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मुजफ्फरनगर हादसाः मथुरा में बोले यात्री, डराने लगा ट्रेन का सफर
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 19 Aug 2017 10:38 PM IST
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मुजफ्फरनगर में दुर्घटनाग्रस्त हुई उत्कल एक्सप्रेस में मथुरा जंक्शन से 150 पैसेंजर सवार हुए थे। इनमें 21 का रिजर्वेशन था जबकि बाकी जनरल में थे। सबसे ज्यादा यात्री हरिद्वार और मेरठ के लिए रवाना हुए थे।
उत्कल एक्सप्रेस शनिवार की दोपहर को ठीक 12 बजे मथुरा जंक्शन पर प्लेटफार्म संख्या 2 पर आई थी। इस ट्रेन में तीर्थ यात्रियों का भी ग्रुप था। यह लोग ब्रज दर्शन करने के बाद हरिद्वार जा रहे थे। रेल प्रशासन का कहना है कि मथुरा से 60 सवारी मेरठ की थीं जबकि 72 हरिद्वार की थीं। अधिकांश लोग दर्शनार्थी थे जो ब्रज यात्रा के लिए आए थे। रेल अफसरों का कहना है कि यह ट्रेन दोपहर को बारह बजे मथुरा पहुंची थी।
वहीं जब लोगों को ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी मिली तो वह लोग बेचैन हो गए जिनका कोई अपना इस ट्रेन में यात्रा कर रहा था। रेलवे स्टेशन पहुंचकर जानकारी की गई। वहीं दहशत इतनी थी कि जिन लोगों को रात को जाना था वह भी बेचैन थे। प्लेटफार्म पर खड़े मथुरा निवासी रोहित का कहना था कि अब तो ट्रेन में सफर करने से भी डर लगने लगा है।
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उत्कल एक्सप्रेस शनिवार की दोपहर को ठीक 12 बजे मथुरा जंक्शन पर प्लेटफार्म संख्या 2 पर आई थी। इस ट्रेन में तीर्थ यात्रियों का भी ग्रुप था। यह लोग ब्रज दर्शन करने के बाद हरिद्वार जा रहे थे। रेल प्रशासन का कहना है कि मथुरा से 60 सवारी मेरठ की थीं जबकि 72 हरिद्वार की थीं। अधिकांश लोग दर्शनार्थी थे जो ब्रज यात्रा के लिए आए थे। रेल अफसरों का कहना है कि यह ट्रेन दोपहर को बारह बजे मथुरा पहुंची थी।
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वहीं जब लोगों को ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी मिली तो वह लोग बेचैन हो गए जिनका कोई अपना इस ट्रेन में यात्रा कर रहा था। रेलवे स्टेशन पहुंचकर जानकारी की गई। वहीं दहशत इतनी थी कि जिन लोगों को रात को जाना था वह भी बेचैन थे। प्लेटफार्म पर खड़े मथुरा निवासी रोहित का कहना था कि अब तो ट्रेन में सफर करने से भी डर लगने लगा है।
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यात्री भयभीत
आए दिन तो हादसे हो रहे हैं। कभी कहीं ट्रेन पटरी से उतर जाती है कभी कहीं लाइन काट दी जाती है। मोहित गुप्ता का कहना था कि सरकार ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिखती। अपराध भी लगातार बढ़ रहा है। ट्रेनों में कत्ल तक होने लगे हैं। परिवार के साथ तो सफर करने में भी डर लगता है।
प्रेमलता अपनी बहन के साथ दिल्ली जा रही थीं। जब उनसे घटना के बारे में पूछा गया तो कहा कि उन्हें स्टेशन पर आकर ही जानकारी हुई। इस प्रकार की घटनाएं डराती हैं। पहले ट्रेन का सफर सबसे बेहतर माना जाता था लेकिन अब सबसे ज्यादा संकट ट्रेन के सफर पर ही है।
प्रेमलता अपनी बहन के साथ दिल्ली जा रही थीं। जब उनसे घटना के बारे में पूछा गया तो कहा कि उन्हें स्टेशन पर आकर ही जानकारी हुई। इस प्रकार की घटनाएं डराती हैं। पहले ट्रेन का सफर सबसे बेहतर माना जाता था लेकिन अब सबसे ज्यादा संकट ट्रेन के सफर पर ही है।
हेल्पलाइन खोली
9454417574 (जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर)
97610534054 (रेलवे प्रशासन)
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