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Agra News: पीएनसी इंफ्राटेक पर कार्रवाई से निवेशकों में खलबली, रडार पर कई और प्रोजेक्ट्स
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आगरा। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में घटिया गुणवत्ता और गंभीर लापरवाही के चलते नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की ओर से पीएनसी इंफ्राटेक को 3 साल के लिए डिबार किए जाने के बाद ताजनगरी के वित्तीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई की सूचना सार्वजनिक होते ही पिछले दो कारोबारी दिनों में कंपनी का शेयर करीब 30 फीसदी तक औंधे मुंह नीचे गिर गए।
चूंकि पीएनसी इंफ्राटेक के प्रमोटर्स मूल रूप से आगरा के निवासी हैं। राज्य सभा सांसद नवीन जैन वर्ष 2017 तक कंपनी के निदेशक रहे थे। मुख्यालय भी आगरा में स्थित है। जिले के कई बड़े उद्योगपतियों, कारोबारियों और स्थानीय निवेशकों ने कंपनी में मोटा पूंजी निवेश कर रखा है। शेयर में आई इस अप्रत्याशित गिरावट और कंपनी के डिबार होने से निवेशकों में अपने निवेश के भविष्य को लेकर भारी चिंता और बेचैनी फैल गई है। उधर, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे विवाद से सरकार और प्राधिकरण की हुई किरकिरी के बाद अब सरकारी तंत्र ने कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
एनएचएआई के सूत्रों के मुताबिक, भारतमाला परियोजना चरण-1 के तहत निर्माणाधीन करीब 228 किलोमीटर लंबे आगरा-बरेली (मथुरा-हाथरस-कासगंज-बदायूं-बरेली) फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट पर अधिकारियों ने अपनी निगरानी गड़ा दी है। लगभग 7,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पीएनसी इंफ्राटेक प्रमुख पैकेज पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, एनएचएआई ने अनौपचारिक रूप से कंपनी प्रबंधन को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं कि मौजूदा प्रोजेक्ट के निर्माण में किसी भी प्रकार की तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी लापरवाही और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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हर प्रोजेक्ट की निर्माण संबंधी गुणवत्ता की लगातार जांच की जाती है। मुख्यालय की ओर से पीएसी के कार्यों की जांच के लिए कोई विशेष निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। मुख्यालय से जो भी निर्देश आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राहुल सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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चूंकि पीएनसी इंफ्राटेक के प्रमोटर्स मूल रूप से आगरा के निवासी हैं। राज्य सभा सांसद नवीन जैन वर्ष 2017 तक कंपनी के निदेशक रहे थे। मुख्यालय भी आगरा में स्थित है। जिले के कई बड़े उद्योगपतियों, कारोबारियों और स्थानीय निवेशकों ने कंपनी में मोटा पूंजी निवेश कर रखा है। शेयर में आई इस अप्रत्याशित गिरावट और कंपनी के डिबार होने से निवेशकों में अपने निवेश के भविष्य को लेकर भारी चिंता और बेचैनी फैल गई है। उधर, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे विवाद से सरकार और प्राधिकरण की हुई किरकिरी के बाद अब सरकारी तंत्र ने कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
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एनएचएआई के सूत्रों के मुताबिक, भारतमाला परियोजना चरण-1 के तहत निर्माणाधीन करीब 228 किलोमीटर लंबे आगरा-बरेली (मथुरा-हाथरस-कासगंज-बदायूं-बरेली) फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट पर अधिकारियों ने अपनी निगरानी गड़ा दी है। लगभग 7,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पीएनसी इंफ्राटेक प्रमुख पैकेज पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, एनएचएआई ने अनौपचारिक रूप से कंपनी प्रबंधन को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं कि मौजूदा प्रोजेक्ट के निर्माण में किसी भी प्रकार की तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी लापरवाही और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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हर प्रोजेक्ट की निर्माण संबंधी गुणवत्ता की लगातार जांच की जाती है। मुख्यालय की ओर से पीएसी के कार्यों की जांच के लिए कोई विशेष निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। मुख्यालय से जो भी निर्देश आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राहुल सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई