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Agra News: कारीगरों की कमी और टैरिफ की मार... प्रभावित हो रहा गलीचा कारोबार

Tue, 13 Jan 2026 06:03 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2026 06:03 AM IST
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A shortage of artisans and the impact of tariffs... the carpet business is suffering.
गलीचा बनातीं महिलाएं
आगरा। पैर रखने पर आरामदायक एहसास कराना ही आगरा के गलीचे (कारपेट) की खासियत है, लेकिन पारंगत कारीगरों और सब्सिडी की कमी से गलीचा कारोबार दम तोड़ रहा है। इसके बाद अमेरिकी टैरिफ ने कारोबार को और झटका दिया। उद्यमियों का कहना है कि कारीगरों के लिए एडवांस ट्रेनिंग सेंटर, सब्सिडी बढ़ाने और ओडीओपी में शामिल करने से गलीचा कारोबार को गति मिल सकती है।
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आगरा कारपेट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बलवीर शरण गोयल ने बताया कि जिले में 40-50 निर्यातक, 100 निर्माता और 150 से अधिक विक्रेता हैं। गलीचा कारोबार से 50 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। गलीचा ट्रेनिंग के लिए आधुनिक सेंटर नहीं है। इससे प्रशिक्षित कारीगरों की कमी से उद्यम जूझ रहा है। निर्यात और लाइसेंस पर 17 फीसदी सब्सिडी मिलती थी, जिसे घटाकर साढ़े तीन फीसदी कर दिया है।
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उन्होंने कहा कि गलीचे का अधिकांश निर्यात अमेरिका में था लेकिन 50 फीसदी टैरिफ होने से गलीचा कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। एडवांस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षु कारीगरों को अच्छा मानदेय देने पर युवाओं में भी रुझान बढ़ेगा। ये सुविधाएं मिलें तो गलीचा कारोबार फिर से उन्नत होगा। एमएसएमई के संयुक्त सचिव अनुज कुमार का कहना है कि अगले चरण में कारपेट को भी ओडीओपी में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।
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सब्सिडी 25 फीसदी की जाए
- आगरा कारपेट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व सचिव प्रवीण बंसल ने बताया कि कारपेट का निर्यात सबसे ज्यादा 80 फीसदी अमेरिका में होता था। 50 फीसदी टैरिफ के बाद भारी कमी आई है। सरकार अगर निर्यात पर 25 फीसदी सबिसडी दे तो उद्यमी भी मुनाफे में कुछ कमी कर टैरिफ से मुकाबला कर सकते हैं।
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कारपेट हब बने और ओडीओपी में हो शामिल
- कारपेट उद्यमी योगेश गोयल का कहना है कि गलीचा कारोबार को व्हाइट कैटेगिरी में शामिल कर नए उद्यम के लिए सब्सिडी मिले। कारपेट हब बनाने की जरूरत है, जिसमें सस्ती दर पर प्लाॅट मिलें। इससे उद्यमी निर्माण इकाई खोल सकें। ओडीओपी में कारपेट उद्यम शामिल होने से कारोबार के साथ रोजगार भी तेजी से बढ़ेगा।

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आगरा से ही पूरे देश में फैला गलीचा कारोबार
गलीचा कारोबार आगरा से ही पूरे देश में फैला है। बताया जाता है कि मुगल बादशाह बाबरकालीन बुनाई की कला भारत लाया। अकबर ने इसे आगरा में स्थापित किया। अकबर ने फारसी बुनकरों को आगरा बुलाया। इस पर भारतीय और फारसी तकनीक का समावेश हुआ। आगरा से ही ये पंजाब, लाहौर, जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में फैला।
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