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गन्ना बुवाई का लक्ष्य तय, जागरूकता को बनाई टीमें
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कासगंज की न्यौली चीनी मिल
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। गन्ने की बुवाई का लक्ष्य तय कर दिया है। जागरूकता के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। यह टीमें पंजीकृत किसानों के अलावा नए किसानों को भी गन्ने की पैदावार के लिए जागरूक करेंगी।
जिले में अब तक गन्ने की पैदावार का अलग अलग लक्ष्य तय होता रहा है। पिछले साल की सापेक्ष इस साल गन्ने का क्षेत्रफल कम हो गया है। इस बीच गन्ना विभाग और चीनी मिल दोनों ही चिंतित हैं। गन्ना विभाग ने कम लागत में अधिक पैदावार की योजना तैयार की है। इसी उद्देश्य से गन्ने की बुवाई को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है। जिले में गन्ने की पैदावार करने वाले किसानों की संख्या अधिक हैै। न्यौली चीनी मिल और गन्ना विभाग ने टीम बनाई हैं जो गांव-गांव पहुंच रही हैं।
गन्ना विभाग ने किसानों को अलग अलग प्रजाति के गन्ना पैदा करने की सलाह दी है। इसके साथ ही शरदकालीन गन्ने से होने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी दी है। गन्ना विशेषज्ञों के मुताबिक यदि गन्ना की बुवाई किसान करते हैं तो वह सहफसली खेती का भी लाभ ले सकते हैं। जिसमें दलहन और तिलहन की फसलें पैदा की जा सकती हैं।
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ट्रैंक विधि पर अमल तेज
कासगंज। जिले में गन्ने की पैदावार किसान अपनी पुरानी विधि से करते आए हैं, लेकिन अब गन्ना विभाग ने नई ट्रैंक विधि से किसानों को जागरूक कर पैदावार बढ़ाने की योजना बनाई है। गन्ना विभाग ट्रैंक विधि पर अधिक अमल कर रहा है। इस विधि के मुताबिक किसान पांच फीट दूरी पर यदि गन्ना बोते हैं तो पैदावार अधिक होगी और सहफसली खेती में भी आसानी रहेगी।
आंकड़े की नजर से
- 8000 हेक्टेयर तय किया गया गन्ने की बुवाई का लक्ष्य।
- 700 से अधिक किसानों को किया जागरूक, लिए दस्तावेज।
- जिले में शरदकालीन गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। प्रयास है कि तय किया गया लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।
- ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।
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जिले में अब तक गन्ने की पैदावार का अलग अलग लक्ष्य तय होता रहा है। पिछले साल की सापेक्ष इस साल गन्ने का क्षेत्रफल कम हो गया है। इस बीच गन्ना विभाग और चीनी मिल दोनों ही चिंतित हैं। गन्ना विभाग ने कम लागत में अधिक पैदावार की योजना तैयार की है। इसी उद्देश्य से गन्ने की बुवाई को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है। जिले में गन्ने की पैदावार करने वाले किसानों की संख्या अधिक हैै। न्यौली चीनी मिल और गन्ना विभाग ने टीम बनाई हैं जो गांव-गांव पहुंच रही हैं।
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गन्ना विभाग ने किसानों को अलग अलग प्रजाति के गन्ना पैदा करने की सलाह दी है। इसके साथ ही शरदकालीन गन्ने से होने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी दी है। गन्ना विशेषज्ञों के मुताबिक यदि गन्ना की बुवाई किसान करते हैं तो वह सहफसली खेती का भी लाभ ले सकते हैं। जिसमें दलहन और तिलहन की फसलें पैदा की जा सकती हैं।
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ट्रैंक विधि पर अमल तेज
कासगंज। जिले में गन्ने की पैदावार किसान अपनी पुरानी विधि से करते आए हैं, लेकिन अब गन्ना विभाग ने नई ट्रैंक विधि से किसानों को जागरूक कर पैदावार बढ़ाने की योजना बनाई है। गन्ना विभाग ट्रैंक विधि पर अधिक अमल कर रहा है। इस विधि के मुताबिक किसान पांच फीट दूरी पर यदि गन्ना बोते हैं तो पैदावार अधिक होगी और सहफसली खेती में भी आसानी रहेगी।
आंकड़े की नजर से
- 8000 हेक्टेयर तय किया गया गन्ने की बुवाई का लक्ष्य।
- 700 से अधिक किसानों को किया जागरूक, लिए दस्तावेज।
- जिले में शरदकालीन गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। प्रयास है कि तय किया गया लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।
- ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।