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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर विधायक पुत्र की पिटाई, हटाए गए टोलकर्मी
Mon, 06 May 2019 12:00 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 06 May 2019 12:00 AM IST
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टोल प्लाजा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद टोल प्लाजा पर विधायक पुत्र और उनके दोस्तों की पिटाई के आरोपी छह टोलकर्मियों को पुलिस ने गिरफ्तार तो किया लेकिन, कोर्ट में पेश नहीं किया। सभी को थाने से ही जमानत दे दी गई। उधर यूपीडा ने इन सभी को नौकरी से हटा दिया है।
इन कर्मचारियों पर इटावा की विधायक सरिता भदौरिया के पुत्र रोहित भदौरिया और उनके साथियों अतुल दीक्षित, मनोज सिंह, प्रतीक सिंह की पिटाई का आरोप है।
बताया गया है कि गुरुवार रात रोहित भदौरिया अपने साथियों के साथ टोल से निकले तो उनके पास वापसी की पर्ची थी, जबकि टोलकर्मी उसे एक्सपायर ( पुरानी ) बता रहे थे। इसी बात पर विवाद हो गया। आरोप है कि टोलकर्मियों ने चारों की पिटाई कर दी।
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इन कर्मचारियों पर इटावा की विधायक सरिता भदौरिया के पुत्र रोहित भदौरिया और उनके साथियों अतुल दीक्षित, मनोज सिंह, प्रतीक सिंह की पिटाई का आरोप है।
बताया गया है कि गुरुवार रात रोहित भदौरिया अपने साथियों के साथ टोल से निकले तो उनके पास वापसी की पर्ची थी, जबकि टोलकर्मी उसे एक्सपायर ( पुरानी ) बता रहे थे। इसी बात पर विवाद हो गया। आरोप है कि टोलकर्मियों ने चारों की पिटाई कर दी।
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प्रतीक सिंह की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात टोलकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। विधायक पुत्र और साथियों की मांग थी कि टोलकर्मियों को हटाया जाए। शनिवार शाम पुलिस ने टोलकर्मी ओमवीर सिंह, निहाल सिंह, सतपाल सिंह, बृजेंद्र सिंह, नचिकेता, भीम सेन को गिरफ्तार कर लिया था।
इनकी पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई। इन्हें देर रात थाने से जमानत देकर छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि धाराएं संगीन न होने के कारण थाना से ही जमानत दे दी गई।
पुलिस ने कार्रवाई में ढिलाई दिखाई। एक भी पीड़ित का मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। अगर मेडिकल परीक्षण होता तो उसके आधार पर गंभीर धाराएं लगाई जा सकती थी। पिटाई में पीड़ितों को चोट भी लगी थी।
इनकी पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई। इन्हें देर रात थाने से जमानत देकर छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि धाराएं संगीन न होने के कारण थाना से ही जमानत दे दी गई।
पुलिस ने कार्रवाई में ढिलाई दिखाई। एक भी पीड़ित का मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। अगर मेडिकल परीक्षण होता तो उसके आधार पर गंभीर धाराएं लगाई जा सकती थी। पिटाई में पीड़ितों को चोट भी लगी थी।