जीजा-साला अपहरण कांडः दो लाख के लिए बोलेरो में उठा ले गए थे आरपीएफ कर्मी, आठ के खिलाफ कार्रवाई तय
आगरा में जीजा-साला अपहरण कांड में आठ आरपीएफ के जवान दोषी पाए गए हैं। मामले में सभी को चार्जशीट दी गई है। सभी के खिलाफ कार्रवाई लगभग तय है। इन्हें नौकरी से भी बर्खास्त किया जा सकता है।
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आगरा में बहुचर्चित जीजा-साला अपहरण कांड का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में आधा दर्जन से अधिक आरपीएफ कर्मी संदेह के घेरे पर हैं। जानकारी के मुताबिक जांच की रिपोर्ट लगभग तैयार है। जांच के बाद आधा दर्जन से अधिक लोगों को मेजर तो दो लोगों को माइनर चार्जशीट दी गई है। कार्रवाई से विभाग में अफरातफरी का माहौल है।
मामला मलपुरा थाना क्षेत्र के अभयपुरा का है। जलेसर निवासी कासिम तीन साल से यहां परिवार के साथ रह रहा है। वह फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करता है। इसी बीच अलीगढ़ के रामपुर शाहपुर निवासी उसका जीजा इकरार उसके घर आया। इसके बाद वह भी यहीं पर रुक गया। बीती 13 दिसंबर की आधी रात एक बोलेरो गाड़ी से पांच लोग इसके घर पहुंचे। पीड़ित के मुताबिक चार लोगों ने वर्दी पहन रखी थी।
दोनों को बोलेरो में डालकर उठा ले गए
गाड़ी बाहर करके वह घर में घुस आए। वह लोग कासिम और इकरार के साथ मारपीट करने लगे। विरोध करने पर दोनों को गाड़ी में डालकर उठा ले गए। इसके बाद घर के फोन पर व्हाट्सएप पर कॉल आई। फोन करने वाले ने दोनों को छोड़ने के लिए चार लाख रुपए की मांग की। पैसा पहुंचाने के लिए एक स्थान बताया।
चूंकि रोज कमाने काने वाला परिवार था तो इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा सके। कासिम का भाई किसी तरह 12 हजार रुपये की व्यवस्था करके बताए गए स्थान कैंट पुल के नीचे पहुंचा। वहां दो लोग पुलिस की वर्दी पहने हुए मिले। 12 हजार रुपये देखकर वह आक्रोशित हो उठे और वहां से चले गए।
दो लाख रुपए नहीं मिले तो जान से मार देंगे
थोड़ी देर बाद फिर व्हाट्सएप पर कॉल की। कहा कि दो लाख रुपए नहीं मिले तो दोनों को जान से मार देंगे। इसके बाद कासिम का भाई मलपुरा थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की पूरी जानकारी दी। इसके बाद अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त डा. प्रीतिंदर सिंह को मामले की जानकारी दी। उन्होंने डीसीपी पश्चिम सत्यजीत गुप्ता को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने आपरेशन शुरू कर दिया।
पुलिस ने पीड़ित के माध्यम से आरोपियों को संदेश भिजवाया कि पैसों का इंतजाम हो गया है। आरोपियों ने पैसे देने के लिए एक जगह बताई। इसके बाद रुपये लेने के लिए शमसाबाद रोड पर अमर होटल के पास आए। यहां पुलिस ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। अपहरणकर्ता जैसे ही फिरौती लेने आए पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। जांच करने पर पता चला कि आरोपी आरपीएफ पुलिसकर्मी हैं।
इंस्पेक्टर सुपर विजन में कमी के लिए किया गया निलंबित
एनसीआर के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि अपहरण की घटना में रेलवे सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं। इनमें आगरा कैंट में कार्यरत एक उपनिरीक्षक तथा दो अन्य कर्मियों की संलिप्तता की सूचना मिली है। हालांकि मामला सिविल पुलिस के क्षेत्र का है। मामले की जांच भी पुलिस कर रही है। जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए तीनों कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले में आरपीएफ आगरा कैंट इंस्पेक्टर सुरेंद्र चौधरी को सुपर विजन की कमी के लिए निलंबित किया गया है।
नौकरी से किया जा सकता है बर्खास्त
पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि युवकों के अपहरण के मामले आठ लोग जांच टीम के निशाने पर हैं। सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सभी आरोपी आरपीएफ से जुड़े हुए हैं। आठ लोगों में से छह लोगों को मेजर चार्जशीट दी गई है। साथ ही दो को माइनर चार्जशीट में रखा गया है। मेजर चार्जसीट के अंतर्गत आरोपी को नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है। सैलरी रोकने का भी प्रावधान होता है।