फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   तो नहीं उग सकेगा अन्न भी

तो नहीं उग सकेगा अन्न भी

Thu, 17 Jul 2014 05:30 AM IST
Agra
Agra Updated Thu, 17 Jul 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
आगरा। संत रहीमदास का दोहा - रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून। सैकड़ों वर्ष पहले जल संचयन की महत्ता बताते हुए संतों ने चेताया था कि अगर पानी नहीं रहा तो मनुष्य का अस्तित्व ही मिट जाएगा। अब यह खतरा जनपद में भी मंडराने लगा है। यदि नहीं चेते तो पेट भरने के लिए अन्न तक नहीं उग सकेगा। यहां हर साल लगभग आधा मीटर भूगर्भ जलस्तर गिर रहा है। यही वजह है कि सात ब्लाक डार्क जोन घोषित कर दिए गए हैं। अब यहां सिंचाई और भवन निर्माण जैसे कामों के लिए ट्यूबवेेल या सबमर्सिबल लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस भयावह स्थिति के बाद भी केवल कागजों में ही जल संचय के उपाय हो रहे हैं।
विज्ञापन

भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, फतेहपुर सीकरी, अकोला, बिचपुरी, खंदौली, बरौली अहीर और शमसाबाद ऐसे ब्लॉक हैं जहां पर भूगर्भ जल का 100 प्रतिशत से अधिक दोहन किया जा रहा है। जोकि अतिदोहित क्षेत्र में पहुंच गए हैं। जबकि सैंया में 90 से 100 प्रतिशत और अछनेरा, जगनेर और खेरागढ़ ब्लॉक में 70 से 90 प्रतिशत तक भूगर्भ जल का दोहन किया जा रहा है।
विज्ञापन

सिंचाई लायक भी नहीं रहा पानी
भूगर्भ जल विभाग की जांच रिपोर्ट लवण की भयावह स्थिति भी बयां कर रही है। जनपद का भूगर्भ जल अब सिंचाई के लायक भी नहीं रह गया है। अतिदोहित क्षेत्र में पानी अधिक लवणीय है। सल्फेट की मात्रा भी काफी अधिक है, जो 700 पीपीएम तक पहुंच गई है जबकि 200 से अधिक का पानी खराब गुणवत्ता का माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

500 से अधिक तालाबों पर कब्जा
सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग कमेटी ने वर्ष 2007 में 115 तालाबों पर कब्जे की रिट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी। इसके बाद शहर में 102 गांव शामिल किए गए। पाया गया कि 450 तालाबों पर और कब्जा है।
कागजों में हो रही रेन वाटर हार्वेस्टिंग
जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए शासन ने कई नियम कायदे बनाए हैं। 300 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंड का एडीए मानचित्र तभी स्वीकृत करेगा जब उसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रावधान होगा। नियम को और कड़ा करते हुए शासन ने 50 हजार रुपये की गारंटी मनी भी जमा कराने का प्रावधान किया है। एडीए के चीफ टाउन प्लानर इश्तियाक अहमद का कहना है कि नक्शे की मियाद पांच साल होती है इसके बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।
ऐसे होगा जल संचयन
- वर्षा जल के संचयन के लिए गड्ढे, ताल, बांध, बंधिया बनाई जाए।
- उपलब्ध परंपरागत जल स्रोतों की डीसिल्टिंग व मरम्मत कराई जाए।
- कृषि कार्यों में सिंचाई की आधुनिक विधियों का प्रयोग हो।
- शहरी क्षेत्र में रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण हो।
- जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए।

मंडल में भूगर्भ जल की स्थिति अत्यंत चिंतनीय है। आगरा में भूजल स्तर में प्रति वर्ष औसतन 45 सेमी. की गिरावट दर्ज की जा रही है। यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले 10 वर्षों में हालात बहुत खराब होंगे।

- वीके उपाध्याय, सीनियर जियोफिजिस्ट भूगर्भ जल विभाग खंड आगरा

आगरा में बारिश (मिमी. में)
2013 710.6
2012 638.58
2011 464.70
2010 409.78
2009 282.52
औसत 512.38

22 जुलाई तक भूजल सप्ताह
जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए भूगर्भ जल विभाग 16 से 22 जुलाई तक भूगर्भ जल सप्ताह मना रहा है। इसमें जल विभाग, सिंचाई, वन, शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन एवं अन्य शासकीय विभाग भी शामिल होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed