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भाई ही निकला प्रधानाचार्या का कातिल
Agra
Updated Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
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आगरा। ताजगंज की रचना पैलेस कालोनी में प्रधानाचार्या आरती चाहर की हत्या सगे भाई राकेश ने अपने जेल के साथी लोकेश के साथ मिलकर की थी। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद भी बहन ने उसकी जमानत नहीं कराई थी। जमानत के नाम पर घर से जेवरात लेकर हड़प लिए थे। इससे वह बहन से नफरत करने लगा था। पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
बता दें, सुमित्रा देवी इंटर कालेज की प्रधानाचार्य आरती चाहर की गुरुवार की दोपहर घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। आरती के पति नेकराम कुशवाह ने अपने साले डिफेंस कालोनी निवासी राकेश चाहर और उसके साथी लोकेश के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट लिखाई थी। कहा था कि राकेश आरती से अकसर पैसे की डिमांड करता था। वह गुरुवार की सुबह भी बाइक से बहन से मिलने घर आया था। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि छह घंटे बाद ही राकेश और उसके साथी लोकेश को गिरफ्तार कर लिया।
राकेश ने पुलिस को बताया कि आरती ने नेकराम से प्रेम विवाह कर लिया था। इससे घरवाले नाराज थे, लेकिन बाद में आरती मायके आने-जाने लगी थी। रेप के एक मामले में जब वह (राकेश) जेल में था तो उसकी जमानत कराने के लिए आरती ने हामी भरी थी। इसके लिए घर (मायके) से जेवरात भी ले गई, लेकिन जमानत नहीं कराई। इससे वह नाराज था। केस में पैरवी उसके पिता ने ही की। गुरुवार की दोपहर वह लोकेश के साथ आया। पैसे मांगने पर आरती ने इनकार कर दिया। राकेश ने कहा कि घर सब्जी ले जानी है। इस पर आरती फ्रिज से आलू निकालने लगी। तभी राकेश ने पीछे से रस्सी से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। जेवर उतार लिए। बेटे युवराज को लोकेश के साथ दूसरे कमरे में भेज दिया था। बाद में आरती को बेड लिटाकर चाकू से गला रेत डाला। आरोपियों के कब्जे से चाकू, रस्सी और बाइक बरामद कर ली गई है। टीम में सीओ सदर असीम चौधरी, एसओ मधुर मिश्रा, एसएसआई प्रमोद कुमार शामिल रहे।
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कभी बहन पर जान छिड़कता था राकेश
राकेश अपनी बहन आरती को कभी बेहद प्यार करता था। उसने पुलिस को बताया कि नेकराम उसके घर आया करता था। आरती उसे भाई मानती थी। राखी तक बांधी थी, लेकिन उसके जेल जाने के बाद दोनों ने शादी कर ली। जब उसने जमानत कराने के बहाने घर से जेवरात ले लिए तो वह उससे नफरत करने लगा। आरती अब उसकी आर्थिक मदद भी नहीं कर रही थी।
पिछले साल छूटा था जेल से
राकेश के खिलाफ 2006 में रेप का मामला दर्ज कराया गया था। वर्ष 2007 में वह जमानत पर छूटकर आया था। इसके बाद केस ट्रायल पर आया और उसे 2009 में दस साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद वह दोबारा जेल चला गया। लोअर कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर उसके पिता ने हाईकोर्ट की शरण ली। यहां से 2013 में उसे जमानत मिली थी।
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बता दें, सुमित्रा देवी इंटर कालेज की प्रधानाचार्य आरती चाहर की गुरुवार की दोपहर घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। आरती के पति नेकराम कुशवाह ने अपने साले डिफेंस कालोनी निवासी राकेश चाहर और उसके साथी लोकेश के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट लिखाई थी। कहा था कि राकेश आरती से अकसर पैसे की डिमांड करता था। वह गुरुवार की सुबह भी बाइक से बहन से मिलने घर आया था। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि छह घंटे बाद ही राकेश और उसके साथी लोकेश को गिरफ्तार कर लिया।
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राकेश ने पुलिस को बताया कि आरती ने नेकराम से प्रेम विवाह कर लिया था। इससे घरवाले नाराज थे, लेकिन बाद में आरती मायके आने-जाने लगी थी। रेप के एक मामले में जब वह (राकेश) जेल में था तो उसकी जमानत कराने के लिए आरती ने हामी भरी थी। इसके लिए घर (मायके) से जेवरात भी ले गई, लेकिन जमानत नहीं कराई। इससे वह नाराज था। केस में पैरवी उसके पिता ने ही की। गुरुवार की दोपहर वह लोकेश के साथ आया। पैसे मांगने पर आरती ने इनकार कर दिया। राकेश ने कहा कि घर सब्जी ले जानी है। इस पर आरती फ्रिज से आलू निकालने लगी। तभी राकेश ने पीछे से रस्सी से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। जेवर उतार लिए। बेटे युवराज को लोकेश के साथ दूसरे कमरे में भेज दिया था। बाद में आरती को बेड लिटाकर चाकू से गला रेत डाला। आरोपियों के कब्जे से चाकू, रस्सी और बाइक बरामद कर ली गई है। टीम में सीओ सदर असीम चौधरी, एसओ मधुर मिश्रा, एसएसआई प्रमोद कुमार शामिल रहे।
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कभी बहन पर जान छिड़कता था राकेश
राकेश अपनी बहन आरती को कभी बेहद प्यार करता था। उसने पुलिस को बताया कि नेकराम उसके घर आया करता था। आरती उसे भाई मानती थी। राखी तक बांधी थी, लेकिन उसके जेल जाने के बाद दोनों ने शादी कर ली। जब उसने जमानत कराने के बहाने घर से जेवरात ले लिए तो वह उससे नफरत करने लगा। आरती अब उसकी आर्थिक मदद भी नहीं कर रही थी।
पिछले साल छूटा था जेल से
राकेश के खिलाफ 2006 में रेप का मामला दर्ज कराया गया था। वर्ष 2007 में वह जमानत पर छूटकर आया था। इसके बाद केस ट्रायल पर आया और उसे 2009 में दस साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद वह दोबारा जेल चला गया। लोअर कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर उसके पिता ने हाईकोर्ट की शरण ली। यहां से 2013 में उसे जमानत मिली थी।