2012 में चूड़ी उत्पादन करने वाली 300 इकाइयों में से करीब 200 बंद हो चुुकी हैं। बची सौ इकाइयां भी कितने दिन प्रतिस्पर्धा में रह पाएंगी, यह कह पाना मुश्किल है।

मैनपुरी...सपा के सामने प्रदर्शन बरकरार रखने की चुनौती
मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। यहां के चारों ही सीटों पर रोजगार और विकास के बड़े मुद्दे हैं। करहल के धर्मेंद्र यादव कहते हैं, जिले में रोजगार के कोई भी साधन नहीं हैं। रोजगार के लिए युवा दिल्ली और हरियाणा का रुख करते हैं। हर बार चुनाव में ये मुद्दा उठता है, पर होता कुछ नहीं। वहीं, भोगांव के हेमंत यादव कहते हैं, शहरी क्षेत्रों में तो सड़कें बेहतर हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बुरा हाल है। नहरों में पानी भी नहीं पहुंच रहा है।

  • किशनी निवासी प्रवीन दीक्षित कहते हैं कि सपा हो या भाजपा या फिर कोई दल, सब केवल वादे कर रहे हैं। किसी ने कोई मिल या कोई प्रॉसेसिंग यूनिट लगवाई हो, जिसमें रोजगार मिला हो तो बताएं? वह कहते हैं, मैं तो जो भी वोट मांगने के लिए आएगा उससे रोजगार के मुद्दे पर सवाल जरूर करूंगा।


समान पक्षी विहार का भी नहीं हुआ विकास
मौसम सर्द है। कलेक्ट्रेट के पास चाय की चुस्कियों का मजा ले रहे वीरेंद्र सिंह अपनी बात अलग तरीके से रखते हैं। वह कहते हैं, समान पक्षी विहार का विकास हो सकता था, पर किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। रामसर साइट में शामिल समान पक्षी विहार में विदेशों से पक्षी प्रवास के लिए आते हैं। इसे भरतपुर की तरह प्रचारित किया जाना चाहिए था। इससे रोजगार के भी द्वार खुलते। पर, इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाए जा रहे।

सीटों का गणित

आगरा (9 सीटें)
एत्मादपुर : 2017 में पहली बार भाजपा को जीत मिली। रामप्रताप सिंह चौहान विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय करीब 1.20 लाख, बघेल 75 हजार, दलित 70 हजार, मुस्लिम 30 हजार।
आगरा छावनी (सु.) : भाजपा के डॉ. जीएस धर्मेश विधायक हैं। वह सरकार में मंत्री हैं।
जातिगत समीकरण : एससी करीब 95 हजार, मुस्लिम 70 हजार, वैश्य 40 हजार और ब्राह्मण 30 हजार।
आगरा दक्षिण :  2012 में सीट बनी। भाजपा के योगेंद्र उपाध्याय यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.10 लाख, ब्राह्मण 65 हजार, एससी 40 हजार और वैश्य 30 हजार।
आगरा उत्तर : 2019 में विधायक जगन प्रसाद गर्ग की मृत्यु के बाद हुए उप चुनाव में भाजपा के ही पुरुषोत्तम खंडेलवाल जीते।
जातिगत समीकरण : वैश्य करीब 1.75 लाख, ब्राह्मण 70 हजार, एससी 45 हजार और मुस्लिम 35 हजार।
आगरा ग्रामीण (सु.) :  2012 में सीट एससी के लिए आरक्षित हुई। भाजपा की हेमलता दिवाकर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : एससी करीब 80 हजार, जाट 70 हजार, यादव 45 हजार, क्षत्रिय 40 हजार।
फतेहपुर सीकरी : 2017 में चौधरी उदयभान सिंह ने यहां कमल खिलाया। उन्होंने लगातार दो बार से जीत रहे बसपा के सूरजपाल को शिकस्त दी।
जातिगत समीकरण : जाट करीब 1.12 लाख, एससी 60 हजार, क्षत्रिय 50 हजार, ब्राह्मण 45 हजार और मुस्लिम 35 हजार।
खेरागढ़ : भाजपा के महेश गोयल विधायक हैं। 2007 और 2012 में बसपा के भगवान सिंह कुशवाहा जीते थे।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय करीब 95 हजार, जाट 60 हजार, कुशवाहा 40 हजार और एससी 40 हजार।
फतेहाबाद : भाजपा के जितेंद्र वर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय करीब 75 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, निषाद 45 हजार, वैश्य 40 हजार और कुशवाहा 35 हजार।
बाह : भाजपा की पक्षालिका सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय करीब 1.05 लाख, ब्राह्मण 95 हजार, निषाद 40 हजार और एससी 35 हजार।

मथुरा (5 सीटें)
मथुरा :  56.93% मत हासिल  कर श्रीकांत शर्मा यहां से जीते। शर्मा प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री हैं।
जातिगत समीकरण : वैश्य 1.4 लाख, जाट 1.1 लाख, सैनी 35 हजार, लौधे 40 हजार और मुसलमान 35 हजार।
मांट : बसपा के श्याम सुंदर शर्मा यहां से विधायक हैं। रालोद के योगेश चौधरी से बेहद कांटे के मुकाबले में वह 432 मतों के अंतर से जीते थे।
जातिगत समीकरण : जाट करीब एक लाख, ब्राह्मण 40 हजार, ठाकुर 45 हजार और बघेल 30 हजार।
छाता : कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : जाट एक लाख से अधिक, ब्राह्मण करीब 40 हजार, ठाकुर 70 हजार और मुस्लिम 30 हजार।
गोवर्धन : भाजपा के कारिंदा सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ठाकुर करीब 80 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, जाट 50 हजार और जाटव 55 हजार।
बलदेव (सु.) : भाजपा के पूरन प्रकाश विधायक हैं। 2012 में पूरन प्रकाश रालोद से विधायक थे।
जातिगत समीकरण : जाट करीब एक लाख, ब्राह्मण 50 हजार, अनुसूचित जाति 60 हजार, बघेल, यादव और सैनी 40 हजार।

मैनपुरी (4 सीटें)
मैनपुरी सदर : सपा के राजकुमार यादव उर्फ  राजू 2012 से लगातार इस सीट पर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय व यादव करीब 50-50 हजार, ब्राह्मण 28 हजार, वैश्य 26 हजार, लोधी 25 हजार, शाक्य 23 हजार, एससी 21 हजार और मुस्लिम 20 हजार।
भोगांव : भाजपा से रामनरेश अग्निहोत्री यहां से विधायक और आबकारी मंत्री हैं। उन्होंने सपा सरकार में प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री रहे आलोक शाक्य को हराया था।
जातिगत समीकरण : लोधी करीब 68 हजार, शाक्य 36 हजार, एससी 36 हजार, यादव 30 हजार, क्षत्रिय 29 हजार, ब्राह्मण19 हजार, मुस्लिम 17 हजार और वैश्य 5 हजार
किशनी (सु.) : सपा से ब्रजेश कठेरिया यहां से लगातार दूसरी बार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय करीब 42 हजार, एससी 42 हजार, यादव 40 हजार, शाक्य 30 हजार, ब्राह्मण14 हजार,लोधी 12 हजार, वैश्य 9 हजार और मुस्लिम 18 हजार।
करहल : सपा के सोबरन सिंह यादव यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 1.25 लाख, शाक्य 35 हजार, क्षत्रिय 30 हजार, एससी 22 हजार, ब्राह्मण 16 हजार, लोधी व वैश्य 15-15 हजार और मुस्लिम 18 हजार।

फिरोजाबाद (5 सीटें)
टूंडला (सु.) : भाजपा के प्रेमपाल सिंह धनगर यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : जाटव करीब 65 हजार, क्षत्रिय, यादव व बघेल 40-40 हजार, ब्राह्मण 26 हजार, जाट16 हजार, निषाद 15 हजार, कुशवाह 15 हजार, लोधी 12 हजार, मुस्लिम 20 हजार।
जसराना : भाजपा के रामगोपाल उर्फ पप्पू लोधी विधायक हैं। पहले वह बसपा में थे।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 1.30 लाख, लोधी 1.05 लाख, कुशवाह 35 हजार, बघेल 25 हजार, ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य 15-15 हजार।
फिरोजाबाद :  2012 से भाजपा के मनीष असीजा विधायक हैं। दोनों ही बार उन्होंने पूर्व विधायक सपा के अजीम भाई को शिकस्त दी।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.20 लाख, वैश्य 75 हजार, क्षत्रिय 30 हजार, शंखवार 30 हजार, जाटव 45 हजार, ब्राह्मण 15 हजार।
शिकोहाबाद : भाजपा के डॉ. मुकेश वर्मा विधायक हैं। 1993 में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव यहां से जीते थे।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 80 हजार, निषाद, लोधी 70 हजार, जाटव 40 हजार, ब्राह्मण 14 हजार, मुस्लिम 30 हजार, ब्राह्मण 14 हजार।
सिरसागंज : समाजवादी पार्टी     के हरिओम यादव लगातार दो बार से विधायक हैं। यह 2012 में अस्तित्व में आई।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 1.20 लाख, क्षत्रिय 55 हजार, लोधी 29 हजार, जाटव 27 हजार, बघेल 25 हजार।

लेखा-जोखा : आगरा मंडल
23 विधानसभा क्षेत्र हैं मंडल में
18 सीटों पर परचम फहराया था भाजपा ने। चार सीटें जीती थीं
सपा ने तो एक बसपा ने।

चुनावी फैक्ट
307 करोड़पति प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की 2017 में। यानी कुल जीते प्रत्याशियों का 76.17 फीसदी करोड़पति रहे।
272 करोड़पति विधायक बने 2012 में,  इससे पहले 2007 में 126 करोड़पति जीते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed