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Agra News: गेहूं की उन्नत तकनीकों से बढ़ेगा उत्पादन, घटेगी लागत

Thu, 13 Nov 2025 02:21 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Nov 2025 02:21 AM IST
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Advanced wheat technology will increase production and reduce costs
बिचपुरी। आरबीएस कॉलेज कृषि संकाय बिचपुरी के शस्य विज्ञान विभाग के प्रो. राजवीर सिंह ने किसानों को रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल गेहूं की पैदावार बढ़ाने के उपाय बताए हैं। उन्होंने गेहूं की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी।
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प्रो. राजवीर सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, घटती मृदा उर्वरता, खेती की लागत बढ़ना और बढ़ती जनसंख्या के दबाव के बीच खेती को टिकाऊ बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग अनिवार्य है। प्रो. सिंह के मुताबिक, 15 से 30 नवंबर तक बुवाई का उचित समय है। बुवाई से पहले फफूंद जनित रोगों से बचाव के लिए बीज को थायरम या कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करना चाहिए। बीज को जैव उर्वरक एनपीके कंसोर्टिया या एजोटोबैक्टर से उपचारित कर प्रयोग करें। 10–12 टन सड़ी गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर बुवाई के 20-25 दिन पहले डालें, जो जीवांश बढ़ाने में सहायक है। बुवाई से पूर्व 100 किलोग्राम बीज को 500 मिली नैनो डीएपी से उपचारित करते है, तो फसल का अंकुरण, बृद्धि, विकास और अच्छी उपज पर अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर ही करें। इसके लिए आरबीएस कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।
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प्रो. राजवीर सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे पारंपरिक पद्धतियों के साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं। इससे खेती की लागत घटेगी, फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी।
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प्रो. सिंह ने बताया कि सबसे उपयुक्त प्रजातियां डब्ल्यू.एच.-1402, डी.बी.डब्ल्यू.-370, डी.बी.डब्ल्यू.-371, डी.बी.डब्ल्यू.-303, एच.डी.-2967 ,एच.डी.-308, डी.बी.डब्ल्यू.-187, डी.बी.डब्ल्यू.-327 हैं। देर से बुवाई में एच.डी.-2851, डब्ल्यू.आर.-544 पी.बी.डब्ल्यू.-173, पी.बी.डब्ल्यू.-757 आदि प्रजातियां लाभदायक हैं।


20 दिन बाद करें सिंचाई
पहली सिंचाई बुवाई के 20–25 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद हर 20–25 दिन पर दोहराएं। चार से पांच सिंचाई पर्याप्त हैं। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 30–35 दिन बाद या पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फ्यूरॉन (33 ग्राम प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें। इससे जंगली जई, बथुआ, हिरनखुरी जैसे सकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार प्रभावी रूप से नष्ट होते हैं।
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