{"_id":"5fa3a7834c772e49bc3e09cf","slug":"amar-ujala-community-radio-program-on-women-empowerment-in-agra","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मैं कोई शब्द नहीं हूं कि जैसे चाहे उच्चारण कर दो...’, सामुदायिक रेडियो पर हुई काव्य गोष्ठी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मैं कोई शब्द नहीं हूं कि जैसे चाहे उच्चारण कर दो...’, सामुदायिक रेडियो पर हुई काव्य गोष्ठी
Fri, 06 Nov 2020 12:24 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 06 Nov 2020 12:24 AM IST
विज्ञापन
सामुदायिक रेडियो पर हुई काव्य गोष्ठी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4-आगरा की आवाज की ओर से बुधवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्य सागर के बैनर तले हुए कार्यक्रम का विषय महिला सशक्तिकरण पर आधारित था। ‘मैं कोई शब्द नहीं हूं कि जैसे चाहे उच्चारण कर दो...’ कविता से शुरू कार्यक्रम का प्रसार रेडियो पर किया गया।
‘तुम अलभ्य अनछुए गगन से’ : ज्योत्सना शर्मा
आरबीएस डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत और कवियित्री डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने दो कविताओं को पाठ किया। ‘तुम अलभ्य अनछुए गगन से दूर खड़े मुस्काते हो, मैं चातक प्यास सरीखी, भू पर ही अकुलाती हूं’। इसके अलावा ‘मैं कोई शब्द नहीं हूं कि जैसे चाहे उच्चारण कर दो, मैं तो वो गंभीर अर्थ हूं जो है सदा से एक जैसा’ रचनाओं के माध्यम से उन्होंने नारी शक्ति का परिचय दिया।
‘...ये भारत की नारी है, हर लक्ष्य को पा लेती हैं’ : ऋतु गोयल
कवयित्री ऋतु गोयल ने ‘तू मात है तू वंदनी, गुणवान है तू नंदनी, विश्वव्यापी शक्ति है तू, तू ही जग की तारिणी’ कविता के माध्यम से नारी शक्ति पर अपनी बात कही। उन्होंने ‘अपने मन की सोचों को ये पंख बना उड़ लेती हैं, ये भारत की नारी है, हर लक्ष्य को पा लेती हैं’ कविता से यह बताया कि देश की नारी जो भी ठान लेती हैं, उसे साध्य बनाकर ही दम लेती हैं।
विज्ञापन
स्त्रियों शताब्दियों का संचित शब्द भंडार हैं : श्रुति सिन्हा
काव्य गोष्ठी का संचालन साहित्यकार श्रुति सिन्हा ने किया। उन्होंने भी अपनी कविताओं के माध्यम से नरी शक्ति के विभिन्न पहलुओं को छुआ। ‘स्त्रियों शताब्दियों का संचित शब्द भंडार हैं... और भोगवादिता की इस अंधी दौड़ में मैं मरूंगी नहीं...’ कविताओं के माध्यम से उन्होंने महिलाओं की दृढ़ता से परिचय कराया। इस मौके पर आशा किरण स्कूल की संचालिका उषा मित्तल ने बताया कि कैसे उन्होंने खुद को सशक्त कर समाज के प्रति दायित्वों का निर्वहन किया।
विज्ञापन
‘तुम अलभ्य अनछुए गगन से’ : ज्योत्सना शर्मा
आरबीएस डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत और कवियित्री डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने दो कविताओं को पाठ किया। ‘तुम अलभ्य अनछुए गगन से दूर खड़े मुस्काते हो, मैं चातक प्यास सरीखी, भू पर ही अकुलाती हूं’। इसके अलावा ‘मैं कोई शब्द नहीं हूं कि जैसे चाहे उच्चारण कर दो, मैं तो वो गंभीर अर्थ हूं जो है सदा से एक जैसा’ रचनाओं के माध्यम से उन्होंने नारी शक्ति का परिचय दिया।
विज्ञापन
‘...ये भारत की नारी है, हर लक्ष्य को पा लेती हैं’ : ऋतु गोयल
कवयित्री ऋतु गोयल ने ‘तू मात है तू वंदनी, गुणवान है तू नंदनी, विश्वव्यापी शक्ति है तू, तू ही जग की तारिणी’ कविता के माध्यम से नारी शक्ति पर अपनी बात कही। उन्होंने ‘अपने मन की सोचों को ये पंख बना उड़ लेती हैं, ये भारत की नारी है, हर लक्ष्य को पा लेती हैं’ कविता से यह बताया कि देश की नारी जो भी ठान लेती हैं, उसे साध्य बनाकर ही दम लेती हैं।
विज्ञापन
स्त्रियों शताब्दियों का संचित शब्द भंडार हैं : श्रुति सिन्हा
काव्य गोष्ठी का संचालन साहित्यकार श्रुति सिन्हा ने किया। उन्होंने भी अपनी कविताओं के माध्यम से नरी शक्ति के विभिन्न पहलुओं को छुआ। ‘स्त्रियों शताब्दियों का संचित शब्द भंडार हैं... और भोगवादिता की इस अंधी दौड़ में मैं मरूंगी नहीं...’ कविताओं के माध्यम से उन्होंने महिलाओं की दृढ़ता से परिचय कराया। इस मौके पर आशा किरण स्कूल की संचालिका उषा मित्तल ने बताया कि कैसे उन्होंने खुद को सशक्त कर समाज के प्रति दायित्वों का निर्वहन किया।