{"_id":"6a474f3357b84f15030d8a89","slug":"agra-residents-struggle-for-birth-and-death-certificates-as-over-1-000-applications-remain-pending-2026-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दौड़: मुट्ठी नहीं की गर्म तो घिस रहे चप्पल, कुछ ऐसा है सदर तहसील का हाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दौड़: मुट्ठी नहीं की गर्म तो घिस रहे चप्पल, कुछ ऐसा है सदर तहसील का हाल
Fri, 03 Jul 2026 11:27 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 03 Jul 2026 11:27 AM IST
सार
आगरा की सदर तहसील में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं, जबकि 1,000 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं। नई सत्यापन प्रक्रिया और स्टाफ की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही अवैध वसूली के आरोप भी सामने आए हैं।
विज्ञापन
आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जन्म और मृत्यु प्रमाण में लेटलतीफी और भ्रष्टाचार से लोग किस कदर परेशान हैं, इसकी बानगी सदर तहसील में देखिए। जहां अपनों के खोने के गम में जिनके आंसू नहीं सूखे, वो मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 11 महीने से दफ्तरों की खाक छान रहे हैं। तपती और उमस से बेहाल गर्मी में नवजात बच्चों को लेकर माता-पिता जन्म प्रमाण पत्र के लिए चप्पलें घिस रहे हैं।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हालात यह हैं कि बिना मुट्ठी गर्म किए फाइलों के पहिए नहीं घूम रहे। जो लोग ऐसा नहीं कर सकते, उनके लिए अपना एक सरकारी कागज का टुकड़ा हासिल करना लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है। तहसील से नगर निगम तक की चौखट पर धक्के खाते-खाते लोगों की चप्पलें घिस गई हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।
बृहस्पतिवार को एसडीएम सदर तहसील स्थित न्यायालय कक्ष में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों का भारी हुजूम उमड़ा। भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे, जो फाइलों के ढेरों के बीच अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। आवास विकास निवासी मनोज दो महीने से अपने बच्चे का स्कूल में एडमिशन के लिए जन्म प्रमाण पत्र को भटक रहा था, तो पुलकित अपनी दादी के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए करीब एक साल से चक्कर काट रहा था। लेटलतीफी से आजिज आ चुके लोगों ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि जल्द काम कराने के एवज में अवैध वसूली की जा रही है।
विज्ञापन
इसलिए हो रही फजीहत
जनता की इस पीड़ा और फजीहत का मुख्य कारण हाल ही में प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में किया गया बदलाव है। पहले जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सीधे नगर निगम से बन जाते थे लेकिन, पिछले कई वर्षों में बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने का खुलासा होने के बाद इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पुरानी व्यवस्था को बदल दिया गया।
हजार से अधिक आवेदन लंबित
नई व्यवस्था ने प्रमाण पत्र हासिल करने की प्रक्रिया को बेहद जटिल और धीमा कर दिया है। नई प्रक्रिया के तहत अब नगर निगम से फाइल तैयार होने के बाद सीधे सदर तहसील भेजी जाती है। यहां फाइल पर एसडीएम की संस्तुति अनिवार्य है। मृत्यु प्रमाण पत्र के मामलों में क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा जमीनी जांच की जाती है। इन सभी जटिलताओं से गुजरने के बाद ही अंतिम रूप से प्रमाण पत्र जारी होता है। इस सुस्ती का नतीजा यह है कि वर्तमान में सदर तहसील में 1,000 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं और लोग धक्के खाने को मजबूर हैं।
शहरी क्षेत्र के लिए मांगा मजिस्ट्रेट
एसडीएम सदर तहसील सचिन राजपूत ने बताया कि शहरी क्षेत्र के प्रमाण पत्रों के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की मांग जिलाधिकारी से की गई है। बहुत अधिक संख्या में आवेदन और क्षेत्र बड़ा होने से जांच आदि कार्य में समय लगता है।
विज्ञापन
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हालात यह हैं कि बिना मुट्ठी गर्म किए फाइलों के पहिए नहीं घूम रहे। जो लोग ऐसा नहीं कर सकते, उनके लिए अपना एक सरकारी कागज का टुकड़ा हासिल करना लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है। तहसील से नगर निगम तक की चौखट पर धक्के खाते-खाते लोगों की चप्पलें घिस गई हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को एसडीएम सदर तहसील स्थित न्यायालय कक्ष में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों का भारी हुजूम उमड़ा। भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे, जो फाइलों के ढेरों के बीच अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। आवास विकास निवासी मनोज दो महीने से अपने बच्चे का स्कूल में एडमिशन के लिए जन्म प्रमाण पत्र को भटक रहा था, तो पुलकित अपनी दादी के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए करीब एक साल से चक्कर काट रहा था। लेटलतीफी से आजिज आ चुके लोगों ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि जल्द काम कराने के एवज में अवैध वसूली की जा रही है।
विज्ञापन
इसलिए हो रही फजीहत
जनता की इस पीड़ा और फजीहत का मुख्य कारण हाल ही में प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में किया गया बदलाव है। पहले जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सीधे नगर निगम से बन जाते थे लेकिन, पिछले कई वर्षों में बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने का खुलासा होने के बाद इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पुरानी व्यवस्था को बदल दिया गया।
हजार से अधिक आवेदन लंबित
नई व्यवस्था ने प्रमाण पत्र हासिल करने की प्रक्रिया को बेहद जटिल और धीमा कर दिया है। नई प्रक्रिया के तहत अब नगर निगम से फाइल तैयार होने के बाद सीधे सदर तहसील भेजी जाती है। यहां फाइल पर एसडीएम की संस्तुति अनिवार्य है। मृत्यु प्रमाण पत्र के मामलों में क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा जमीनी जांच की जाती है। इन सभी जटिलताओं से गुजरने के बाद ही अंतिम रूप से प्रमाण पत्र जारी होता है। इस सुस्ती का नतीजा यह है कि वर्तमान में सदर तहसील में 1,000 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं और लोग धक्के खाने को मजबूर हैं।
शहरी क्षेत्र के लिए मांगा मजिस्ट्रेट
एसडीएम सदर तहसील सचिन राजपूत ने बताया कि शहरी क्षेत्र के प्रमाण पत्रों के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की मांग जिलाधिकारी से की गई है। बहुत अधिक संख्या में आवेदन और क्षेत्र बड़ा होने से जांच आदि कार्य में समय लगता है।