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विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार: बीए, बीएससी, बीकॉम समेत 18 मार्कशीटें फर्जी मिलीं, जांच में हुआ खुलासा
Mon, 14 Nov 2022 11:27 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 14 Nov 2022 11:27 AM IST
सार
मार्कशीटें देखकर ही प्रभारी ने इनके फर्जी होने की आशंका जताई थी। मार्कशीट का प्रारूप विश्वविद्यालय के असली मार्कशीट से मिलता-जुलता जरूर था, लेकिन रोल नंबर दो अंकों में थे।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट का खेल पकड़ा गया है। यहां सत्यापन के लिए आईं 18 मार्कशीटें जांच में जाली निकलीं हैं। ये बीए, बीएससी, बीकॉम, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्स की हैं।
विश्वविद्यालय में बीए, बीएससी, बीकॉम, मैनेजमेंट समेत अन्य पाठ्यक्रम की 18 मार्कशीटें सत्यापन के लिए आईं। मार्कशीट में दर्ज छात्रों के बारे में परीक्षा व गोपनीय विभाग में कोई भी शैक्षणिक रिकॉर्ड नहीं मिला। मार्कशीट में कॉलेज के तौर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का दाऊदयाल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन दर्ज है। इस पर संकाय निदेशक से भी इनका रिकॉर्ड मांगा। संस्थान निदेशक की जांच में भी इन छात्रों का वोकेशनल कोर्स में न तो प्रवेश हुआ और न ही फीस का रिकॉर्ड मिला। यहां तक कि इन्होंने कोई परीक्षा भी नहीं दी। इस तरह से विश्वविद्यालय के परीक्षा, गोपनीय और संकाय की जांच में ये छात्र नहीं पाए गए। इस पर सत्यापन विभाग ने इनके मार्कशीट जाली होने की रिपोर्ट तैयार की है। इसे राजभवन और शासन को भी भेजा जा रहा है।
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बीएससी वोकेशनल सत्र 2010
रोल नंबर: 85
नामांकन संख्या: 07127746
बीकॉम वोकेशनल सत्र 2011
रोल नंबर: 33
बीएससी वोकेशनल सत्र 2010
रोल नंबर: 78
नामांकन संख्या: 07127834
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विश्वविद्यालय में बीए, बीएससी, बीकॉम, मैनेजमेंट समेत अन्य पाठ्यक्रम की 18 मार्कशीटें सत्यापन के लिए आईं। मार्कशीट में दर्ज छात्रों के बारे में परीक्षा व गोपनीय विभाग में कोई भी शैक्षणिक रिकॉर्ड नहीं मिला। मार्कशीट में कॉलेज के तौर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का दाऊदयाल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन दर्ज है। इस पर संकाय निदेशक से भी इनका रिकॉर्ड मांगा। संस्थान निदेशक की जांच में भी इन छात्रों का वोकेशनल कोर्स में न तो प्रवेश हुआ और न ही फीस का रिकॉर्ड मिला। यहां तक कि इन्होंने कोई परीक्षा भी नहीं दी। इस तरह से विश्वविद्यालय के परीक्षा, गोपनीय और संकाय की जांच में ये छात्र नहीं पाए गए। इस पर सत्यापन विभाग ने इनके मार्कशीट जाली होने की रिपोर्ट तैयार की है। इसे राजभवन और शासन को भी भेजा जा रहा है।
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रोल नंबर देख फर्जी होने का संदेह
मार्कशीटें देखकर ही प्रभारी ने इनके फर्जी होने की आशंका जताई थी। मार्कशीट का प्रारूप विश्वविद्यालय के असली मार्कशीट से मिलता-जुलता जरूर था, लेकिन रोल नंबर दो अंकों में थे। विश्वविद्यालय के रोल नंबर चार अंकों में होते हैं। ये मार्कशीटें अंतिम वर्ष की हैं और कई मार्कशीट में नामांकन संख्या भी नहीं है।
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जांच में फर्जी मिल रहीं मार्कशीटें
-कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि सत्यापन में जांच के लिए कई मार्कशीटें फर्जी मिली हैं। इसमें बीए, बीएससी, बीकॉम और मैनेजमेंट समेत अन्य विषय की हैं। ये सभी मार्कशीटें 2010 से 2015 सत्र की हैं। इनकी रिपोर्ट बनाई है।मार्कशीट में ये है दर्ज:
केस स्टडी-1 :
सोनवीर पुत्र सुगड़ सिंहबीएससी वोकेशनल सत्र 2010
रोल नंबर: 85
नामांकन संख्या: 07127746
केस स्टडी 2:
मनोज कुमार पुत्र नत्थू सिंहबीकॉम वोकेशनल सत्र 2011
रोल नंबर: 33
केस स्टडी 3:
अनिल कुमार पुत्र राजवीर सिंहबीएससी वोकेशनल सत्र 2010
रोल नंबर: 78
नामांकन संख्या: 07127834