Agra: लाखों के जेवरात लेकर लापता हुए छात्र का शव दिल्ली में मिला, इंटरनेट पर फोटो देख हुई पहचान
सिकंदरा से 22 अगस्त को लापता हुए छात्र का शव अगले ही दिन 23 अगस्त को दिल्ली में रेलवे लाइन पर मिला था। पहचान न होने पर पुलिस ने उसका लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया। इधर, परिजन दो महीने से उसको तलाशते रहे।
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आगरा के सिकंदरा क्षेत्र की रंगोली कॉलोनी से 22 अगस्त को लापता हुए बीए के छात्र जितेंद्र शर्मा (20) का शव 15 घंटे बाद ही नई दिल्ली के अजमेरी गेट स्टेशन पर रेलवे लाइन पर मिल गया था। वह 250 ग्राम सोने के जेवरात और दो लाख रुपये लेकर घर से निकला था। परिजन ने बेटे के लापता होने की गुमशुदगी दर्ज करा रखी थी।
आरोप है कि पुलिस उसकी तलाश नहीं कर सकी। शुक्रवार शाम को दिल्ली पुलिस के एप जोनल इंटेग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (जिपनेट) पर अज्ञात शव के रूप में फोटो देखकर परिजन को उसकी मौत की जानकारी हुई। इससे कोहराम मच गया। जितेंद्र की जेवरात और रुपये लूट के लिए हत्या कर शव फेंकने का आरोप लगाया है।
22 अगस्त को घर से गया था जितेंद्र
रंगोली कॉलोनी निवासी देवदत्त शर्मा बीएसएनएल में टेलीफोन टेक्नीशियन के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके तीन बेटे चंद्रकांत, अनिल और जितेंद्र थे। जितेंद्र एत्माद्दौला क्षेत्र स्थित एक महाविद्यालय से पढ़ाई कर रहा था। भाई चंद्रकांत ने बताया कि जितेंद्र 22 अगस्त की सुबह 10:30 बजे घर से निकला था। इसके बाद लौटा नहीं।ए।
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इंटरनेट पर देखा भाई का फोटो
शुक्रवार को लावारिस शवों की जानकारी के लिए पुलिस की वेबसाइट पर खोज रहे थे। तभी जिपनेट पर एक लावारिस शव का फोटो नजर आया। वह उनके भाई का ही था। शव 23 अगस्त की रात को नई दिल्ली के अजमेरी गेट रेलवे स्टेशन पर मिला था। चेहरे से पहचान होने पर जानकारी साझा करने वाले विवेचक के नंबर पर काल किया।उसने फोटो मोबाइल पर भेज दिए। इससे मृतक की पहचान जितेंद्र के रूप में हो गई। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसके पास से पहचान का कुछ नहीं मिला था। इस कारण शव को लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया था। इससे परिवार में कोहराम मच गया। इस बारे में सिकंदरा पुलिस को भी जानकारी दी।
परिजन लगाते रहे थाने के चक्कर
मृतक के भाई चंद्रकांत शर्मा ने बताया कि जितेंद्र के लापता होने के बाद सिकंदरा पुलिस के रवैये से वो नाखुश हैं। आरोप लगाया कि पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। वो खुद ही तलाश में लगे। जितेंद्र ने राजामंडी स्टेशन से दिल्ली की टिकट ली थी। उन्हें उसके फुटेज मिल गए। इस बारे में पुलिस को बताया। मगर, दिल्ली पुलिस से संपर्क नहीं किया गया। वह खुद ही दिल्ली गए।
अजमेरी गेट स्टेशन पर भी भाई के फुटेज मिले। उन्हें 50 बार दिल्ली जाना पड़ा। फुटेज में भाई स्टेशन के बाहर नजर आया था। इसके बावजूद पुलिस ने तलाश नहीं की। अधिकारियों से भी मिले। आनलाइन मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की, लेकिन भाई की जानकारी नहीं लगी। उन्होंने जिपनेट पर देखकर भाई के शव की पहचान की।
परिजन के सवाल
- जितेंद्र ने घर से निकलने के एक घंटे बाद ट्रांस यमुना कालोनी स्थित बैंक से दो लाख रुपये और लाकर को खोलकर जेवरात निकाले, उसे इनका क्या करना था?- राजामंडी स्टेशन के फुटेज में एक युवक के साथ टिकट ली। शाम 6:47 बजे झेलम एक्सप्रेस में बैठ गया। उसके साथ युवक कौन था? वह सुबह से शाम तक जितेंद्र कहां और किसके साथ रहा? पुलिस ने युवक की पहचान क्यों नहीं की?
- 22 अगस्त की रात 10:08 बजे जितेंद्र अजमेरी गेट स्टेशन के फुटेज में पार्किंग में जाता नजर आया। उसकी लाश रेलवे लाइन पर मिली। जब वो बाहर आ गया था तो रेलवे लाइन पर कैसे पहुंचा?
- परिजन के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के विवेचक ने जितेंद्र की जीभ निकली होने और सिर में चोट लगी होने के बारे में बताया। ऐसा हत्या पर ही हो सकता है। पुलिस गंभीरता से जांच क्यों नहीं कर रही है?
- परिवार ने किसी तरह की रंजिश से इंकार किया है? ऐसे में जितेंद्र की हत्या कौन और क्यों करेगा? कोई जानकार ही जेवरात और रुपये लूट के लिए हत्या कर सकता है। पहचान का कुछ नहीं छोड़ा, जबकि उसके पास पहचान पत्र भी था।