अमर उजाला संवाद: मथुरा के लोगों ने उठाई आवाज, बदहाली से मुक्त की जाए कान्हा की नगरी
- शहर के चहुंमुखी विकास के लिए नागरिकों ने बेबाकी से रखी अपनी राय
- परिक्रमा मार्गों को किया जाए दुरुस्त, शिक्षण संस्थाओं को बर्बाद होने से बचाएं
- वृंदावन की उखड़ी सड़कें बनी हैं मुसीबत, बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में नहीं है लाइट
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कान्हा की नगरी मथुरा में दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं, लेकिन यहां की जर्जर सड़कें, कूड़े के ढेर, खराब स्ट्रीट लाइट देखकर उनका मन दुखी होता है। इन्हीं विषयों को लेकर शुक्रवार को मुकुंदधाम में अमर उजाला ने शहर के लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि ब्रज का महत्व पूरी दुनिया जानती है और लाडले कन्हैया के दर्शन के लिए लोग मथुरा में उमड़ते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि और प्रशासन सुविधाएं देने के नाम पर आंखें मूंदे रहते हैं। वर्षों से यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लोग जर्जर सड़कों पर चोटिल होते रहते हैं। कूड़े के ढेर लोगों की भावनाएं आहत करते हैं।
समाजसेवी के प्रमोद गर्ग कसेरे ने कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था बनाने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। बस स्टैंड से होली गेट तक वाहनों को नहीं जाने दिया जाता। ऐसे में लोग बाजार कैसे जाएं। पुलिस का ध्यान चालान काटने पर रहता है, लेकिन लोगों को सुविधाएं मुहैया कराने में किसी का ध्यान नहीं है।
व्यापारी नेता अजय कांत गर्ग ने कहा कि व्यावसायिक दृष्टि से मथुरा पिछड़ता जा रहा है। साड़ी छपाई, चांदी, पूजा सामान आदि उद्योग-धंधे रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे। समय के साथ इन उद्योगों को आगे बढ़ना चाहिए था, लेकिन उल्टा हो रहा है। शहर के उद्योगों को ध्यान में रखकर नीति बनानी चाहिए।
'एनसीआर में शामिल किया जाए मथुरा'
एडवोकेट कमलकांड उपमन्यु ने कहा कि जिले में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के स्थलों के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया। विकास के नाम पर करोड़ों रुपये आते हैं, लेकिन जिले में कहीं विकास दिखाई नहीं देता। मथुरा में चार धाम हैं, लेकिन इन धामों के क्षेत्र में विकास नहीं है।
होटल कारोबारी अमित जैन ने कहा कि विश्वविख्यात मथुरा के विकास के प्रति हमेशा से लापरवाही बरती गई है। यातायात व्यवस्था से लेकर बिजली, पानी, सड़क तक पर ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र यमुना से गंदगी साफ नहीं हो सकी। विकास के लिए योजना बनानी चाहिए।
समाजसेवी अनुज गर्ग ने कहा कि शहर की जानीमानी शिक्षण संस्थाएं मैनेजमेंट के आपसी विवाद में बर्बाद हो रही हैं। इन संस्थाओं को बचाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। बिजली, पानी, सड़क, सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। 84 कोस के परिक्रमा मार्ग का विकास होना चाहिए।
समाजसेवी कुंवर नरेंद्र सिंह ने कहा कि मथुरा के विकास के लिए इस शहर को एनसीआर में शामिल किया जाना चाहिए। मथुरा शहर को धार्मिक स्थल घोषित करें, जिससे यहां का चहुंमुखी विकास हो सके। सीवर डालने के नाम पर शहर को खोद कर डाल दिया है। विकास कार्य में प्रशासन की प्लानिंग दिखाई नहीं देती।
वृंदावन की गलियां बदहाल, बंदरों का है आतंक
समाजसेवी कपिल उपाध्याय ने कहा कि वृंदावन मंदिरों की नगरी है। यहां अधिकांश लोगों की आजीविका का साधन दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालु हैं। इन दिनों मंदिर बंद हैं, श्रद्धालु नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पूरे वृंदावन में रोजाना लॉकडाउन के हालात बने हुए हैं। लोगों की आय के साधन बंद हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
समाजसेवी सुरेश शर्मा ने कहा कि बांकेबिहारी मंदिर की परिक्रमा करने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। परिक्रमा मार्ग में भवनों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में परिक्रमा करने के लिए स्थान का अभाव हो जाता है। परिक्रमा मार्ग और वृंदावन की गलियों में गंदगी का अंबार लग जाता है, इससे श्रद्धालु आहत होते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता पवन गौतम ने कहा कि शहर के विकास के लिए संबंधित विभागों में तालमेल दिखाई नहीं देता। सीवर, बिजली, पेयजल आदि के नाम पर एक ही सड़क कई-कई बार खोदी जाती है। इस पर बेवजह धन भी खर्च होता है। अधिकारी तालमेल से विकास कार्य कराएं तो लोगों को परेशानी नहीं होगी।