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Agra News: 600 से 1000 रुपये में एक शर्ट, नेकर और टाई...50 प्रतिशत तक मुनाफा...स्कूल यूनिफार्म के नाम पर भी मनमानी, हल्का सा कलर बदलकर की जा रही कमाई

Wed, 25 Mar 2026 12:51 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:51 AM IST
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A shirt, necker, and tie cost between 600 and 1000 rupees...up to 50 percent profit...arbitrariness in the name of school uniforms, with profits being made by slightly changing the color.
आगरा। निजी स्कूलों की मनमानी का आलम यह है कि किताब और कॉपियों के साथ यूनिफार्म के नाम पर भी अभिभावकों का आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है। हर वर्ष यूनिफार्म की शर्ट या नेकर में हल्का सा कलर बदलकर नया खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। यूनिफार्म और जूता खरीदने के लिए भी दुकान तय कर रखी है। 600 से 1000 रुपये में एक शर्ट, नेकर और टाई बेची जा रही है। वहीं 300 रुपये वाला जूता 50 प्रतिशत मुनाफे पर 600 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
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कक्षा बदलने के साथ यूनिफार्म भी महंगी होती जाती है। नर्सरी से कक्षा आठ तक कई स्कूलों में यूनिफार्म बदलने का खेल लंबे समय से चल रहा है। निजी स्कूलों और यूनिफार्म विक्रेताओं की मिलीभगत से अभिभावकों को महंगी यूनिफार्म और जूता खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। पिछले वर्ष एक मिशनरी स्कूल ने तय दुकान से जूता खरीदने पर अभिभावकों को मजबूर किया। यहां पर बाजार से कई गुना अधिक रेट पर जूता बेचा जा रहा था। इसका अभिभावकों ने विरोध भी किया था। यह खेल लगातार चल रहा है। दुकानों पर साइज के हिसाब से हाफ शर्ट व पैंट के रेट निर्धारित है। अभिभावकों की मजबूरी यह है कि यूनिफार्म इन दुकानों से खरीदनी पड़ेगी क्योंकि दूसरी दुकान की यूनिफार्म को स्कूल प्रबंधक स्वीकृति नहीं देगा।
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गोल्ड और सिल्वर कैटेगरी में बांटा
यूनिफार्म विक्रेताओं के खेल भी निराले है। अभिभावकों को लूटने के लिए हर हथकंडा अपनाया जाता है। हाफ शर्ट व पैंट को कैटेगरी में बांटा हुआ है। गोल्ड कैटेगरी में 22 इंच हाफ शर्ट की कीमत गोल्ड कैटेगरी में 200 और सिल्वर में 175 रुपये है। इसी प्रकार 30 इंच सलवार-कुर्ता की कीमत गोल्ड कैटेगरी में 525 रुपये और सिल्वर में 425 रुपये है। इस हिसाब से अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।
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स्कूलों में खुली दुकानें, अधिकारी मौन
कई स्कूलों के परिसर में किताब और यूनिफार्म की दुकान तक खुली हुई है। अभिभावकों को यहां अधिक रेट में यूनिफार्म और किताब खरीदनी पड़ती है। शास्त्रीपुरम स्थित कई स्कूलों के परिसर में यह दुकान संचालित हो रही है। इसके बाद भी माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन बने हैं। किसी अभिभावकों के शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।
अभिभावकों पर बनाया दबाव तो होगी कार्रवाई
अभिभावकों को एक ही दुकान से किताब और यूनिफार्म खरीदने के लिए मजबूर करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई होगी। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) चंद्रशेखर ने आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा और मैनपुरी के जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र जारी किया है। उन्होेंने पत्र में लिखा है कि सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के अधिकांश स्कूलों में शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर कमीशनखोरी का मोटा खेल खेला जा रहा है। इन स्कूलों ने बच्चों के लिए खरीदी जाने वाली ड्रेस, स्टेशनरी, बैग आदि के लिए एक सिंडिकेट बनाया हुआ है। कई विद्यालयों ने अपने कैंपस में दुकान खोल ली है। उन्होंने निर्देश दिया है कि ऐसे विद्यालयों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। इसके बाद भी कोई अनियमितता मिलेगी, तो बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने बताया कि किताब या यूनिफार्म के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

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हर साल खरीदनी पड़ रही यूनिफार्म
हर साल यूनिफार्म की शर्ट या नेकर में एक कलर की पट्टी बदल दी जाती है। इस वजह से नई खरीदनी पड़ती है। जबकि एक यूनिफार्म का सेट कम से कम दो से तीन साल चल सकता है। स्कूलों की मनमानी पर रोक लगनी चाहिए। -शिवदीप भदौरिया अभिभावक
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