आगरा के इस कलाकार की थियेटर है जान, सौ से अधिक में कर चुके हैं काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
थियेटर की दुनिया का एक कलाकार आगरा का नाम रोशन कर रहा है। अभिनय के अलावा, नाट्य निर्देशन और पटकथा लेखन में भी इस कलाकार को महारथ हासिल है। मंचीय नाटकों के इस महारथी का नाम है डिंपी मिश्रा। डिंपी मिश्रा अपने 18 साल के सफर में 100 से अधिक नाटकों में अभिनय और निर्देशन कर चुके हैं। आगरा के अलावा दिल्ली, मुंबई, पूना, लखनऊ सहित देश के तमाम शहरों में उन्होंने नाटकों का मंचन किया है। डिंपी मिश्रा क कहना है कि अभिनय मेरी जिंदगी का हिस्सा है। थियेटर मुझे सुकून देता है। इससे मेरी जिंदगी में नई ऊर्जा का संचार होता है।
लंगड़े की चौकी के रहने वाले डिंपी ने भारतीय नाट्य एकेडमी, लखनऊ से ड्रामेटिक आर्ट्स में दो साल का पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पूना से उन्मुखीकरण पाठ्यक्रम किया। संजय दत्त अभिनीत फिल्म भूमि में डिंपी ने मुख्य जांच अधिकारी का किरदार निभाया है। वर्तमान में वह रंगलोक सांस्कृतिक संस्थान के निदेशक हैं। इस संस्थान के पांच छात्र भारतेंदु नाट्य अकेडमी और दो छात्र मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा, भोपाल में अभिनय का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
डिंपी मिश्रा सैंया भये कोतवाल, जात ही पूछो साधु की, इन्ना की आवाज, खारकू सिंह की नाक, दो बूंद पसीना, आजादी के बाद, अंधेर नगरी, होली, कोर्ट मार्शल, निहार छूटा जाए, दूसरे सपने, श्याम रंग, दूत वाक्याम, दफन करो, ये आदमी-ये चूहे, मैं भी पढ़ूंगा, मीरा, लकीरें, वीरांगना, बेहतर है मौत, लाजो जी, आपकी सोनिया, नजीर शाह फकीर, किस्सा एक अजनबी का, बड़े भाईसाहब, चक्कर चलाइये घनचक्कर, पासा, मातादीन चांद पर नाटकों में किरदार निभाए हैं।
इन नाटकों का किया निर्देशन
गिरगिट, गधा, टोपियों का बाजार, रिफंड, ऑपरेशन भारत, अंधेर नगरी, आगरा बोलता है, रसावतार, कृष्णा, औरतें, मैं भी पढ़ूंगा, बाबी की कहानी, अब हम आजाद हैं, नए समाज का निर्माण, चार किस्से चौपाल के, जरा हट के-जरा बच के, मीरा, होली, लल्लू लाल कौ रुपैय्या, प्लेटफार्म, रामलीला, मातादीन चांद पर, औरतें, द ब्लांड, बुरी द डैड, जात ही पूछो साधू की, श्याम रंग, रंगभूमि, लेजरांस एंड हिज बिलव्ड, लाइट आउट, हिलेना का हसबैंड, ताजमहल का टेंडर और जब शहर हमारा सोता है का निर्देशन किया।
इन नाटकों में दिया संगीत निर्देशन
कफन, सद्गति, खुदाई फौजदार, अंधेर नगरी, चौपाल, धूसर सपने, जैसा मुंह, वैसा तमाचा, उरु भंगम, कब तक पुकारुं, मध्यम वियोग।
नस-नस में है अभिनय
थियेटर एक्टर डिंपी मिश्रा के पिता राजेंद्र प्रसाद मिश्रा और मां रामेश्वरी मिश्रा का कहना है कि आइने के सामने खड़े होकर अभिनय करने की आदत उनमें बचपन से ही थी। बोले, डिंपी की नस-नस में अभिनय है। एक दिन भी ऐसा नहीं जाता, जिस दिन वह किसी न किसी किरदार के अभिनय का अभ्यास नहीं करता हो।