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स्ट्रेचर न उपकरण, फर्श पर इलाज
Agra
Updated Thu, 25 Sep 2014 05:30 AM IST
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बाह। जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संवेदना को झकझोर देने वाला मामला सामने आया। लूट में घायल के इलाज में पुलिस और सफाई कर्मचारी सहयोगी बने। हाथों में कपड़े काटने वाली कैंची और बेड की जगह जमीन थी। घायलों की सेवा के लिए 108 एंबुलेंस भी अंत तक नहीं पहुंची।
जैतपुर में दिल्ली के जितेंद्र पर जानलेवा हमला हुआ। करीब सात बजे पुलिसकर्मी सामुदायिक स्वास्थ केंद्र लेकर पहुंचे। वहां न चिकित्सकीय स्टाफ था और न ही आपरेशन के उपकरण। बेड की जगह घायल को जमीन पर ही लिटाकर प्राथमिक इलाज किया गया पर रक्त बहना बंद नहीं हुआ। हालात बिगड़ने पर प्राइवेट एंबुलेंस में उसे एसएन मेडिकल कालेज भेजा गया। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। सीएचसी अधीक्षक डा. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि उपकरणों की कमी थी लेकिन कैंची से घायल के कपड़े काटे गए। कोई लापरवाही नहीं हुई, जान बचाने के हर संभव प्रयास किए गए। सीएमओ डा. एचएस दानू ने कहा कि सीएचसी से नदारद स्टाफ और अव्यवस्थाओं की जांच होगी। लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
शरीर पर थे नौ जख्म
जीतेंद्र पर जान से मारने की नीयत पर हमला हुआ। उसके सिर, गर्दन और हाथों में नौ जख्म मिले। चिकित्सक बताते हैं कि जख्म की चौड़ाई डेढ़ सेमी तक थी। संभवत: कुल्हाड़ी से वार किया गया होगा।
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अंत तक नहीं पहुंची 108
अगर 108 एंबुलेंस सेवा तत्काल मिली होती तो घायल की जान बच सकती थी। अधीक्षक ने बताया कि हालात बिगड़ने पर तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन किया। आते ही भेजने की बात हुई लेकिन वह नहीं आई। तब प्राइवेट वाहन से साढ़े नौ बजे उसे एसएन इमरजेंसी भेजा गया। बता दें, आगरा में 108 एंबुलेंस की संख्या 19 है।
फिर भी नहीं लिया सबक
- अमर उजाला ने चिकित्सकीय अव्यवस्थाओं की पोल खोली थी। 102 एंबुलेंस सेवा से लेकर स्ट्रचर तक की बदहाली को प्रकाशित किया था। बावजूद, स्वास्थ्य विभाग ने इससे सबक लेकर सक्रियता नहीं दिखाई।
यह होना चाहिए स्टाफ:
सीएचसी में जनरल सर्जन, आर्थोपैडिक, गायकनोलोजिस्ट के अलावा चार स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट, ओटी असिस्टेंट और वार्ड ब्वाय अनिवार्य हैं। जबकि यहां एक फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय और दो मेडिकल आफिसर ही थे।
ऑपरेशन थिएटर भी नहीं
- इमरजेंसी मामलों के लिए आपरेशन थिएटर भी नहीं था। चिकित्सकीय स्टाफ कम होेने के अलावा आपरेशन के लिए उपकरण भी नहीं थे। चिकित्सकों का कहना है कि हाल ही में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इसे सामुदायिक बनाया गया है, इसलिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
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जैतपुर में दिल्ली के जितेंद्र पर जानलेवा हमला हुआ। करीब सात बजे पुलिसकर्मी सामुदायिक स्वास्थ केंद्र लेकर पहुंचे। वहां न चिकित्सकीय स्टाफ था और न ही आपरेशन के उपकरण। बेड की जगह घायल को जमीन पर ही लिटाकर प्राथमिक इलाज किया गया पर रक्त बहना बंद नहीं हुआ। हालात बिगड़ने पर प्राइवेट एंबुलेंस में उसे एसएन मेडिकल कालेज भेजा गया। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। सीएचसी अधीक्षक डा. धीरेंद्र कुमार ने बताया कि उपकरणों की कमी थी लेकिन कैंची से घायल के कपड़े काटे गए। कोई लापरवाही नहीं हुई, जान बचाने के हर संभव प्रयास किए गए। सीएमओ डा. एचएस दानू ने कहा कि सीएचसी से नदारद स्टाफ और अव्यवस्थाओं की जांच होगी। लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
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शरीर पर थे नौ जख्म
जीतेंद्र पर जान से मारने की नीयत पर हमला हुआ। उसके सिर, गर्दन और हाथों में नौ जख्म मिले। चिकित्सक बताते हैं कि जख्म की चौड़ाई डेढ़ सेमी तक थी। संभवत: कुल्हाड़ी से वार किया गया होगा।
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अंत तक नहीं पहुंची 108
अगर 108 एंबुलेंस सेवा तत्काल मिली होती तो घायल की जान बच सकती थी। अधीक्षक ने बताया कि हालात बिगड़ने पर तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन किया। आते ही भेजने की बात हुई लेकिन वह नहीं आई। तब प्राइवेट वाहन से साढ़े नौ बजे उसे एसएन इमरजेंसी भेजा गया। बता दें, आगरा में 108 एंबुलेंस की संख्या 19 है।
फिर भी नहीं लिया सबक
- अमर उजाला ने चिकित्सकीय अव्यवस्थाओं की पोल खोली थी। 102 एंबुलेंस सेवा से लेकर स्ट्रचर तक की बदहाली को प्रकाशित किया था। बावजूद, स्वास्थ्य विभाग ने इससे सबक लेकर सक्रियता नहीं दिखाई।
यह होना चाहिए स्टाफ:
सीएचसी में जनरल सर्जन, आर्थोपैडिक, गायकनोलोजिस्ट के अलावा चार स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट, ओटी असिस्टेंट और वार्ड ब्वाय अनिवार्य हैं। जबकि यहां एक फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय और दो मेडिकल आफिसर ही थे।
ऑपरेशन थिएटर भी नहीं
- इमरजेंसी मामलों के लिए आपरेशन थिएटर भी नहीं था। चिकित्सकीय स्टाफ कम होेने के अलावा आपरेशन के लिए उपकरण भी नहीं थे। चिकित्सकों का कहना है कि हाल ही में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इसे सामुदायिक बनाया गया है, इसलिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।