जेब खाली..., बन रहे प्लान: ADA के पास नहीं है नई योजनाओं के लिए बजट, बन रहे प्लान पर प्लान
प्राधिकरण की जेब खाली है। इसके बाद भी नई योजानओं के लिए प्लान पर प्लान बन रहे हैं। आलम ये है कि 2001 और 2021 का मास्टर प्लान भी अधूरा रह गया।
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जिस विकास प्राधिकरण पर शहर के सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी है, उसकी जेब खाली है। नई योजनाएं धरातल पर उतारने के लिए बजट नहीं। फिर भी प्लान पर प्लान बन रहे हैं। 2001 व 2021 का मास्टर प्लान पूरा नहीं हो सका। 2031 मास्टर प्लान दो साल से आपत्तियों में उलझा है।
ये है मामला
आगरा विकास प्राधिकरण के पास सिर्फ एक इनर रिंग रोड है। इसके आसपास नई योजनाओं पर प्राधिकरण का दारोमदार टिका है। यहां भविष्य में ग्रेट आगरा, मेडिसिटी, कन्वेंशन सेंटर व अन्य प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। लेकिन, प्रोजेक्ट के लिए बजट की बाधा आड़े आ रही है। बजट नहीं होने के कारण 14 साल से प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा नहीं बट सका है। इनके अलावा एडीए सिटी डेवलपमेंट प्लान भी धरातल पर नहीं उतर सका। एक और नया सिटी लॉजिस्टिक प्लान बनाने की कवायद शुरू हो गई है। मास्टर प्लान व जोनल प्लान 2031 का ड्राफ्ट 2021 से अधूरा पड़ा है। मेट्रो आने के बाद मास्टर प्लान में बदलाव हुए हैं। आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो सका।
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सिर्फ एक प्लानर है
उधर, प्लान पर प्लान बना रहे प्राधिकरण के पास सिर्फ एक प्लानर है। कई अन्य प्लान तैयार के निर्देश भी एडीए को शासन से मिले हैं। इधर, अवैध निर्माण नहीं रुक रहे। अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। एडीए क्षेत्र 10 वार्ड में विभाजित है। वहीं, इस संबंध में एडीए उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ का कहना है कि परियोजनाओं के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। मास्टर प्लान पर काम चल रहा है। शासन के निर्देश पर नए प्लान बनाए जा रहे हैं।