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लोकसभा में फिर उठा आगरा में खंडपीठ का मुद्दा
Agra
Updated Wed, 03 Dec 2014 05:30 AM IST
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आगरा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापित को लेकर दो केंद्रीय मंत्रियों की रस्साकसी के बीच सांसद चौधरी बाबूलाल ने इस मुद्दे को फिर से संसद में उठा दिया है। उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही के दौरान आगरा में खंडपीठ स्थापित करने की मांग उठाई।
मंगलवार को फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान खंडपीठ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट खंडपीठ का प्रस्ताव 1981 में प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा था। जिस पर केंद्र सरकार ने जसवंत सिंह आयोग का गठन कर दिया था। आयोग ने 1986 में केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी। जिसमें आगरा में खंडपीठ स्थापित करने की सिफारिश की थी। तत्कालीन राज्यसभा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसकी पैरोकारी की थी। सांसद चौधरी बाबूलाल का कहना है कि यह आगरा का दुर्भाग्य है कि पिछले तीन दशक में खंडपीठ स्थापित नहीं हो पाई है। जिसके चलते आसपास के जिलों के लोगों को न्याय के लिए लगभग 300 किलोमीटर दूर इलाहाबाद में भटकना पड़ता है। संसद में उन्होंने मांग को दोहराते हुए कहा कि खंडपीठ के लिए शहर के अधिवक्ता और क्षेत्रीय जनता लंबे समय से आंदोलन भी कर रही है। सांसद ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ की स्थापना के लिए आगरा से बेहतर दूसरा विकल्प नहीं है।
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मंगलवार को फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान खंडपीठ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट खंडपीठ का प्रस्ताव 1981 में प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा था। जिस पर केंद्र सरकार ने जसवंत सिंह आयोग का गठन कर दिया था। आयोग ने 1986 में केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी। जिसमें आगरा में खंडपीठ स्थापित करने की सिफारिश की थी। तत्कालीन राज्यसभा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसकी पैरोकारी की थी। सांसद चौधरी बाबूलाल का कहना है कि यह आगरा का दुर्भाग्य है कि पिछले तीन दशक में खंडपीठ स्थापित नहीं हो पाई है। जिसके चलते आसपास के जिलों के लोगों को न्याय के लिए लगभग 300 किलोमीटर दूर इलाहाबाद में भटकना पड़ता है। संसद में उन्होंने मांग को दोहराते हुए कहा कि खंडपीठ के लिए शहर के अधिवक्ता और क्षेत्रीय जनता लंबे समय से आंदोलन भी कर रही है। सांसद ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ की स्थापना के लिए आगरा से बेहतर दूसरा विकल्प नहीं है।
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