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140 साल पुरानी अनोखी परंपरा: 40 दिन एक समय भोजन, ढोढा-चटनी का भोग; ऐसे मनता है सद्गुरु टेंऊंराम का जन्मोत्सव
Sat, 04 Jul 2026 10:33 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 04 Jul 2026 10:33 AM IST
सार
आगरा के प्रेम प्रकाश आश्रमों में सद्गुरु स्वामी टेंऊंराम महाराज के 140वें जन्मोत्सव पर 40 दिनों तक एक समय भोजन, ढोढा-चटनी का भोग और श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ का पाठ किया जा रहा है। सादगी, सेवा और प्रेम का संदेश देने वाली यह परंपरा आज भी सिंधी समाज पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहा है।
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सद्गुरु स्वामी टेंऊंराम महाराज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिर्फ एक समय भोजन, सुबह-शाम ढोढा-चटनी का भोग, 40 दिनों तक व्रत और लगातार श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ का पाठ। यह कोई साधारण धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और सादगी के प्रतीक सद्गुरु स्वामी टेंऊंराम महाराज के 140वें जन्मोत्सव की अनूठी परंपरा है, जिसका निर्वहन आज भी आगरा के चारों प्रेम प्रकाश आश्रमों में पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है।
आगरा में काला महल, केदार नगर, कमला नगर-बोदला सहित चारों आश्रमों में 9 जून से जन्मोत्सव पर्व शुरू हो चुका है। मुख्य समारोह 19 जुलाई को मनाया जाएगा। केदार नगर स्थित साईं टेंऊंराम आश्रम की संचालिका भगवती बताती हैं कि जन्मोत्सव के पूरे 40 दिनों तक रोज सुबह और शाम सद्गुरु टेंऊंराम महाराज को प्रिय ढोढा-चटनी का भोग लगाया जाता है।
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सिंधी सेंट्रल पंचायत के उपाध्यक्ष एवं सेवायत जगदीश बताते हैं कि इन 40 दिनों में श्रद्धालु श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ का नियमित पाठ करते हैं। इस दौरान एक समय ही भोजन किया जाता है। इसमें ढोढा-चटनी अवश्य होती है।
बाजरे और ज्वार की रोटी को कहते हैं ढोढा
केदार नगर आश्रम की संचालिका भगवती बताती हैं कि सिंध में पहले ज्वार और बाजरे की रोटी प्रमुख भोजन होती थी। सिंधी भाषा में इस मोटी रोटी को ''ढोढा'' कहा जाता है। इसके साथ पुदीना और हरी मिर्च की चटनी परोसी जाती थी। सद्गुरु टेंऊंराम महाराज श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक यही ढोढा-चटनी प्रसाद के रूप में खिलाते थे। आज भी यह परंपरा निभाई जा रही है।
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आगरा में काला महल, केदार नगर, कमला नगर-बोदला सहित चारों आश्रमों में 9 जून से जन्मोत्सव पर्व शुरू हो चुका है। मुख्य समारोह 19 जुलाई को मनाया जाएगा। केदार नगर स्थित साईं टेंऊंराम आश्रम की संचालिका भगवती बताती हैं कि जन्मोत्सव के पूरे 40 दिनों तक रोज सुबह और शाम सद्गुरु टेंऊंराम महाराज को प्रिय ढोढा-चटनी का भोग लगाया जाता है।
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सिंधी सेंट्रल पंचायत के उपाध्यक्ष एवं सेवायत जगदीश बताते हैं कि इन 40 दिनों में श्रद्धालु श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ का नियमित पाठ करते हैं। इस दौरान एक समय ही भोजन किया जाता है। इसमें ढोढा-चटनी अवश्य होती है।
बाजरे और ज्वार की रोटी को कहते हैं ढोढा
केदार नगर आश्रम की संचालिका भगवती बताती हैं कि सिंध में पहले ज्वार और बाजरे की रोटी प्रमुख भोजन होती थी। सिंधी भाषा में इस मोटी रोटी को ''ढोढा'' कहा जाता है। इसके साथ पुदीना और हरी मिर्च की चटनी परोसी जाती थी। सद्गुरु टेंऊंराम महाराज श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक यही ढोढा-चटनी प्रसाद के रूप में खिलाते थे। आज भी यह परंपरा निभाई जा रही है।