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रासायनिक खादों के प्रयोग से उर्वरा शक्ति हो रही कम
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26एमएनपी-26-घिरोर में आयोजित कृषक गोष्ठी को संबोधित करते कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक।
- फोटो : MAINPURI
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घिरोर। किसान यूरिया या डीएपी जैसी रासायनिक खाद का प्रयोग अधिक मात्रा में कर रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। कीटनाशक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी में पाए जाने वाले केंचुआ नष्ट हो गए है। यह बातें बुधवार को उप निदेशक कृषि दुर्गविजय सिंह कृषि गोष्ठी में कहीं।
बुधवार को विकास खंड कार्यालय पर जैविक कृषि गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में उप निदेशक ने कहा कि अब किसान आधुनिक केंचुआ मिट्टी में पैदाकर केंचुआ खाद का उत्पादन कर रहे हैं। यदि किसान केंचुआ अथवा कंपोस्ट खाद का प्रयोग करें तो मिट्टी अधिक उपजाऊ होगी। जिला कृषि अधिकारी गगनदीप सिंह ने कहा जैविक खाद के प्रयोग से खेती की उपजाऊ शक्ति में विकास होता है।
लागत भी कम आती है।
घिरोर क्षेत्र लहसुन के उत्पादन के लिए पूरे एशिया में प्रसिद्ध है। जानकारी के अभाव में किसान अधिक गुणवत्ता वाला लहसुन नहीं उगा पा रहे हैं। यदि वैज्ञनिक विधि से लहसुन उगाया जाए तो अधिक लाभ कमाया जा सकता है। अरविंद यादव ने कहा सरकार की मंशा के अनुरूप सभी किसानों को केसीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि सुजान सिंह यादव, सीबी यादव, धर्मेंद्र यादव, राकेश यादव, डॉक्टर जगदीश मिश्रा कृषि वैज्ञानिक, डॉक्टर नागेंद्र कुमार वर्मा कृषि वैज्ञानिक, अवधबिहारी यादव एडीओ कृषि विभाग, डॉ. शौकत अली, किशनवीर सिंह, विवेक पाल, विजय सिंह मौजूद रहे।
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बुधवार को विकास खंड कार्यालय पर जैविक कृषि गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में उप निदेशक ने कहा कि अब किसान आधुनिक केंचुआ मिट्टी में पैदाकर केंचुआ खाद का उत्पादन कर रहे हैं। यदि किसान केंचुआ अथवा कंपोस्ट खाद का प्रयोग करें तो मिट्टी अधिक उपजाऊ होगी। जिला कृषि अधिकारी गगनदीप सिंह ने कहा जैविक खाद के प्रयोग से खेती की उपजाऊ शक्ति में विकास होता है।
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लागत भी कम आती है।
घिरोर क्षेत्र लहसुन के उत्पादन के लिए पूरे एशिया में प्रसिद्ध है। जानकारी के अभाव में किसान अधिक गुणवत्ता वाला लहसुन नहीं उगा पा रहे हैं। यदि वैज्ञनिक विधि से लहसुन उगाया जाए तो अधिक लाभ कमाया जा सकता है। अरविंद यादव ने कहा सरकार की मंशा के अनुरूप सभी किसानों को केसीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि सुजान सिंह यादव, सीबी यादव, धर्मेंद्र यादव, राकेश यादव, डॉक्टर जगदीश मिश्रा कृषि वैज्ञानिक, डॉक्टर नागेंद्र कुमार वर्मा कृषि वैज्ञानिक, अवधबिहारी यादव एडीओ कृषि विभाग, डॉ. शौकत अली, किशनवीर सिंह, विवेक पाल, विजय सिंह मौजूद रहे।