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मुगल काल की इस शाही मस्जिद में बिना लाउडस्पीकर के होती है अजान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 23 Jan 2018 01:48 PM IST
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शाही मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए न्यायालय के आदेश के बाद कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन आगरा की एक मस्जिद में सैकड़ों साल से बिना लाउडस्पीकर के ही पांच वक्त की अजान होती है।
मस्जिद के इमाम बरसों से यहां बगैर किसी ध्वनि विस्तारक यंत्र के इबादत कराते हैं। साल में केवल तीन मौकों पर ही यहां लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है।
ताजमहल के परिसर में मुगल बादशाह शाहजहां ने शाही मस्जिद का निर्माण कराया था। यहां मुगल काल से ही पांच वक्त की अजान और नमाज होती है, लेकिन ध्वनि विस्तारक यंत्र का इस्तेमाल नहीं होता।
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मस्जिद के इमाम बरसों से यहां बगैर किसी ध्वनि विस्तारक यंत्र के इबादत कराते हैं। साल में केवल तीन मौकों पर ही यहां लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है।
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ताजमहल के परिसर में मुगल बादशाह शाहजहां ने शाही मस्जिद का निर्माण कराया था। यहां मुगल काल से ही पांच वक्त की अजान और नमाज होती है, लेकिन ध्वनि विस्तारक यंत्र का इस्तेमाल नहीं होता।
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आठ पीढ़ियों से कटरा फुलेल का एक परिवार मस्जिद की इमामत संभाल रहा है। इस वक्त शाही मस्जिद के इमाम सैयद सादिक अली हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें याद नहीं है कि कभी इस मस्जिद में स्थायी रूप से लाउडस्पीकर लगा हो।
वह ताजमहल में काम करने वाले पुरातत्व और उद्यान शाखा के मुस्लिम कर्मचारियों के साथ ही आसपास में रहने वाले मुसलमानों को रोजाना ही नमाज अदा कराते हैं।
शुक्रवार को नमाज पढ़ने वालों की तादाद ज्यादा होती है, क्योंकि इस दिन शहर के अन्य इलाकों से भी नमाज अदा करने लोग यहां पहुंचते हैं।
वह ताजमहल में काम करने वाले पुरातत्व और उद्यान शाखा के मुस्लिम कर्मचारियों के साथ ही आसपास में रहने वाले मुसलमानों को रोजाना ही नमाज अदा कराते हैं।
शुक्रवार को नमाज पढ़ने वालों की तादाद ज्यादा होती है, क्योंकि इस दिन शहर के अन्य इलाकों से भी नमाज अदा करने लोग यहां पहुंचते हैं।
इन मौकों पर बजता है लाउडस्पीकर
मस्जिद की इंतजामियां कमेटी के सदस्य सैयद मुनव्वर अली बताते हैं कि ताज की शाही मस्जिद में ईद-उल-जुहा, ईद-उल-अजहा और जुमेतुल अलविदा के दिन जरूर यहां लाउडस्पीकर लगाया जाता है।
मुगल बादशाह शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स के दौरान माह-ए-रजब (इस्लामिक कैलेंडर) की 25 से 27 तारीख तक लाउडस्पीकर, 36 इंच का ढोल समेत अन्य सामान आता है।
शहनाई वादन भी होता है। वर्तमान निर्देशों के बाद शाही मस्जिद के लिए भी इन विशेष दिनों की अनुमति के लिए प्रशासन को पत्र दिया गया है।
मुगल बादशाह शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स के दौरान माह-ए-रजब (इस्लामिक कैलेंडर) की 25 से 27 तारीख तक लाउडस्पीकर, 36 इंच का ढोल समेत अन्य सामान आता है।
शहनाई वादन भी होता है। वर्तमान निर्देशों के बाद शाही मस्जिद के लिए भी इन विशेष दिनों की अनुमति के लिए प्रशासन को पत्र दिया गया है।