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18 बार गर्भपात के बाद गूंजी रजनी की गोद में किलकारी, जच्चा-बच्चा अभी भी आईसीयू में
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 02 Jun 2017 04:59 PM IST
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डाक्टर भगवान का दूसरा रूप हैं, यह बात आगरा के बरहन में गांव हाथीगढ़ी निवासी रजनी के लिए सच साबित हुई। 18 बार अपनी कोख से बच्चे को खोने वाली इस महिला ने सर्जरी के बाद 19वीं बार में बच्चे को जन्म दिया है। डाक्टर कहते हैं कि मेडिकल साइंस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। ऐसे में इसे गिनीज बुक में दर्ज कराने की भी बात कही जा रही है।
गुरुवार को आगरा के निजी अस्पताल में प्रेसवार्ता के दौरान आईवीएफ स्पेशलिस्ट डा. वैशाली टंडन ने बताया कि आगरा के बरहन में गांव हाथीगढ़ी निवासी प्रेमकुमार की पत्नी रजनी के गर्भाशय का मुख अत्यंत कमजोर था। इस कारण उनका गर्भ ठहरने में समस्या आ रही थी।
सामान्यतः 4-6 महीने से अधिक उनका गर्भ नहीं टिक पाता था। यही कारण रहा कि रजनी को 18 बार गर्भपात हुआ। ऐसे में प्रेमकुमार ने कई अस्पतालों में दिखाया पर रजनी के बच्चे का जन्म नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने निजी नर्सिंग होम में इलाज के लिए पत्नी को भर्ती कराया।
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डा. वैशाली टंडन के अनुसार इस केस में काफी रिसर्च के बाद चिकित्सक इस नतीजे पर पहुंचे कि गर्भाशय की सर्जरी की जाए। ऐसे में रजनी को करीब साढ़े तीन माह का गर्भ ठहरने के बाद उनकी सर्जरी की गई। डाक्टरों का यह प्रयास सफल रहा और रजनी ने बच्चे को जन्म दिया।
अस्पताल के लेप्रास्कोपिक सर्जन डा. अमित टंडन ने बताया कि दुनिया में ऐसा यह पहला मामला है, जो 18 बार गर्भपात के बाद कोई महिला मां बनी है। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल करने के लिए दावा किया जाएगा।
रजनी के पति प्रेम कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी ने एक बच्ची को भी जन्म दिया था लेकिन वह अधिक दिन जीवित नहीं रह सकी। वे करीब सात महीने पहले रजनी को अस्पताल लाए थे। तब से वह अस्पताल में ही भर्ती है। डिलिवरी के बाद भी उनकी पत्नी और बच्चा डाक्टरों की देखरेख में ही आईसीयू में हैं।
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गुरुवार को आगरा के निजी अस्पताल में प्रेसवार्ता के दौरान आईवीएफ स्पेशलिस्ट डा. वैशाली टंडन ने बताया कि आगरा के बरहन में गांव हाथीगढ़ी निवासी प्रेमकुमार की पत्नी रजनी के गर्भाशय का मुख अत्यंत कमजोर था। इस कारण उनका गर्भ ठहरने में समस्या आ रही थी।
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सामान्यतः 4-6 महीने से अधिक उनका गर्भ नहीं टिक पाता था। यही कारण रहा कि रजनी को 18 बार गर्भपात हुआ। ऐसे में प्रेमकुमार ने कई अस्पतालों में दिखाया पर रजनी के बच्चे का जन्म नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने निजी नर्सिंग होम में इलाज के लिए पत्नी को भर्ती कराया।
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डा. वैशाली टंडन के अनुसार इस केस में काफी रिसर्च के बाद चिकित्सक इस नतीजे पर पहुंचे कि गर्भाशय की सर्जरी की जाए। ऐसे में रजनी को करीब साढ़े तीन माह का गर्भ ठहरने के बाद उनकी सर्जरी की गई। डाक्टरों का यह प्रयास सफल रहा और रजनी ने बच्चे को जन्म दिया।
अस्पताल के लेप्रास्कोपिक सर्जन डा. अमित टंडन ने बताया कि दुनिया में ऐसा यह पहला मामला है, जो 18 बार गर्भपात के बाद कोई महिला मां बनी है। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल करने के लिए दावा किया जाएगा।
रजनी के पति प्रेम कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी ने एक बच्ची को भी जन्म दिया था लेकिन वह अधिक दिन जीवित नहीं रह सकी। वे करीब सात महीने पहले रजनी को अस्पताल लाए थे। तब से वह अस्पताल में ही भर्ती है। डिलिवरी के बाद भी उनकी पत्नी और बच्चा डाक्टरों की देखरेख में ही आईसीयू में हैं।