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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   SP Chief Akhilesh Yadav will Fight from Karhal Assembly Seat for the First Time, Know Political Equation and Analysis in Hindi

UP Election 2022 : करहल विधानसभा सीट से क्यों चुनाव लड़ना चाहते हैं अखिलेश, यहां जानिए गणित

Fri, 21 Jan 2022 07:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 21 Jan 2022 07:06 AM IST
सार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद चुनाव लड़ने के लिए करहल सीट को चुनकर पश्चिमी और मध्य यूपी की सीटों पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। उनके लिए यह सीट सियासी समीकरण के लिहाज से काफी सुरक्षित भी है।

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SP Chief Akhilesh Yadav will Fight from Karhal Assembly Seat for the First Time, Know Political Equation and Analysis in Hindi
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने सपा के गढ़ मैनपुरी के करहल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इसकी घोषणा की। आजमगढ़ से सांसद अखिलेश ने बुधवार को कहा था कि वे अपने संसदीय क्षेत्र की जनता से पूछकर यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ने का फैसला करेंगे। 

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समाजवादियों का गढ़ है करहल
करहल विधानसभा क्षेत्र को समाजवादियों का गढ़ माना जाता है। 1957 में करहल को सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। 1974 में करहल सामान्य विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया। 1995 में करहल सीट से सपा ने पहली बार बाबूराम यादव को चुनाव लड़ाया था। वह लगातार तीन बार विधायक रहे हैं। 2002 में भाजपा के सोबरन सिंह यादव चुनाव जीते। 2007 से लेकर अब तक तीन बार सपा की टिकट पर सोबरन सिंह यादव ही चुनाव जीते हैं।
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सैफई परिवार की बेटी को भी मैनपुरी ने दी पहचान
मैनपुरी ने केवल सैफई परिवार के बेटों को ही नहीं बेटी को भी राजनीति में पहचान दिलाई। इसी मैनपुरी से वर्ष 2015 में सपा के टिकट पर सैफई परिवार की पहली बेटी ने राजनीति में कदम रखा। ये और कोई नहीं बल्कि सपा संरक्षक की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बहिन संध्या यादव थीं। सपा के टिकट पर वे जिला पंचायत सदस्य चुनकर आईं और जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। बाद में पति अनुजेश यादव ने भाजपा का दामन थामा तो वे भी कमल दल में शामिल हो गईं। 2021 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। 
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तीन सीटों पर मैनपुरी में काबिज है सपा
मैनपुरी में कुल चार विधानसभा सीटें हैं, इसमें मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। वर्तमान में भोगांव को छोड़कर तीन पर सपा काबिज हैं। वहीं भोगांव सीट बीते चुनाव में भाजपा के खाते में चली गई थी। इससे पहले ये सीट लगातार पांच बार सपा के खाते में रह चुकी है। ऐसे में ये सीटी भी वापस पाने के लिए सपा इस बार पुरजोर कोशिश करेगी।

सपा कार्यकर्ता ने खून से लिखा पत्र
मैनपुरी। भोगांव विधानसभा क्षेत्र के हविलिया मंगलपुर निवासी मोहित यादव डीपी ने बृहस्पतिवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को खून से लिखा पत्र भेजा। पत्र में कहा कि मैनपुरी की धरती पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। यदि मैनपुरी से चुनाव लड़ते हैं तो मैनपुरी की सम्मानित जनता उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी जीत दिलाएगी। मोहित ने बताया कि उसने वर्ष 2019 में आजमगढ़ जाकर अखिलेश यादव का प्रचार किया था। उसके प्रचार के तरीके की अखिलेश ने कार्यकर्ताओं के सामने सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी।

करहल विधानसभा क्षेत्र में मतदाता

  • पुरुष मतदाता 201394
  • महिला मतदाता 169851
  • अन्य मतदाता 16
  • कुल मतदाता 371261

आयु वर्गवार मतदाता
आयु वर्ग           मतदाताओं की संख
18-19 वर्ष        6187
20-29 वर्ष        85532
30-39 वर्ष        87640
40-49 वर्ष        68113
50-59 वर्ष        62080
60-69 वर्ष        36132
70-79 वर्ष        18094
80-89 वर्ष        6172
90-99 वर्ष        1282
100 वर्ष से अधिक  29

सियासी समीकरण के लिहाज से सुरक्षित है करहल

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद चुनाव लड़ने के लिए करहल सीट को चुनकर पश्चिमी और मध्य यूपी की सीटों पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। उनके लिए यह सीट सियासी समीकरण के लिहाज से काफी सुरक्षित भी है। यहां के गांवों से सैफई परिवार का गहरा नाता रहा है। 



मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट पर अभी सपा के सोबरन सिंह यादव विधायक हैं। उन्होंने 2017 के चुनाव में भाजपा के रमा शाक्य को करीब 38 हजार मतों से हराया था। यहां के करीब साढ़े तीन लाख से अधिक मतदाताओं में 40 फीसदी से ज्यादा यादव हैं। करीब आठ से 10 गांवों में मुस्लिमों की बहुलता है। शाक्य, लोधी, ब्राह्मण, ठाकुर और अनुसूचित जाति के मतदाता हैं।

करहल सीट पर 1957 से अब तक यहां सिर्फ  एक बार 2002 में भाजपा जीती है। 1980 में यह सीट एक बार कांग्रेस के खाते में भी गई है। 1957 के पहले चुनाव में यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी जीती थी। उस समय यहां दो सीटें हुआ करती थीं। वर्ष 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी के बाबूराम यादव जीते। इसके बाद 1989 और 1991 में समाजवादी जनता पार्टी और 1993 एवं 1996 में सपा के टिकट पर बाबूराम यादव विधायक चुने गए।

यहां वर्ष 2000 में हुए हुए उपचुनाव में सपा के अनिल यादव विधायक रहे। लेकिन 2002 में यहां से भाजपा के टिकट पर सोबरन सिंह यादव जीते थे। फिर वे सपा में आ गए और 2007, 2012 और 2017 में विधायक बने। वर्ष 2017 के चुनाव में इस सीट पर सपा उम्मीदवार को 1,04,221 वोट मिले, जबकि भाजपा के रमा शाक्य 65,816 वोट ही हासिल कर पाए थे।

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