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‘उस्ताद की बंदिशों को सहेजना ही सच्ची श्रद्धांजलि’
Agra
Updated Thu, 17 Jul 2014 05:30 AM IST
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आगरा। दुनिया भर में अपनी बंदिशों से आगरा घराने का नाम रौशन करने वाले उस्ताद अकील अहमद खान के निधन पर बुधवार को नागरी प्रचारिणी सभा में सभा आयोजित की गई। शहर के संगीतज्ञों, उस्ताद के शिष्यों और उनके नजदीकियों ने अपने संस्मरणों और भावनाओं के साथ नम आंखों से श्रद्धांजलि दी।
मोहन पिया के नाम से मशहूर उस्ताद को श्रद्धांजलि देने के लिए संगीत कला केंद्र द्वारा नागरी प्रचारिणी सभा भवन में सभा आयोजित की गई। सभा में संगीतज्ञ राम मोहन दुबे, सुरेश हरिदास, सुधीर नारायन, डा. एचपी सिंह, गोपी, करतार सिंह, शिवरंजनी, डा. शशि तिवारी, जसवंत सिंह ने कहा कि खां साहब आदर्श गुरु थे। शिष्यों के साथ उनका पिता जैसा नाता रहा। रियाज कराने, सिखाने में वह बेमिसाल थे। संगीत कला केंद्र निदेशिका प्रतिभा तलेगांवकर, जन नाट्य संघ अध्यक्ष डा. जितेंद्र रघुवंशी तथा कवि रामेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि उनकी बंदिशों को सहेजकर रखने की जरूरत है। यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संस्था अध्यक्ष रानी सरोज गौरिहार ने कहा कि वह आगरा के संगीत पर लेखन कर पुस्तक का प्रकाशित करेंगी। उस्ताद के पुत्र सुहैल अहमद ने पिता की स्मृतियों को बयां किया। सभा में खां साहब के नाम पर गली का नाम रखने का प्रस्ताव रखा गया।
सभा में फहीम अहमद, पं. रवींद्र तलेगांवकर, संतोष कुलश्रेष्ठ, देव प्रकाश शर्मा, एसडी श्रीवास्तव, डा. संजीव शर्मा, तेज प्रकाश आदि मौजूद रहे। संचालन केशव तलेगांवकर ने किया।
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आगरा घराने की रोशनी थे अकील मियां
आगरा। हिंदुस्तान बिरादरी ने उस्ताद अकील अहमद खान को श्रद्धांजलि दी। अध्यक्ष डा. सिराज कुरैशी ने कहा कि आगरा घराने का चिराग गुल हो गया, लेकिन उनकी बंदिशें घराने को रौशन करती रहेंगी। शोक व्यक्त करने वालों में जियाउद्दीन, जलाल अहमद बुखारी, ग्यास कुरैशी, रफीक खान, परवेज खां आदि मौजूद रहे।
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मोहन पिया के नाम से मशहूर उस्ताद को श्रद्धांजलि देने के लिए संगीत कला केंद्र द्वारा नागरी प्रचारिणी सभा भवन में सभा आयोजित की गई। सभा में संगीतज्ञ राम मोहन दुबे, सुरेश हरिदास, सुधीर नारायन, डा. एचपी सिंह, गोपी, करतार सिंह, शिवरंजनी, डा. शशि तिवारी, जसवंत सिंह ने कहा कि खां साहब आदर्श गुरु थे। शिष्यों के साथ उनका पिता जैसा नाता रहा। रियाज कराने, सिखाने में वह बेमिसाल थे। संगीत कला केंद्र निदेशिका प्रतिभा तलेगांवकर, जन नाट्य संघ अध्यक्ष डा. जितेंद्र रघुवंशी तथा कवि रामेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि उनकी बंदिशों को सहेजकर रखने की जरूरत है। यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संस्था अध्यक्ष रानी सरोज गौरिहार ने कहा कि वह आगरा के संगीत पर लेखन कर पुस्तक का प्रकाशित करेंगी। उस्ताद के पुत्र सुहैल अहमद ने पिता की स्मृतियों को बयां किया। सभा में खां साहब के नाम पर गली का नाम रखने का प्रस्ताव रखा गया।
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सभा में फहीम अहमद, पं. रवींद्र तलेगांवकर, संतोष कुलश्रेष्ठ, देव प्रकाश शर्मा, एसडी श्रीवास्तव, डा. संजीव शर्मा, तेज प्रकाश आदि मौजूद रहे। संचालन केशव तलेगांवकर ने किया।
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आगरा घराने की रोशनी थे अकील मियां
आगरा। हिंदुस्तान बिरादरी ने उस्ताद अकील अहमद खान को श्रद्धांजलि दी। अध्यक्ष डा. सिराज कुरैशी ने कहा कि आगरा घराने का चिराग गुल हो गया, लेकिन उनकी बंदिशें घराने को रौशन करती रहेंगी। शोक व्यक्त करने वालों में जियाउद्दीन, जलाल अहमद बुखारी, ग्यास कुरैशी, रफीक खान, परवेज खां आदि मौजूद रहे।