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विकास प्राधिकरण का खाता सीज
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:38 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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आयकर विभाग ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बैंक खाता सीज कर दिया है। इससे प्राधिकरण के सभी प्रकार लेनदेन ठप हो गए हैं। प्राधिकरण पर करीब 39 करोड़ रुपये टैक्स बकाया है। इस कारण आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की है।
आयकर विभाग ने एडीए से इनकम टैक्स की डिमांड रखी थी। तब एडीए ने स्वयं को नो प्रोफिट, नो लॉस पर काम करने वाली संस्था बताकर हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने एडीए की अपील को नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि जब प्राधिकरण ब्याज लेता है, जुर्माना वसूलता है तो नो प्रोफिट नो लॉस वाली संस्था कहां से हो गई। इस पर आयकर विभाग ने 2013-14 में भी एडीए का खाता सीज किया था। तब अधिकारियों के बीच वार्ता के बाद खाता चालू किया था। अब आयकर विभाग ने फिर कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि करीब 39 करोड़ रुपये टैक्स न देने पर खाता सीज किया गया है। एडीए सचिव राजकुमार का कहना है कि आयकर के छह केस चल रहे थे। चार मामलों का निस्तारण हो चुका है। दो मामले लंबित हैं। उन्हीं प्रकरणों में खाता सीज की कार्रवाई की गई है। इस मामले में उच्चाधिकारियों के स्तर से वार्ता की जा रही है।
कंगाली में हो गया आटा गीला
एडीए की माली हालात पहले से ही खस्ता थी। इनररिंग रोड के निर्माण में प्राधिकरण काफी खर्च कर चुका है। वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए संपत्ति विभाग, नियोजन और प्रवर्तन विभाग के अधिकारियों पर जबरदस्त दबाव है। ठेकेदारों का भुगतान, एडीए की आवास योजनाओं में जिन लोगों ने भूखंड प्राप्त करने को लाटरी प्रक्रिया में भाग लिया था, उनके भूखंड न निकलने पर उनका रिफंड भी करना है। ऐसे में खाता सीज होने के कारण एडीए अफसर परेशान हैं।
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आयकर विभाग ने एडीए से इनकम टैक्स की डिमांड रखी थी। तब एडीए ने स्वयं को नो प्रोफिट, नो लॉस पर काम करने वाली संस्था बताकर हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने एडीए की अपील को नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि जब प्राधिकरण ब्याज लेता है, जुर्माना वसूलता है तो नो प्रोफिट नो लॉस वाली संस्था कहां से हो गई। इस पर आयकर विभाग ने 2013-14 में भी एडीए का खाता सीज किया था। तब अधिकारियों के बीच वार्ता के बाद खाता चालू किया था। अब आयकर विभाग ने फिर कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि करीब 39 करोड़ रुपये टैक्स न देने पर खाता सीज किया गया है। एडीए सचिव राजकुमार का कहना है कि आयकर के छह केस चल रहे थे। चार मामलों का निस्तारण हो चुका है। दो मामले लंबित हैं। उन्हीं प्रकरणों में खाता सीज की कार्रवाई की गई है। इस मामले में उच्चाधिकारियों के स्तर से वार्ता की जा रही है।
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एडीए की माली हालात पहले से ही खस्ता थी। इनररिंग रोड के निर्माण में प्राधिकरण काफी खर्च कर चुका है। वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए संपत्ति विभाग, नियोजन और प्रवर्तन विभाग के अधिकारियों पर जबरदस्त दबाव है। ठेकेदारों का भुगतान, एडीए की आवास योजनाओं में जिन लोगों ने भूखंड प्राप्त करने को लाटरी प्रक्रिया में भाग लिया था, उनके भूखंड न निकलने पर उनका रिफंड भी करना है। ऐसे में खाता सीज होने के कारण एडीए अफसर परेशान हैं।
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