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एडीए के तीन मकान जमींदोज, दो की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 28 Jun 2015 02:33 AM IST
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शहीद नगर स्थित आगरा विकास प्राधिकरण के ईडब्ल्यूएस के तीन जर्जर मकान शनिवार की सुबह धराशायी हो गए। एक मकान में रह रहे कारपेंटर का परिवार मलबे में दब गया। चीखपुकार मच गई। पड़ोसियों ने मलबे में दबे कारपेंटर और उसके बेटे को बाहर निकाला। दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने मां-बेटी को बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। बाद में एडीए के अधिकारियों ने भी मौका मुआयना किया।
शहीद नगर में ईडब्ल्यूएस के डबल स्टोरी मकान बने हुए हैं। तकरीबन 30 साल पहले बने ज्यादातर मकान जर्जर हालत में हैं। इनमें से तमाम खाली पडे़ हैं। कुछ में अवैध रूप से लोग रह रहे हैं। पेशे से कारपेंटर वारिस अली (32) उर्फ छोटे पत्नी रेहाना (25) और दो बच्चों कामिल (10), असनी (8) के साथ फर्स्ट फ्लोर पर तीन साल से रह रहे थे। वारिस ने बताया कि रमजान के चलते जल्दी जगार हो जाती है। वह तकरीबन छह बजे उठे थे। तभी उन्हें लगा कि मकान का एक छज्जा गिरा। वह दौड़कर पत्नी और बच्चों को जगाने पहुंचे, लेकिन तब तक पहली मंजिल के तीन क्वार्टर तेज आवाज के साथ ढह गए। वारिस का पूरा परिवार मलबे में दब गया। निचले हिस्से में रहने वाले लोग भी जान बचाकर भागे। इसके बाद पड़ोसियों ने मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कवायद शुरू की। वारिस अली और कामिल को निकाल लिया गया। इस जद्दोजहद में 40 मिनट बीत चुके थे। सूचना पर सीओ सदर असीम चौधरी भी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। पुलिसकर्मियों ने मलबे में दबीं मां-बेटी को आधा घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। घायलों को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के कई घंटे बाद एडीए के अधिकारियों ने भी मौका मुआयना किया। सीओ सदर ने बताया कि मां-बेटी के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है।
वहीं फर्स्ट फ्लोर पर ही जो दूसरा मकान ढहा, उसमें पप्पू का परिवार रहता है। रमजान के चलते वह तड़के उठ गए थे। छत गिरते ही वह पत्नी और बच्चों को लेकर भाग निकला।
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शहीद नगर में ईडब्ल्यूएस के डबल स्टोरी मकान बने हुए हैं। तकरीबन 30 साल पहले बने ज्यादातर मकान जर्जर हालत में हैं। इनमें से तमाम खाली पडे़ हैं। कुछ में अवैध रूप से लोग रह रहे हैं। पेशे से कारपेंटर वारिस अली (32) उर्फ छोटे पत्नी रेहाना (25) और दो बच्चों कामिल (10), असनी (8) के साथ फर्स्ट फ्लोर पर तीन साल से रह रहे थे। वारिस ने बताया कि रमजान के चलते जल्दी जगार हो जाती है। वह तकरीबन छह बजे उठे थे। तभी उन्हें लगा कि मकान का एक छज्जा गिरा। वह दौड़कर पत्नी और बच्चों को जगाने पहुंचे, लेकिन तब तक पहली मंजिल के तीन क्वार्टर तेज आवाज के साथ ढह गए। वारिस का पूरा परिवार मलबे में दब गया। निचले हिस्से में रहने वाले लोग भी जान बचाकर भागे। इसके बाद पड़ोसियों ने मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कवायद शुरू की। वारिस अली और कामिल को निकाल लिया गया। इस जद्दोजहद में 40 मिनट बीत चुके थे। सूचना पर सीओ सदर असीम चौधरी भी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। पुलिसकर्मियों ने मलबे में दबीं मां-बेटी को आधा घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। घायलों को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के कई घंटे बाद एडीए के अधिकारियों ने भी मौका मुआयना किया। सीओ सदर ने बताया कि मां-बेटी के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है।
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वहीं फर्स्ट फ्लोर पर ही जो दूसरा मकान ढहा, उसमें पप्पू का परिवार रहता है। रमजान के चलते वह तड़के उठ गए थे। छत गिरते ही वह पत्नी और बच्चों को लेकर भाग निकला।
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