फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   amar ujala foundation day Petha's business also saw many changes in 75 years

अमर उजाला स्थापना दिवस विशेष: ताजनगरी की हर गली में घुली है पेठे की मिठास, 75 वर्षों में यूं बढ़ा कारोबार 

Mon, 18 Apr 2022 02:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 18 Apr 2022 02:10 PM IST
सार

पेठे के कारोबार में 75 वर्षों में कई बदलाव आए हैं। आगरा की यही पहचान और शान मिठाइयों की वैराइटी के बीच अपनी जगह न केवल कायम किए हुए हैं, बल्कि साल दर साल बढ़ रही है। 

विज्ञापन
amar ujala foundation day Petha's business also saw many changes in 75 years
पेठा बनाता हलवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल के शहर की एक और पहचान है। वह है पेठा नगरी की। ताजमहल के दीदार के बाद सैलानियों के कदम रुकते हैं पेठे की दुकान पर, जहां पेठे की महक और मिठास जेहन से जुबां तक घुल जाती है। पूरे देश में नूरी दरवाजे की इकाइयों से पेठा पहुंच रहा है। 75 वर्षों में पेठे के कारोबार में भी कई बदलाव आए। कोयले की जगह अब गैस से पेठा बनने लगा है। 
विज्ञापन


देश का कोई भी महानगर हो या कस्बा या गांव, यहां से आगरा कोई भी आए तो मेरे लिए पेठा ले आना, यह इच्छा जाहिर कर ही देते हैं। लगभग 96 साल पहले 1926 में आगरा के पंछीनाथ गोयल ने कुम्हड़ा से पेठा बनाने का काम शुरू किया। अपने नाम पंछी से शुरू किया गया पेठा दुनिया भर में ऐसा चर्चित हो गया कि आगरा का पर्याय बन गया। देश में शायद ही कोई शख्स हो, जिसने अपने जीवन में कभी न कभी पेठा न चखा हो। देसी मिठाइयों में पेठा के साथ पंछीनाथ गोयल ने कई प्रयोग किए। शुरूआत में दसी खांड का लाल पेठा, सादा पेठा और अंगूरी पेठा बनाया जाता था, पर बाद में केसर पेठा भी बनाया जाने लगा। 
विज्ञापन

1990 के बाद पेठे में हुए प्रयोग

पहले सादा पेठा और केसर पेठा ही ज्यादा बिकता था, पर 1990 के बाद कई प्रयोग किए गए। 56 तरह की मिठाइयां पेठा से बनाई जाने लगी। इनमें चॉकलेट पेठा, पान पेठा, सैंडविच पेठा समेत 26 तरह की वैराइटी अब भी बनती है। पेठा की जन्मस्थली नूरी दरवाजा पर हर पेठा इकाई पर रंग बिरंगा और  अलग अलग स्वाद का पेठा बिकता नजर आता है। आगरा का पेठा केवल देसी और सस्ती मिठाई नहीं है, बल्कि यह यहां की सांस्कृतिक धरोहर है। पेठे के बिना आगरा की पहचान अधूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पेठे का स्वाद अब भी बरकरार

पूरे देश में सबसे सस्ती, बिना मिलावट की कोई मिठाई है तो वह पेठा है। बचपन में पेठे का जो स्वाद था, वह अब तक बरकरार है। ताज टिपेजियम जोन बनने के बाद कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, पर गैस के प्रयोग से लागत बढ़ गई। हालांकि स्वाद वही है। 
- राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष पेठा निर्माता संघ

पेठे जैसी बात किसी में नहीं

बचपन से अब तक घर पर कोई भी रिश्तेदार आया हो, पर पेठा जरूर खरीदा। शहर से बाहर किसी रिश्तेदार के गए तो उनकी एक ही डिमांड रही कि आगरा से पेठा ले आना। गर्मी में पेठे के साथ एक गिलास पानी चलते फिरते को भी पूछ लेते हैं। गर्मी में पेठे से जो सुकू न मिलता है, वह किसी भी मिठाई से नहीं मिल सकता। -सर्वेश कुमार, अशोक नगर 

500 से ज्यादा थीं पेठे की इकाईयां

ताजमहल पर प्रदूषण के कारण 1996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ताज ट्रिपेजियम जोन बनाया गया। पेठा उद्योग को शहर से बाहर कालिंदी विहार में पेठा नगरी बनाकर शिफ्ट करने का आदेश दिया गया। तब शहर में 500 से ज्यादा इकाइयां पेठे की थीं। कोयले और लकड़ी की भटिठयों की जगह ग्रीन गैस का उपयोग करने की बाध्यता के बाद पेठे कारखाने बंद होने लगे। अब 70 से ज्यादा इकाईयां पेठा बना रही हैं।

नूरी दरवाजे की जगह शहर में अब दूर दराज के हिस्सों में भी पेठे के कारखाने स्थानांतरित हो गए। हालांकि कालिंदी विहार में पेठा इकाइयां फिर भी नहीं पहुंच सकी। दरअसल, पेठा कारखाना संचालकों को मीठा पानी चाहिए था, पर कालिंदी विहार में पानी की उपलब्धता ही नहीं हो पाई। पेठा इकाई संचालक सुशील गोयल बताते हैं कि पेठे के लिए खारा पानी नहीं चाहिए। खारे पानी से पेठे का स्वाद बदल जाता है। इसलिए परंपरागत स्वाद के लिए पानी जरूरी है। 

महंगाई का दिखने लगा है असर

महज तीन साल पहले तक सादा पेठा 50 से 60 रुपये किलो में उपलब्ध था। नूरी दरवाजे पर पेठे की दुक ानों पर सादा पेठा खस की सुगंध के साथ लोगों को आकर्षित करता था, पर कोरोना संक्रमण काल के बाद कुम्हड़ा की कीमतों में आए उछाल और चीनी, गैस के दामों में हुई बढ़ोतरी के कारण सादा पेठा अब 110 से 125 रुपये किलो तक बिक रहा है। सादा पेठा के साथ ही पेठे की अन्य वैराइटी जो 120 से 200 रुपये किलो तक बिक रही थीं, अब वह 180 से 250 रुपये किलो तक बिकने लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed