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Agra: ताजनगरी के चमड़े के जूते को जीआई टैग मिलने की उम्मीद, एफमेक ने किया था आवेदन
Sun, 27 Nov 2022 03:19 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 27 Nov 2022 03:19 PM IST
सार
आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) ने जिला उद्योग केंद्र की मदद से जीआई टैग पाने के लिए आवेदन किया था। 22 नवंबर को दिल्ली में रजिस्ट्रार (जीआई) की बैठक में सकारात्मक संकेत मिले हैं।
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जूता उद्योग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में 65 फीसदी और विदेशों में 27 फीसदी जूते की आपूर्ति करने वाले आगरा के चमड़े के जूतों को जल्द ही जीआई टैग मिलने की उम्मीद है। मुगल काल में 500 साल पहले यहीं से जूतों को बनाने का काम शुरू किया गया था। इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग (जीआई टैग) दिलाने की कवायद तेज हो गई है।
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आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) ने जिला उद्योग केंद्र की मदद से जीआई टैग पाने के लिए आवेदन किया है। 22 नवंबर को दिल्ली में रजिस्ट्रार (जीआई) की बैठक में सकारात्मक संकेत मिले हैं। दो साल पहले आगरा ने यह आवेदन किया था।
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एफमेक ने रजिस्ट्रार को आगरा में जूतों के निर्माण होने के तथ्य सौंपे हैं। इसमें आगरा गजेटियर, इंपीरियल गजेटियर और कई पुस्तकों को दस्तावेज के रूप में लगाया गया है। जूते बनाने की प्रक्रिया, क्षेत्र, नक्शा, हुनर का अनूठापन और क्वालिटी कंट्रोल समेत जूते के बनने के 29 चरण आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।
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उम्मीद है जल्द मिलेगा जीआई टैग
उपायुक्त उद्योग अनुज कुमार ने बताया कि जियोग्राफिकल इंडिकेशन के लिए आगरा के लेदर फुटवियर का आवेदन किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही जीआई टैग मिल जाएगा। वहीं, एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद उनका संगठन आगरा को वह दर्जा दिलाने की मुहिम में जुटेगा, जिससे वह महरूम है।आगरा को फुटवियर कैपिटल ऑफ वर्ल्ड करार देकर दुनिया भर में जोरदार प्रचार किया जाएगा। हम दुनिया को बताएंगे कि चीन नहीं, बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ब्रांड आगरा में ही बनाए जा रहे हैं। हमारी कारीगरी अनूठी है जो 500 वर्षों से विरासत में मिली है और पीढ़ी दर पीढ़ी यह हुनर विकसित होता आया है।