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चौहरे हत्याकांड का आरोपी 43 साल बाद पकड़ा
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मैनपुरी। थाना क्षेत्र के गांव नगला तारा में 43 साल पूर्व चौहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले को पुलिस ने लखनऊ में पकड़ा है। वह लखनऊ में भेष बदलकर रह रहा था। पुलिस ने उसको जेल भेज दिया है।
नगला तारा में वर्ष1978 में जमीन के विवाद में चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मदनसिंह, उनके भाई महेंद्र् सिंह, सरमन सिंह, ललित निवासी सकरा गढ़ी की हत्या की रिपोर्ट रामकृपाल निवासी सकरागढ़ी, राजनाथ, सुरेंद्र, यतेंद्र, गजेंद्र निवासी नगला तारा, गोविंद निवासी हरदुआ थाना बेबर के खिलाफ दर्ज हुई थी। सामूहिक हत्याकांड की रिपोर्ट सकरा गढ़ी निवासी विजयबहादुर तिवारी ने लिखाई थी। गोविंद को न्यायालय से बरी कर दिया गया। शेष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हाईकोर्ट में अपील के बाद पांचों को जमानत मिल गई।
विजय बहादुर ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायालय की सजा को सही मानकर उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिए। पुलिस ने राजनाथ, सुरेंद्र को जेल भेज दिया। केंद्रीय कारागार फतेहगढ में दोनों की मृत्यु हो गई। रामकृपाल, यतेंद्र, गजेंद्र 1981 से ही अपनी चल अचल संपत्ति बेच कर फरार हो गए। पुलिस द्वारा उन पर दस - दस हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। लखनऊ पुलिस ने यतेंद्र को लखनऊ के किला मोहम्मदी, थाना आशियाना में उसके मकान से पकड़ लिया। सीओ अमरबहादुर के निर्देश पर लखनऊ गए इंसपेक्टर अजीत सिंह लखनऊ से यतेंद्र त्रिपाठी को किशनी ले आए। उसका चालान करके जेल भेज दिया गया है।
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नगला तारा में वर्ष1978 में जमीन के विवाद में चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मदनसिंह, उनके भाई महेंद्र् सिंह, सरमन सिंह, ललित निवासी सकरा गढ़ी की हत्या की रिपोर्ट रामकृपाल निवासी सकरागढ़ी, राजनाथ, सुरेंद्र, यतेंद्र, गजेंद्र निवासी नगला तारा, गोविंद निवासी हरदुआ थाना बेबर के खिलाफ दर्ज हुई थी। सामूहिक हत्याकांड की रिपोर्ट सकरा गढ़ी निवासी विजयबहादुर तिवारी ने लिखाई थी। गोविंद को न्यायालय से बरी कर दिया गया। शेष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हाईकोर्ट में अपील के बाद पांचों को जमानत मिल गई।
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विजय बहादुर ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायालय की सजा को सही मानकर उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिए। पुलिस ने राजनाथ, सुरेंद्र को जेल भेज दिया। केंद्रीय कारागार फतेहगढ में दोनों की मृत्यु हो गई। रामकृपाल, यतेंद्र, गजेंद्र 1981 से ही अपनी चल अचल संपत्ति बेच कर फरार हो गए। पुलिस द्वारा उन पर दस - दस हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। लखनऊ पुलिस ने यतेंद्र को लखनऊ के किला मोहम्मदी, थाना आशियाना में उसके मकान से पकड़ लिया। सीओ अमरबहादुर के निर्देश पर लखनऊ गए इंसपेक्टर अजीत सिंह लखनऊ से यतेंद्र त्रिपाठी को किशनी ले आए। उसका चालान करके जेल भेज दिया गया है।
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