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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Action taken against dust pollution in Agra-Firozabad; rules remain confined to files in Mathura-Bharatpur.

Agra News: आगरा-फिरोजाबाद में धूल उड़ने पर कार्रवाई, मथुरा-भरतपुर में नियम फाइलाें में कैद

Tue, 23 Jun 2026 02:06 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 02:06 AM IST
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Action taken against dust pollution in Agra-Firozabad; rules remain confined to files in Mathura-Bharatpur.
जीआईसी मैदान में निर्माण स्थल पर मिट्टी के पहाड़, नदारद धुल के इंतजाम स्त्रोत अमर उजाला
टीटीजेड का हाल : 51.88 लाख जुर्माना लगाया, सेतु निगम को सिर्फ नोटिस, अन्य जिलों के प्रदूषण बोर्ड को नहीं दिखा उल्लंघन
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आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में धूल नियंत्रण के नियम कई जिलों में केवल कागजी साबित हो रहे हैं। मथुरा और भरतपुर में जहां धूल फाइलों में दब गई है, वहीं आगरा और फिरोजाबाद में उड़ते गुबार पर कार्रवाई की गई है। दोनों शहरों में धूल नियंत्रण में लापरवाही बरतने पर 51.88 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है। दूसरी ओर आरोप है कि सेतु निगम को सिर्फ नोटिस थमाकर छोड़ दिया गया है।

ताजमहल और उसके आसपास के ऐतिहासिक स्मारकों को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10,400 वर्ग किलोमीटर परिधि को पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। यहां कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 के सख्त नियम लागू हैं। इसके बावजूद विकास कार्यों के नाम पर उड़ रही धूल पर्यावरण और ताजमहल के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
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जून 2026 की टीटीजेड रिपोर्ट में अधिकारियों के दोहरे मापदंड उजागर हुए हैं। आगरा में नगर निगम ने नियमों के उल्लंघन पर सख्ती दिखाते हुए फरवरी 2025 तक 19,88,350 रुपये का जुर्माना वसूला है। फिरोजाबाद में नगर निगम ने पंजीकृत ठेकेदारों से 5,97,000 रुपये और आम जनता से मलबे के चालान के रूप में 26,12,550 रुपये अर्थदंड वसूला है।
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रुनकता-पथौली नहर के पास आरओबी-68 के लिए राज्य सेतु निगम और मलपुरा रोड पर एयरपोर्ट टर्मिनल निर्माण में धूल उड़ने पर अथॉरिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। फिरोजाबाद में भी निर्माणाधीन पुल के निरीक्षण में खामियां मिलने पर सेतु निगम के खिलाफ पत्राचार हुआ है।

पड़ोसी जिलों के दावों में बड़ा झोल

टीटीजेड में शामिल मथुरा और राजस्थान (भरतपुर) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उनके क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन की कोई घटना परिलक्षित नहीं हुई है। वहां लगातार हो रहे निर्माण के बीच जीरो प्रतिशत उल्लंघन का यह दावा जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है। वहीं, अलीगढ़ ने हाईकोर्ट में दायर रिट (4816/2024) का हवाला देकर पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूलने पर लगी रोक की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है। जलेसर और अवागढ़ जैसी नगर पालिकाओं ने कॉपी-पेस्ट आख्या दी है कि कार्य पूर्ण होने पर स्थल से सामग्री हटवाकर, जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

मेट्रो को क्लीन चिट पर उठ रहे सवाल

आगरा मेट्रो ने अपनी आख्या में एंटी-स्मॉग गन, स्प्रिंकलर, बैरिकेडिंग और कुबेरपुर में वेस्ट डंपिंग का विस्तार से जिक्र किया है। यूपीपीसीबी आगरा ने भी मेट्रो को यह कहते हुए क्लीन चिट दे दी है कि निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि फतेहाबाद रोड, एमजी रोड, कैंट स्टेशन से खंदारी, आईएसबीटी, सिकंदरा और कालिंदी विहार तक मेट्रो निर्माण के लिए भारी खुदाई चल रही है, जिससे प्रदूषण बोर्ड के निगरानी दावों पर सवाल उठ रहे हैं।


बंद हो पिक एंड चूज का खेल

पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता के अनुसार, आगरा और फिरोजाबाद में कुछ हद तक सख्ती है लेकिन अन्य जिलों के अधिकारी आंखें बंद कर शून्य उल्लंघन की रिपोर्ट से जनता को गुमराह कर रहे हैं। कागजी खानापूर्ति से बाहर निकलकर जब तक धरातल पर एक समान मॉनिटरिंग नहीं होगी, दम घोंटू धूल नहीं छंटेगी। पर्यावरण के साथ पिक एंड चूज का यह खेल बंद होना चाहिए।
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