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Agra Metro: ऑस्ट्रियन तकनीक से होगी टनल की खोदाई, पहले कॉरिडोर में आठ स्टेशन होंगे भूमिगत
Thu, 26 Nov 2020 05:37 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 26 Nov 2020 05:37 PM IST
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मेट्रो के कॉरिडोर एक में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के लिए ताजमहल से आगरा कॉलेज मैदान तक टनल की खोदई (एनएटीएम) ऑस्ट्रियन तकनीक से होगी। खोदाई से निकली मिट्टी बाहर नहीं आएगी। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) अंदर ही मिट्टी को पतला कर उसे प्लास्टर में बदल देगी। इससे टनल के अंदर ही मिट्टी का लेपन में इस्तेमाल हो जाएगा।
सिकंदरा से ताजमहल पूर्वी गेट तक 14 किमी मार्ग में 14 मेट्रो स्टेशन बनेंगे। इनमें आठ स्टेशन भूमिगत होंगे। भूमिगत स्टेशन के लिए समानांतर दो टनल बनेंगी। पुरानी मंडी चौराहे स्थित ताजमहल स्टेशन से आगरा कॉलेज इंटरचेंज स्टेशन तक टनल खोदी जाएगी। टनल खोदने के लिए मशीनें व मशीन चलाने वाले भी ऑस्ट्रिया से आएंगे।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के परियोजना प्रबंधक अरविंद राय ने बताया कि टनल खोदाई कवर एंड कट मैथड से होगी। सड़क यातायात व अन्य कोई अवरोध नहीं होगा। जगह-जगह मिट्टी के ढेर भी नहीं लगेंगे। टनल की खुदाई से निकली मिट्टी को पतला कर उसे प्लास्टर के स्वरूप में बदलकर टनल में ही इस्तेमाल किया जाएगा। जिस तकनीक से आगरा मेट्रो के लिए टनल बनाई जाएगी वह तकनीक 1962 में ऑस्ट्रिया में विकसित की गई थी। 1969 में सबसे पहले इस तकनीक से फ्रेंकफर्ट शहर में मेट्रो के लिए टनल बनाई गईं थीं।
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सिकंदरा से ताजमहल पूर्वी गेट तक 14 किमी मार्ग में 14 मेट्रो स्टेशन बनेंगे। इनमें आठ स्टेशन भूमिगत होंगे। भूमिगत स्टेशन के लिए समानांतर दो टनल बनेंगी। पुरानी मंडी चौराहे स्थित ताजमहल स्टेशन से आगरा कॉलेज इंटरचेंज स्टेशन तक टनल खोदी जाएगी। टनल खोदने के लिए मशीनें व मशीन चलाने वाले भी ऑस्ट्रिया से आएंगे।
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उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के परियोजना प्रबंधक अरविंद राय ने बताया कि टनल खोदाई कवर एंड कट मैथड से होगी। सड़क यातायात व अन्य कोई अवरोध नहीं होगा। जगह-जगह मिट्टी के ढेर भी नहीं लगेंगे। टनल की खुदाई से निकली मिट्टी को पतला कर उसे प्लास्टर के स्वरूप में बदलकर टनल में ही इस्तेमाल किया जाएगा। जिस तकनीक से आगरा मेट्रो के लिए टनल बनाई जाएगी वह तकनीक 1962 में ऑस्ट्रिया में विकसित की गई थी। 1969 में सबसे पहले इस तकनीक से फ्रेंकफर्ट शहर में मेट्रो के लिए टनल बनाई गईं थीं।
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ये है तकनीक की खासियत
- डायनिक डिजाइन : टनल का डिजाइन अंग्रेजी के डी के आकार का बनता है।
- टनल की खोदाई से निकली मिट्टी को चिनाई के लिए प्लास्टर में बदल देती है।
- खोदाई के दौरान मिट्टी नहीं धंसती, 25 से 50 मिमी की सीलिंग परत बनाती है।
- एनएटीएम तकनीक में लगे मापन यंत्रों से टनल खुदाई का माप सटीक रहता है।
- टनल में कंक्रीट की परत, गर्डर व अन्य सुरक्षा उपाय आसानी से कर सकती है।
18 महीने में तैयार होगी 16 हेक्टेयर में डिपो
एक तरफ तीन मेट्रो स्टेशन का निर्माण शुरू होने जा रहा है दूसरी तरफ पहली कॉरिडोर के डिपो के लिए खोदाई शुरू होगी। 26 महीने में तीन मेट्रो स्टेशन बनेंगे जबकि 18 महीने में 16 हेक्टेयर में डिपो तैयार हो जाएगा। डिपो निर्माण के लिए लीसा इंजीनियर्स की टीम भी आगरा पहुंच चुकी है। 112 करोड़ रुपये की लागत से डिपो का निर्माण होगा।
- डायनिक डिजाइन : टनल का डिजाइन अंग्रेजी के डी के आकार का बनता है।
- टनल की खोदाई से निकली मिट्टी को चिनाई के लिए प्लास्टर में बदल देती है।
- खोदाई के दौरान मिट्टी नहीं धंसती, 25 से 50 मिमी की सीलिंग परत बनाती है।
- एनएटीएम तकनीक में लगे मापन यंत्रों से टनल खुदाई का माप सटीक रहता है।
- टनल में कंक्रीट की परत, गर्डर व अन्य सुरक्षा उपाय आसानी से कर सकती है।
18 महीने में तैयार होगी 16 हेक्टेयर में डिपो
एक तरफ तीन मेट्रो स्टेशन का निर्माण शुरू होने जा रहा है दूसरी तरफ पहली कॉरिडोर के डिपो के लिए खोदाई शुरू होगी। 26 महीने में तीन मेट्रो स्टेशन बनेंगे जबकि 18 महीने में 16 हेक्टेयर में डिपो तैयार हो जाएगा। डिपो निर्माण के लिए लीसा इंजीनियर्स की टीम भी आगरा पहुंच चुकी है। 112 करोड़ रुपये की लागत से डिपो का निर्माण होगा।