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Agra News: डर के बीच चंबल नदी में पुल तक पहुंच रहे राहगीर और वाहन सवार

Sun, 18 Jan 2026 02:37 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 02:37 AM IST
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Amid fear, pedestrians and motorists are reaching the bridge over the Chambal River.
जान हथेली पर: मगरमच्छ के हमले का खौफ..... पुल तक पहुंचने को नदी में पैदल निकल रहे राहगीर
बाह। मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना के उद्योतगढ़ गांव एवं उत्तर प्रदेश के बाह, आगरा के कैंजरा गांव के बीच चंबल नदी पर बने पांटून पुल तक पहुंचने के लिए मगरमच्छ के हमले के खौफ के बीच राहगीर पैदल एवं बाइक से निकलने को मजबूर हैं। पुल बने 4 दिन हो गए, लेकिन लोक निर्माण विभाग डूबे पहुंच मार्ग को दुरुस्त नहीं कर पाया है। पुल निर्माण में बरती गई लापरवाही का खामियाजा दोनों राज्यों के 150 गांवों के लोग भुगत रहे हैं।
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कायदे से कैंजराघाट का पांटून पुल 15 अक्तूबर को बनना था, पीडब्ल्यूडी द्वारा वन विभाग से अनुमति लेने में देरी की बजह से बुधवार को पांटून पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के साथ आवागमन शुरू हुआ था। बुधवार दोपहर चंबल नदी का जलस्तर महज एक फीट बढ़ने से पुल का पहुंच मार्ग डूब गया। 4 दिन बीतने के बाद भी डूबे हुए पहुंच मार्ग को दुरुस्त नहीं किया गया है। पुल के रास्ते छोटे चार पहिया वाहन निकलना बंद हो गए हैं। ट्रैक्टर जरूर निकल रहे हैं। पुल तक पहुंचने के लिए राहगीरों को करीब 35 मीटर चंबल नदी के पानी से होकर पैदल और बाइक से निकलना पड़ रहा है। शनिवार को पैदल और बाइक से पानी से होकर निकले सिलावली के रमेश चंद्र राकेश कुमार, अजय सिंह, रामवती, मोहिनी, नगरा के आकाश सिंह, भागवती, ज्योति, सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मगरमच्छ के हमले का खौफ तो है, लेकिन मजबूरी में पानी से होकर पुल तक पहुंचने का जोखिम उठा रहे हैं। पुल निर्माण में लापरवाही बरती गई है। छोटी दूरी का पुल बनाया गया, जिसकी वजह से बनते ही पहुंच मार्ग डूब गया। डूबे हुए पहुंच मार्ग को 4 दिन में भी ठीक नहीं किया जा सका है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार चंद्रसेन तिवारी ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने की बजह से दिक्कत हुई है, पहुंच मार्ग को दुरुस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है। जलस्तर कम होते ही लोहे की चादर बिछाई जाएगी, जिससे वाहन फंसने का खतरा न रहे।
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