Akshaya Tritiya 2022: अक्षय तृतीया पर 89 साल बाद बन रहा विशेष योग, इस शुभ मुहूर्त में करें खरीदारी
अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी व इलेक्ट्रोनिक्स की खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 10:50 बजे से दोपहर 2:15 बजे तक का है। वहीं शाम के समय खरीदारी का समय 7:35 बजे से 9:13 बजे तक का रहेगा।
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अक्षय तृतीया इस बार मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र में शोभन योग में सूर्य व चंद्रमा के उच्च राशियों में मनाई जाएगी। मालव्य योग, महापुरुष योग शश महापुरुष योग निर्मित हो रहे हैं। ऐसा संयोग 89 साल बाद बन रहा है। यदि आपका कोई शुभ कार्य संयोग के लिए रुका है तो आप इस दिन कर सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि अक्षय तृतीया पर शुभ मुहूर्त प्रात: काल 6:41 से लेकर 10:50 तक रहेगा। इस समय जाप, हवन, यज्ञ, आराधना और आरती का शुभ फल प्राप्त होगा। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया अथवा आखा तीज कहा जाता है। अक्षय शब्द का अर्थ है जो कभी नष्ट न हो। अक्षय तृतीया को किया गया जप, तप, हवन आदि का शुभ और अनंत फल मिलता है। इसी दिन शादी विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त होता है। गृह प्रवेश, गृह निर्माण आरंभ, नई फैक्ट्री में कार्य आरंभ सहित अन्य नवीन कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। इसे चिरंजीवी तिथि, युग आदि तिथि भी कहते हैं। स्कंद पुराण में वर्णित है कि इस दिन से त्रेतायुग का आरंभ भी हुआ था।
भगवान विष्णु व महालक्ष्मी की करें पूजा
आगरा। प्राचीन सिद्धि विनायक मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री बताते हैं कि अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु एवं महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन सोने- चांदी के आभूषण खरीदने की भी परंपरा है। इससे लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है। अक्षय तृतीया को मां गौरी का पर्व भी माना जाता है। इस दिन मां गौरी की पूजा करके वैवाहिक सुख की कामना की जाती है। जिनका विवाह नहीं हो पा रहा है, उन्हें भी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और गौरी मां की पूजा करनी चाहिए।
स्नान, दान का विशेष महत्व
महंत शास्त्री ने बताया कि इस दिन नदियों में स्नान के बाद दान पुण्य का विशेष महत्व है। जल से भरा कलश, चरण पादुका, फल, छाता, गाय, सत्तू, शर्बत, सोने व चांदी की वस्तुओं का दान किया जाता है। शिव मंदिरों में जल से भरा कलश व खरबूजा व तरबूज चढ़ाए जाते हैं।
सूर्य को दें अर्घ्य
वेदों में वर्णित है यदि आपकी जन्म कुंडली में ग्रहों के अस्त होने के कारण उनसे अशुभ परिणाम मिल रहे हों तो अक्षय तृतीया के दिन प्रात: काल ताम्र पात्र में जल लेकर भगवान सूर्य को पूरब दिशा की तरफ मुंह करके जल अर्पित करना चाहिए।
भगवान परशुराम का अवतरण
स्कंद पुराण में वर्णित है कि अक्षय तृतीया को पुनर्वसु नक्षत्र में रात्रि के प्रथम पहर में भगवान विष्णु ने परशुराम जी के रूप में अवतार लिया था। उनके जन्म के दिन 6 ग्रह अपनी उच्च राशियों में थे। परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं। इनके पिता महर्षि जमदग्नि और मां का नाम रेणुका था।