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मौत का मुंह मोड़ने की तकनीक
Agra
Updated Tue, 04 Nov 2014 05:30 AM IST
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आगरा। रडियोग्राफी की तकनीक हाथ आने से चिकित्सकों के लिए दिनोंदिन और ज्यादा मरीजों की ओर बढ़ती मौत को रोकना संभव हो रहा है। गर्भवती महिलाओं के मामले में तो यह वरदान ही है। मातृ मृत्युदर आधी हुई और शिशु मृत्युदर में 30 फीसदी की कमी आई। पैट स्कैन से तो कैंसर के शुरूआती लक्षण भी पता चल जाते हैं।
रेडियोग्राफी का जन्म 115 साल पहले हुआ। अल्ट्रासाउंड तकनीकी आने के बाद से चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव हुए। पहले भ्रूण की विकृति से प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव गर्भवती की मौत का कारण बनता था। अब यह आंकड़ा एक लाख में 258 तक सिमट गया है जो एक दशक पहले के मुकाबले करीब आधा है। आगरा आब्सटेट्रीकल एंड गायनकोलॉजिकल सोसायटी अध्यक्ष डा. मधु राजपाल के मुताबिक विकसित रेडियोग्राफी से गर्भ में भ्रूण की विकृतियां, नाल के नीचे जुड़ा होना आदि विकृतियाें का पहले से पता लग जाता है। इससे इलाज और सफल प्रसव संभव हो जाता है। इंडियन रेडियोजीकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन यूपी चैप्टर अध्यक्ष डा. भूपेंद्र आहूजा ने बताया कि मरीज की जान बचाने में रेडियोग्राफी चिकित्सक की बड़ी मदद करता है।
पैट स्कैन से नहीं बचेगा कैंसर
कैट स्कैन और एमआरआई के बाद रेडियोग्राफी में लेटेस्ट तकनीक पैट स्कैन है। इससे कोशिकाओं में कैंसर के बारीक लक्षण भी पकड़ में आ जाते हैं।
आंखों का भी अल्ट्रासाउंड
अब नेत्ररोगों के इलाज में रेडियोग्राफी की भूमिका बढ़ी है। आंख का अल्ट्रासाउंड से क्षतिग्रस्त बारीक कोशिकाएं चिह्नित की जाती है। पेशियाें के घाव और संक्रमण जांच में भी यह कारगर है।
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कन्या भ्रूणहत्या बनी चुनौती
वरदान के साथ यही तकनीक कन्याभ्रूण के लिए काल भी है। बिगड़ते लिंगानुपात का बड़ा कारण रेडियोग्राफी है। इसी से गर्भ में कन्या भ्रूण होने का पता चलता है। इसकी रोकथाम बड़ी चुनौती है।
रेडियोग्राफी का विकास
1897 : एक्सरे
1978 : अल्ट्रासाउंड
1980 : सीटी स्कैन
1983 : एमआरआई
2005 : पैट स्कैन
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रेडियोग्राफी का जन्म 115 साल पहले हुआ। अल्ट्रासाउंड तकनीकी आने के बाद से चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव हुए। पहले भ्रूण की विकृति से प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव गर्भवती की मौत का कारण बनता था। अब यह आंकड़ा एक लाख में 258 तक सिमट गया है जो एक दशक पहले के मुकाबले करीब आधा है। आगरा आब्सटेट्रीकल एंड गायनकोलॉजिकल सोसायटी अध्यक्ष डा. मधु राजपाल के मुताबिक विकसित रेडियोग्राफी से गर्भ में भ्रूण की विकृतियां, नाल के नीचे जुड़ा होना आदि विकृतियाें का पहले से पता लग जाता है। इससे इलाज और सफल प्रसव संभव हो जाता है। इंडियन रेडियोजीकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन यूपी चैप्टर अध्यक्ष डा. भूपेंद्र आहूजा ने बताया कि मरीज की जान बचाने में रेडियोग्राफी चिकित्सक की बड़ी मदद करता है।
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पैट स्कैन से नहीं बचेगा कैंसर
कैट स्कैन और एमआरआई के बाद रेडियोग्राफी में लेटेस्ट तकनीक पैट स्कैन है। इससे कोशिकाओं में कैंसर के बारीक लक्षण भी पकड़ में आ जाते हैं।
आंखों का भी अल्ट्रासाउंड
अब नेत्ररोगों के इलाज में रेडियोग्राफी की भूमिका बढ़ी है। आंख का अल्ट्रासाउंड से क्षतिग्रस्त बारीक कोशिकाएं चिह्नित की जाती है। पेशियाें के घाव और संक्रमण जांच में भी यह कारगर है।
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कन्या भ्रूणहत्या बनी चुनौती
वरदान के साथ यही तकनीक कन्याभ्रूण के लिए काल भी है। बिगड़ते लिंगानुपात का बड़ा कारण रेडियोग्राफी है। इसी से गर्भ में कन्या भ्रूण होने का पता चलता है। इसकी रोकथाम बड़ी चुनौती है।
रेडियोग्राफी का विकास
1897 : एक्सरे
1978 : अल्ट्रासाउंड
1980 : सीटी स्कैन
1983 : एमआरआई
2005 : पैट स्कैन