{"_id":"5f54efd2f1ddf3020376f77f","slug":"amar-ujala-hindi-hai-hum-campaign-scholars-said-hindi-increase-promotion-of-hindi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"#हिंदीहैंहमः 'छोड़नी होगी अंग्रेजों की मानसिकता, हिंदी का प्रचार-प्रसार बढ़ाना जरूरी'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
#हिंदीहैंहमः 'छोड़नी होगी अंग्रेजों की मानसिकता, हिंदी का प्रचार-प्रसार बढ़ाना जरूरी'
Mon, 07 Sep 2020 12:03 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:03 AM IST
सार
हिंदी का प्रचार- प्रसार कर इसे सुंदर- सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। इसके बाद ही हिंदी की महत्ता दुनिया को समझाई जा सकती है। अमर उजाला के व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने अपनी राया साझा की।
विज्ञापन
हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिंदी भारत की पहचान है। ऐसे में हिंदी भाषा के प्रयोग पर हमें गर्व की अनुभूति करनी चाहिए। अंग्रेजी की मानसिकता को छोड़ना होगा। इसके बाद ही हिंदी की व्यापकता बढ़ेगी। वहीं हिंदी का प्रचार- प्रसार कर इसे सुंदर- सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। इसके बाद ही हिंदी की महत्ता दुनिया को समझाई जा सकती है। अमर उजाला के व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने अपनी राया साझा की।
हिंदी भाषा पर मुझे गर्व है हिंदी भारत की राजभाषा है लेकिन राष्ट्रभाषा बनने में अनेक रोड़े हैं। इसका प्रमुख कारण हम हिंदी भाषाइयों का अनजाने में ही सही दैनिक प्रयोग में हिंदी से विमुख होना है। हम निमंत्रण पत्र अंग्रेजी में छपवाते हैं।
प्रतिष्ठानों के नाम अंग्रेजी में रखते हैं। अन्य भाषाओं का सीखना बुरा नहीं है, लेकिन अपनी भाषा पर गर्व भी होना चाहिए। हिंदी भाषा सरल भी है और वैज्ञानिक भी। सच तो यह है कि हिंदी ही भारत की पहचान है। अपनी हिंदी पर मुझे गर्व है । - संतोष कुमार सिंह साहित्यकार सेवानिवृत्त अभियंता, मथुरा रिफाइनरी
विज्ञापन
विज्ञापन
हिंदी भाषा पर मुझे गर्व है हिंदी भारत की राजभाषा है लेकिन राष्ट्रभाषा बनने में अनेक रोड़े हैं। इसका प्रमुख कारण हम हिंदी भाषाइयों का अनजाने में ही सही दैनिक प्रयोग में हिंदी से विमुख होना है। हम निमंत्रण पत्र अंग्रेजी में छपवाते हैं।
विज्ञापन
प्रतिष्ठानों के नाम अंग्रेजी में रखते हैं। अन्य भाषाओं का सीखना बुरा नहीं है, लेकिन अपनी भाषा पर गर्व भी होना चाहिए। हिंदी भाषा सरल भी है और वैज्ञानिक भी। सच तो यह है कि हिंदी ही भारत की पहचान है। अपनी हिंदी पर मुझे गर्व है । - संतोष कुमार सिंह साहित्यकार सेवानिवृत्त अभियंता, मथुरा रिफाइनरी
विज्ञापन
संतोष कुमार सिंह.उपेंद्र त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी से प्यार है तो उसे छिपाइये मत अपितु उसे व्यक्त करिए। हिंदी के प्रति हमारी अभिव्यक्ति का सही तरीका यह होगा कि हम हिंदी के अच्छे साहित्य को न केवल स्वयं पढ़ें अपितु दूसरों को भी प्रेरित-प्रोत्साहित करें। इससे कम से कम दो प्रत्यक्ष लाभ होंगे।
हमारी अपनी हिंदी सुधरेगी अर्थात हम अच्छी हिंदी बोलना-लिखना सीखेंगे औश्र हिंदी के अच्छे साहित्य का बाजार बढ़ेगा। हिंदी का प्रचार-प्रसार कर इसे सुंदर-सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। - उपेंद्र त्रिपाठी सेवानिवृत्त प्रवक्ता, चंपा अग्रवाल इंटर कॉलेज, मथुरा
हिंदी भारत के बहुसंख्यक लोगों की भाषा होने के साथ संसार की तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। ऐतिहासिक दृष्टि से हिंदी युग की मध्यदेशीय भाषाओं संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश आदि की उत्तराधिकारी है। वस्तुत: हिंदी संपूर्ण भारत में व्याप्त है।
आज हिंदी भाषा के महत्व को इससे समझा जा सकता है कि फिल्म इंडस्ट्रीज के साथ विभिन्न टीवी चैनलों में हिंदी का दबदबा है। दक्षिण भारत की अधिकांश फिल्म हिंदी में डब हो रही है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत मातृभाषा में शिक्षा को बल देते हुए मातृभाषा, संपर्क भाषा और अंतर्राष्ट्रीय भाषा की पैरवी करते हुए त्रिभाषा सूत्र को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।- मधुकरलाल नागर पीजीटी हिंदी संस्कृति पब्लिक स्कूल, बलदेव
हमारी अपनी हिंदी सुधरेगी अर्थात हम अच्छी हिंदी बोलना-लिखना सीखेंगे औश्र हिंदी के अच्छे साहित्य का बाजार बढ़ेगा। हिंदी का प्रचार-प्रसार कर इसे सुंदर-सुदृढ़ बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। - उपेंद्र त्रिपाठी सेवानिवृत्त प्रवक्ता, चंपा अग्रवाल इंटर कॉलेज, मथुरा
हिंदी भारत के बहुसंख्यक लोगों की भाषा होने के साथ संसार की तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। ऐतिहासिक दृष्टि से हिंदी युग की मध्यदेशीय भाषाओं संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश आदि की उत्तराधिकारी है। वस्तुत: हिंदी संपूर्ण भारत में व्याप्त है।
आज हिंदी भाषा के महत्व को इससे समझा जा सकता है कि फिल्म इंडस्ट्रीज के साथ विभिन्न टीवी चैनलों में हिंदी का दबदबा है। दक्षिण भारत की अधिकांश फिल्म हिंदी में डब हो रही है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत मातृभाषा में शिक्षा को बल देते हुए मातृभाषा, संपर्क भाषा और अंतर्राष्ट्रीय भाषा की पैरवी करते हुए त्रिभाषा सूत्र को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।- मधुकरलाल नागर पीजीटी हिंदी संस्कृति पब्लिक स्कूल, बलदेव
मधुकरलाल नागर, प्रो देवेंद्र कुमार गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी हमारे देश की समृद्ध और विस्तृत व्यापक है। इसका समाज के सभी क्षेत्रों में प्रयोग हो रहा है। इस प्रकार हिंदी भाषा राष्ट्रीय एकता का एक सुदृढ़ सूत्र भी है।
हिंदी को राष्ट्रभाषा की मान्यता प्रदान किया जाना आवश्यक है। हिंदी भाषा का प्रयोग विधि के क्षेत्र में संबंधित हुआ है तब से सामान्य जन में विधियों के प्रति रुचि और समझ प्रचुर रूप से विकसित हुई है। हिंदी भाषा में विधि पुस्तकों के विस्तृत न्यायिक निर्णयों का प्रकाशन तथा हिंदी में विधि शिक्षा की नियमित व्यवस्था के फलस्वरूप विधियों एवं विधिक सिद्धांतों के संबंध में जानकारी के साथ विधियों के प्रति जागरूकता विधि व्यवसायियों में ही नहीं अपितु आम जनों में भी बनी है। - प्रो देवेंद्र कुमार गुप्ता एड.पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन मथुरा
हिंदी को राष्ट्रभाषा की मान्यता प्रदान किया जाना आवश्यक है। हिंदी भाषा का प्रयोग विधि के क्षेत्र में संबंधित हुआ है तब से सामान्य जन में विधियों के प्रति रुचि और समझ प्रचुर रूप से विकसित हुई है। हिंदी भाषा में विधि पुस्तकों के विस्तृत न्यायिक निर्णयों का प्रकाशन तथा हिंदी में विधि शिक्षा की नियमित व्यवस्था के फलस्वरूप विधियों एवं विधिक सिद्धांतों के संबंध में जानकारी के साथ विधियों के प्रति जागरूकता विधि व्यवसायियों में ही नहीं अपितु आम जनों में भी बनी है। - प्रो देवेंद्र कुमार गुप्ता एड.पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन मथुरा