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Agra News: यमुना एक्सप्रेसवे पर 153 किमी की रफ्तार से दौड़ी थार, कटा चालान
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अमर उजाला खास खबर :
- एक महीने में 10 हजार से अधिक कार और 800 भारी वाहनों पर स्पीड रडार से की गई कार्रवाई
आशीष शर्मा
आगरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है। वाहन 80, 100, 120 नहीं, बल्कि 153 तक की गति से दाैड़ रहे हैं। यातायात पुलिस ने 1 से 30 अप्रैल तक 12 क्रिटिकल थाना क्षेत्रों में स्पीड रडार से चालान किए। इनमें आधे से ज्यादा चालान यमुना एक्सप्रेसवे पर काटे गए। इनमें सर्वाधिक गति 153 किमी से दाैड़ती थार की रही। इससे न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान को भी जोखिम में डाला गया। एक महीने में कुल 10,894 वाहनों पर कार्रवाई हुई।
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि हादसों को रोकने के लिए जहां रोड इंजीनियरिंग में बदलाव किया गया है, वहीं वाहनों की गति पर ब्रेक लगाने के लिए चालान की कार्रवाई की जा रही है। यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ एक्सप्रेसवे, आगरा-फिरोजाबाद, आगरा-दिल्ली हाईवे, ग्वालियर हाईवे, फतेहाबाद मार्ग, जयपुर हाईवे, आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर स्पीड रडार से चेकिंग का अभियान अप्रैल में शुरू किया गया है। सबसे अधिक कार्रवाई यमुना एक्सप्रेसवे पर की गई।
स्पीड रडार से 5 अप्रैल को थार गाड़ी का चालान किया गया। यह 153 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी। इसी तरह 9 अप्रैल को दो और गाड़ियों के चालान किए गए। इन दोनों की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा थी। तीनों के 2-2 हजार रुपये के चालान किए गए। एक्सप्रेसवे पर कार के लिए 100 और ट्रक-बस के लिए 60 किमी प्रति घंटा की गति निर्धारित है।
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- नवंबर, फरवरी और मार्च में ज्यादा हादसे
कमिश्नरेट को शून्य मृत्यु दर वाला जिला बनाने के लिए लगातार कवायद की जा रही है। सड़क सुरक्षा मंत्रालय में आगरा में 212 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन चिह्नित की थी। इनमें से 4 लोकेशन राजस्थान की थी। इस कारण कमिश्नरेट में 208 लोकेशन पर सबसे अधिक हादसे सामने आए। इन पर संरक्षा के इंतजाम के लिए पुलिस ने सर्वे किया। सामने आया कि नवंबर, फरवरी और मार्च के महीने में सबसे अधिक हादसे हुए। कोहरे में तेज गति से वाहन चलाने और रास्ता नजर नहीं आता है। फरवरी और मार्च में शादियां होती हैं। जल्दबाजी में लोग वाहन में जाते हैं। कई बार लोगों की संख्या वाहन की क्षमता से अधिक होती है। मार्गों पर वाहनों के दबाव और रफ्तार से हादसे होते हैं।
- क्रिटिकल थाना क्षेत्रों के हादसों में 28.5% की कमी
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि कमिश्नरेट में 12 क्रिटिकल थाने हैं। इनमें नगर जोन के सिकंदरा, एत्माद्दाैला और हरीपर्वत आते हैं। वहीं पूर्वी जोन के इरादत नगर और फतेहाबाद, जबकि पश्चिमी जोन के एत्मादपुर, खंदाैली, सैंया, मलपुरा, अछनेरा और किरावली भी आते हैं। नवंबर 2025 से देखा जाए तो हादसों में 28.5% की कमी आई है। इसी तरह घायलों की संख्या में 42.4% और मृतकों की संख्या में 24.4% की कमी दर्ज की गई। डीसीपी ने बताया कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर गति के पालन के लिए अलग से टीम लगाई हैं। स्पीड रडार से चालान के साथ ही टोल पर लोगों को जानकारी भी दी जाती है।
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- एक महीने में 10 हजार से अधिक कार और 800 भारी वाहनों पर स्पीड रडार से की गई कार्रवाई
आशीष शर्मा
आगरा। यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है। वाहन 80, 100, 120 नहीं, बल्कि 153 तक की गति से दाैड़ रहे हैं। यातायात पुलिस ने 1 से 30 अप्रैल तक 12 क्रिटिकल थाना क्षेत्रों में स्पीड रडार से चालान किए। इनमें आधे से ज्यादा चालान यमुना एक्सप्रेसवे पर काटे गए। इनमें सर्वाधिक गति 153 किमी से दाैड़ती थार की रही। इससे न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान को भी जोखिम में डाला गया। एक महीने में कुल 10,894 वाहनों पर कार्रवाई हुई।
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि हादसों को रोकने के लिए जहां रोड इंजीनियरिंग में बदलाव किया गया है, वहीं वाहनों की गति पर ब्रेक लगाने के लिए चालान की कार्रवाई की जा रही है। यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ एक्सप्रेसवे, आगरा-फिरोजाबाद, आगरा-दिल्ली हाईवे, ग्वालियर हाईवे, फतेहाबाद मार्ग, जयपुर हाईवे, आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर स्पीड रडार से चेकिंग का अभियान अप्रैल में शुरू किया गया है। सबसे अधिक कार्रवाई यमुना एक्सप्रेसवे पर की गई।
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स्पीड रडार से 5 अप्रैल को थार गाड़ी का चालान किया गया। यह 153 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी। इसी तरह 9 अप्रैल को दो और गाड़ियों के चालान किए गए। इन दोनों की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा थी। तीनों के 2-2 हजार रुपये के चालान किए गए। एक्सप्रेसवे पर कार के लिए 100 और ट्रक-बस के लिए 60 किमी प्रति घंटा की गति निर्धारित है।
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- नवंबर, फरवरी और मार्च में ज्यादा हादसे
कमिश्नरेट को शून्य मृत्यु दर वाला जिला बनाने के लिए लगातार कवायद की जा रही है। सड़क सुरक्षा मंत्रालय में आगरा में 212 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन चिह्नित की थी। इनमें से 4 लोकेशन राजस्थान की थी। इस कारण कमिश्नरेट में 208 लोकेशन पर सबसे अधिक हादसे सामने आए। इन पर संरक्षा के इंतजाम के लिए पुलिस ने सर्वे किया। सामने आया कि नवंबर, फरवरी और मार्च के महीने में सबसे अधिक हादसे हुए। कोहरे में तेज गति से वाहन चलाने और रास्ता नजर नहीं आता है। फरवरी और मार्च में शादियां होती हैं। जल्दबाजी में लोग वाहन में जाते हैं। कई बार लोगों की संख्या वाहन की क्षमता से अधिक होती है। मार्गों पर वाहनों के दबाव और रफ्तार से हादसे होते हैं।
- क्रिटिकल थाना क्षेत्रों के हादसों में 28.5% की कमी
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि कमिश्नरेट में 12 क्रिटिकल थाने हैं। इनमें नगर जोन के सिकंदरा, एत्माद्दाैला और हरीपर्वत आते हैं। वहीं पूर्वी जोन के इरादत नगर और फतेहाबाद, जबकि पश्चिमी जोन के एत्मादपुर, खंदाैली, सैंया, मलपुरा, अछनेरा और किरावली भी आते हैं। नवंबर 2025 से देखा जाए तो हादसों में 28.5% की कमी आई है। इसी तरह घायलों की संख्या में 42.4% और मृतकों की संख्या में 24.4% की कमी दर्ज की गई। डीसीपी ने बताया कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर गति के पालन के लिए अलग से टीम लगाई हैं। स्पीड रडार से चालान के साथ ही टोल पर लोगों को जानकारी भी दी जाती है।