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विपरीत परिस्थितियों में श्रीराम को याद करते थे गांधी: प्रो. शिवशंकर
Fri, 18 Oct 2019 02:15 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 18 Oct 2019 02:15 PM IST
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आगरा साहित्य उत्सव में मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शिवशंकर अवस्थी
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा कॉलेज मैदान में चल रहे आगरा साहित्य उत्सव में गुरुवार को 20वीं सदी के प्रमुख वैचारिक अधिष्ठान विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी गांधी, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. हेडगेवार, पं. दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. भीमराव आंबेडकर और लोहिया जैसे महापुरुषों के इर्दगिर्द घूमती रही।
मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शिवशंकर अवस्थी ने कहा कि अंग्रेज हमें एक देश नहीं, उपमहाद्वीप मानते थे। गांधी जी ने हमें एक सूत्र में बांधा और बताया कि हम एक देश और एक संस्कृति हैं।
उन्होंने कहा कि गांधी जी के कुल देवता श्रीराम थे। हमेशा विपरीत परिस्थिति में वह श्रीराम का ही स्मरण करते थे। डॉ. रजनीत त्यागी ने डॉ. हेडगेवार और पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. सुषमा सिंह ने किया।
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मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शिवशंकर अवस्थी ने कहा कि अंग्रेज हमें एक देश नहीं, उपमहाद्वीप मानते थे। गांधी जी ने हमें एक सूत्र में बांधा और बताया कि हम एक देश और एक संस्कृति हैं।
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उन्होंने कहा कि गांधी जी के कुल देवता श्रीराम थे। हमेशा विपरीत परिस्थिति में वह श्रीराम का ही स्मरण करते थे। डॉ. रजनीत त्यागी ने डॉ. हेडगेवार और पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. सुषमा सिंह ने किया।
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राष्ट्रीय पुस्तक मेले को नहीं मिल रहे साहित्य के कद्रदान
राष्ट्रीय पुस्तक मेले को साहित्य के कद्रदानों का इंतजार है। मेले में दो दिन बाकी हैं। देशभर से यहां आए प्रकाशकों को इस बार की दीपावली में घाटा जाता दिखाई दे रहा है।
इनका मानना है कि आगरा की साहित्यिक रुचि के बारे में जितना सुना था, उससे काफी कम यहां पाया है। 65 स्टालों में दस लाख से अधिक पुस्तकों में सैकड़ों विषयों का खजाना है। लेकिन किताबों के शौकीन यहां उतने नहीं हैं, जितने चंडीगढ़, बैंगलोर, मुंबई, दिल्ली आदि शहरों में हैं।
पुस्तक मेले के आयोजन प्रबंधक राजकुमार शुक्ला ने बताया कि यह देखकर काफी दुख हुआ कि यहां के लोगों में साहित्य के प्रति वह रुचि नहीं है, जो अन्य शहरों में दिखाई देती है।
राष्ट्रीय पुस्तक मेले को साहित्य के कद्रदानों का इंतजार है। मेले में दो दिन बाकी हैं। देशभर से यहां आए प्रकाशकों को इस बार की दीपावली में घाटा जाता दिखाई दे रहा है।
इनका मानना है कि आगरा की साहित्यिक रुचि के बारे में जितना सुना था, उससे काफी कम यहां पाया है। 65 स्टालों में दस लाख से अधिक पुस्तकों में सैकड़ों विषयों का खजाना है। लेकिन किताबों के शौकीन यहां उतने नहीं हैं, जितने चंडीगढ़, बैंगलोर, मुंबई, दिल्ली आदि शहरों में हैं।
पुस्तक मेले के आयोजन प्रबंधक राजकुमार शुक्ला ने बताया कि यह देखकर काफी दुख हुआ कि यहां के लोगों में साहित्य के प्रति वह रुचि नहीं है, जो अन्य शहरों में दिखाई देती है।